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प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान झारखंड के तीन जिलों में

रांची: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान से लौटने वाले मजदूरों को भी राहत

मिली है। अर्जुन, गौतमबुद्ध नगर में फर्नीचर का काम करते थे, कोरोना संक्रमण को रोकने

के लिए सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन के चलते वे अपने गांव मेरू, हजारीबाग आ

गए। यहां मनरेगा में काम कर रहे हैं। वो कहते हैं कि केंद्र सरकार यदि गरीब कल्याण

रोजगार अभियान के तहत हमारे स्किल का काम देती है तो हमें और खुशी होगी। केंद्र

सरकार ने कोविड-19 महामारी के प्रभाव से लाखों की संख्या में घर वापसी कर रहे प्रवासी

कामगारों को सशक्त बनाने और उन्हीं के क्षेत्रों/गांवों में आजीविका के अवसर मुहैया करने

के लिए 20 जून को प्रधानमंत्री के आह्वान पर गरीब कल्याण रोजगार अभियान की

शुरुआत की है।

इस अभियान के तहत देशभर के 06 राज्यों के 116 ऐसे जिलों को चिन्हित किया गया

जहां सबसे अधिक यार कहीं करीब दो तिहाई, प्रवासी मजदूर लौटे हैं, वही इस अभियान

को चलाया जाएगा। झारखंड के तीन जिलों-हजारीबाग, गोड्डा और गिरिडीह को इसके

तहत चुना गया है। इस अभियान के तहत झारखंड के हजारीबाग, गोड्डा और गिरिडीह

जिलों में प्रवासी कामगारों को रोजगार मुहैया कराया जाएगा।

आबिद अंसारी मुंबई में टेलरिंग का काम करते थे, अभी अपने गांव मेरू, हजारीबाग में हैं,

उनका कहना है कि अगर सरकार उनके लायक काम उपलब्ध कराएं तो वह मुंबई की

बजाय यहीं पर काम करना पसंद करेंगे। इसी गांव की शाज़मां परवीन पुणे में नर्स हैं, वे

लॉकडाउन के समय अपने गांव मेरू, हजारीबाग लौटी हैं। गरीब कल्याण रोजगार

अभियान के तहत हजारीबाग जिले के चयन से इन्हें काफी उम्मीद और खुशी है कि इन्हें

यहीं काम करने का मौका मिलेगा।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार योजना का हाल देखा टीम ने

हाल ही में पत्र सूचना कार्यालय रांची की एक टीम जिसमें अपर महानिदेशक श्री अरिमर्दन

सिंह एवं क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी श्री गौरव पुष्कर शामिल थे, हजारीबाग जिले के मेरू गांव,

दारू प्रखंड के बड़वार गांव, चुरचू प्रखंड के चरही गांव में बाहर से लौटने वाले प्रवासी

कामगारों से गरीब कल्याण रोजगार अभियान के संबंध में उनकी प्रतिक्रिया जानने, एवं

चल रहे कार्यों के अवलोकन हेतु गई थी।

इस अभियान के तहत सामुदायिक स्वच्छता केन्द्र (सीएससी) का निर्माण, मवेशी घरों का

निर्माण, ग्राम पंचायत भवन का निर्माण, पोल्ट्री शेड्स का निर्माण, 14वें एफसी कोष के

तहत कार्य, बकरी शेड का निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्ग कार्यों का निर्माण, जल संरक्षण और

फसल कटाई कार्य, पौधारोपण कार्य, कुओं को निर्माण, ग्रामीण आवासीय कार्यों का

निर्माण, बागवानी, जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी), आदि जैसे कई क्षेत्रों में

काम होगा। इन विविध प्रकार के कार्यों के समूह से सुनिश्चित होगा कि हर प्रवासी

कामगार को आने वाले 125 दिन में उसके कौशल के आधार पर रोजगार के अवसर मिले।

ताहिर हुसैन मुंबई में काम करते थे, लॉकडाउन के समय अपने गांव मेरू, हजारीबाग लौटे

हैं। इस अभियान के तहत जिले के चयन से इन्हें काफी उम्मीद और खुशी है। वो कहते हैं

कि हजारीबाग में काम मिल जाए तो इससे बेहतर क्या होगा। यहीं के इजहार आलम,

लॉकडाउन के पहले वह मुंबई में ड्राइवर थे। गरीब कल्याण रोजगार अभियान से इन्हें

काफी उम्मीद है। कहते हैं कि यहीं रोजगार मिल जाए तो काफी खुशी होगी।


 

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