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होटवार स्थितस्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में दो महीने में समस्याएं दूर होंगी

  • रखरखाव के अभाव में परिसर की हालत बिगड़ी
  • सिविल वर्क के 90 फीसदी सर्वे का काम पूरा
  • प्रथम चरण में 38 करोड़ रुपये खर्च होंगे
संवाददाता

रांची: होटवार स्थित खेल कॉम्प्लेक्स की बिगड़ी हालत को सुधारा जाने वाला है। हाल ही

में इस बारे में कई सूचनाएं ऐसी आयी थी, जिसमें यह बताया गया था कि उचित रखरखाव

के अभाव में वहां की हालत बिगड़ी हुई है। यहां तक कि एक परिसर के अंदर पीपल का पेड़

भी उग आया है। एक खेल संबंधित वेब साइट स्पोट्स झारखंड ने इसे प्रमुखता के साथ

प्रकाशित भी किया था। अब बताया गया है कि इसके आमूलचूल परिवर्तन की तैयारियां

पूरी हो चुकी हैं। खास कर वहां निर्माण संबंधी यानी सिविल वर्क के सारे काम बहुत जल्दी

पूरे कर लिये जाएंगे। जेएसएसपीएस ने इसके लिए कॉम्प्लेक्स के सभी स्टेडियमों में

सिविल के जरूरी कामों के सर्वे का काम नये सिरे से शुरू कर दिया है। अब तक 90 फीसदी

तक इस काम को पूरा किया जा चुका है। सीसीएल ने इसके लिए इंजीनियरों की और दूसरी

टीम लगा रखी है।

कुछ दिनों पहले एथलेटिक्स स्टेडियम में ट्रैक के किनारे गिरे फेंसिंग को देखते हुए

जेएसएसपीएस ने सिविल वर्क के कामों को प्राथमिकता दी है। कुल 9 स्टेडियमों और एक

हॉस्टल में जो भी जरूरी सिविल के काम हैं, उन्हें जुलाई-अगस्त तक पूरा करने का टारगेट

जेएसएसपीएस ने बनाया है।

जेएसएसपीएस से मिली जानकारी के अनुसार 2015 में स्पोर्टस कॉम्पलेक्स हैंड ओवर

हुआ। उस दौरान स्टेडियमों की जरूरतों को देखते हुए सीसीएल के सहयोग से कई जरूरी

काम कराये गये। इसके बाद मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में पहले फेज में 38 करोड़ रुपये की

लागत से रिपेयरिंग-रेनोवेशन का काम करना तय किया गया था। उउछ के डायरेक्टर्स ने

इसकी मंजूरी भी दी। ठइउउ के जरिये मुख्य स्टेडियम, टानाभगत इंडोर स्टेडियम व वहां

गेस्ट हाउस के रिपेयरिंग-रेनोवेशन व सभी स्टेडियमों की बाहरी दीवार का रंग-रोगन

कराया भी गया।

होटवार स्थित परिसर में पहले हुआ था अधूरा काम

हालांकि इस दौरान यह विवाद भी सामने आया कि पहले फेज में सभी स्टेडियमों की

रिपेयरिंग-रेनोवेशन का काम नहीं किया जा सका था। आधे-अधूरे तरीके से ही एक-दो

स्टेडियम में काम हुआ जिसके कारण अब भी खासकर सिविल का काम करना पड़ रहा है।

वित्तीय वर्ष 2016-17 से अब तक तकरीबन 50 करोड़ रुपये स्पोर्ट्स एकेडमी के संचालन

और स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स की देखभाल पर खर्च किये जा चुके हैं। 2016-17 में 4 करोड़ 83

लाख, 2017-18 में 13 करोड़ 5 लाख, 2018-19 में 12 करोड़ 75 लाख और 2019-20 में

लगभग 20 करोड़। इसमें राज्य सरकार और सीसीएल का 50-50 का योगदान है।

जेएसएसपीएस द्वारा मुख्य रूप से लगभग 450 बच्चों को अपने पास रखकर उनकी

पढ़ाई, खेल सामग्री, खान पान पर खर्च किया जाता है। इसके अलावा स्टेडियमों में सिविल

वर्क, गार्डनिंग, सुरक्षा, कोचों और अन्य स्टाफ की सैलरी पर भी खर्चा किया जाता है।

वर्तमान वित्तीय वर्ष में जेएसएसपीएस की ओर से 437 बच्चों पर 2 करोड़ 20 लाख,

सिविल कामों पर 2 करोड़ 40 लाख, इलेक्ट्रॉनिक्स मेंटेनेंस पर 2 करोड़, सुरक्षा पर 1 करोड़

80 लाख, गार्डनिंग पर 1 करोड़ 10 लाख खर्च किये जा चुके हैं। इसके अलावा ऑफिस के

संचालन, स्टेशनरी वगैरह पर भी खर्च किया गया है।


 

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