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मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के मंदिर का भूमि पूजन किया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने

  • भये प्रगट कृपाला दीनदयाला

  •  

    पूर्ण धार्मिक मर्यादाओं के साथ हुआ पूजन संपन्न
  • अयोध्या अब वाकई राम मय नजर आने लगा है
  • स्थानीय लोगों को धार्मिक पर्यटन से भी उम्मीद
विशेष प्रतिनिधि

अयोध्याः मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के मंदिर के भूमि पूजन के बाद से ही पूरे अयोध्या

का माहौल अजीब किस्म का भक्तिपूर्ण हो गया है। दरअसल पिछले पांच सौ वर्षों से

निरंतर चले आ रहे संघर्ष और अन्य राजनीतिक एवं सामाजिक कारणों से भी यह असंख्य

लोगों की इच्छा का सम्मान भी है। शायद इसी वजह से अयोध्या नगरी के लोग भी आज

प्रभु श्री राम मय हो गये हैं। भूमि पूजन का कार्यक्रम पूर्व घोषित हुआ और आज के

समारोह के मुख्य यजमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे विधि विधान से इसकी शिलाओं

का भी पूजन किया।

मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्म स्थली पर भव्य मंदिर निर्माण के लिये भूमि

पूजन कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश दुनिया के करोड़ों रामभक्तों के सदियों से खुली

आंखों से देखे जा रहे सपने को साकार कर दिया। श्री मोदी ने अपने ऐतिहासिक दौरे की

शुरूआत हनुमानगढी के दर्शन कर की जिसके बाद उन्होने श्रीरामजन्मभूमि पर

विराजमान रामलला के दर्शन किये और आरती उतारी। बाद में प्रधानमंत्री पीले रंग के

कुर्ते,सफेद धोती और भगवा गमझा धारण किये भूमि पूजन के लिये चौकी पर विराजे।

काशी के प्रकांड तीन विद्धानों ने भूमि पूजन का अनुष्ठान शुरू किया। श्री मोदी को

यजमान के तौर पर संकल्प दिलाया गया और गणेश पूजन के साथ भूमि पूजन का

कार्यक्रम शुरू हो गया। इस मौके पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल,मुख्यमंत्री योगी

आदित्यनाथ,राष्ट्रीय स्वयं सेवक प्रमुख मोहन भागवत मौजूद थे। पुरोहितों ने प्रधानमंत्री

से विधिवत पूजा अर्चना करायी। इस दौरान चांदी की नौ शिलाओं का पूजन किया गया।

करीब 12 बजे शुरू हुआ भूमि पूजन कार्यक्रम करीब 48 मिनट चला।

मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के मंदिर का पूजन अभिजीत मुहूर्त में

 

अभिजीत मुहुर्त में भूमि पूजन और शिला पूजन सम्पन्न होने के बाद श्री मोदी ने साक्षात

दंडवत कर देश की तरक्की और कोरोना के नाश का वरदान प्रभु श्रीराम से मांगा। भूमि

पूजन कार्यक्रम के बाद हर हर महादेव,जय श्रीराम और भारत माता की जय के नारे लगाये

गये।

वैसे श्री मोदी एवं अन्य प्रमुख लोगों के लौट जाने के बाद अयोध्या वास्तविक तरीके से

राममय हो गया है। स्थानीय लोग मानते हैं कि अब यहां मंदिर के बन जाने से भी इलाका

का चेहरा सिर्फ धार्मिक पर्यटन की वजह से बदल जाएगा। कोरोना संकट के समाप्त होते

ही यहां धर्मप्रेमियों का आना भी प्रारंभ हो जाएगा। इस लिए स्थानीय लोग इस श्रीराम

मंदिर के इस कार्यक्रम से संतुष्ट है क्योंकि भूमि का यह विवाद इतना लंबा खींचा और

इतने किस्म की परेशानियां रही कि अयोध्या अपनी प्राचीन पहचान ही खो चुका है। अब

उसके सुनहरे दिनों के फिर से लौटने की उम्मीद में भी अयोध्यावासी उत्साहित हैं।


 

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