राष्ट्रपति ने किया अटल बिहारी के आदमकद चित्र का अनावरण

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  • व्यक्तिगत हित के लिए अटलजी ने कभी अपना रास्ता नहीं बदलना

नयी दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आदमकद तैलचित्र का अनावरण किया।

कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद सहित संसद सदस्य एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

इस अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, भारतीय राजनीति के महानायकों में अटल जी को हमेशा याद किया जाएगा।

राजनीति में विजय और पराजय को स्वीकार करने में जिस सहजता और गरिमा का परिचय उन्होंने दिया है, वह अनुकरणीय है।

वे विपरीत परिस्थितियों में धैर्य की मिसाल थे।

उन्होंने कहा कि संसद के सेन्ट्रल हॉल में देश की अन्य विभूतियों के चित्रों के साथ अटल जी के चित्र को

स्थान देने के निर्णय के लिए मैं दोनों सदनों के सांसदों की बहुदलीय पोर्ट्रेट कमिटी के सभी सदस्यों को साधुवाद व बधाई देता हूँ।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, अटल जी के जीवन पर बहुत सी बातें की जा सकती हैं।

घंटो तक कहा जा सकता है फिर भी पूरा नहीं हो सकता। ऐसे व्यक्तित्व बहुत कम होते हैं।

उन्होंने कहा, व्यक्तिगत जीवन के हित के लिए कभी अपना रास्ता न बदलना,

ये अपने आप में सार्वजनिक जीवन में हम जैसे कई कार्यकतार्ओं के लिए बहुत कुछ सीखने जैसा है।

मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में कोई दुश्मन नहीं होता है। लोकतंत्र में स्पर्धी होते हैं

और स्पर्धी होने के बावजूद एक दूसरे के प्रति आदर भाव रखना, सम्मान के साथ देखना.. यह सीखने वाला विषय है।

मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी को आदर्शों से कभी समझौता नहीं करने वाला दिग्गज राजनेता बताते हुए कहा कि

व्यक्तिगत जीवन के हित के लिए कभी अपना रास्ता न बदलना और लोकतंत्र में स्पर्धी होने के बावजूद

एक दूसरे के प्रति आदर भाव रखना.. यह पूर्व प्रधानमंत्री से सीखने वाली बात है।

उन्होंने कहा कि अटलजी ने कितने ही साल संसद के गलियारे में समय गुजारा, दशकों तक सत्ता से दूर रहे,

फिर भी लोगों की निष्ठा भाव से सेवा की, उनकी आवाज उठायी लेकिन व्यक्तिगत हित के लिये कभी रास्ता नहीं बदला।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वाजपेयी ने राजनीति में उतार चढ़ाव देखा, जय पराजय आई लेकिन आदर्शों से कभी समझौता नहीं किया।

इसका कभी न कभी परिणाम मिलता है। मोदी ने कहा कि वाजपेयी के भाषण की चर्चा होती है

लेकिन उनका मौन आज के समय में मनोविज्ञान की दृष्टि से शोध करने की बात है।

जितनी ताकत उनके भाषण में थी, उतना ही अधिक प्रभाव उनके मौन में था।

जब सभा में बोलते हुए, वे कुछ पल के लिये मौन हो जाते थे, तब भी लोगों में संदेश चला जाता था।

इस युग में भी कब बोलना है, कब मौन रहना है.. यह सीखने जैसा है।

उन्होंने कहा कि अटलजी ने एक प्रकार से परिस्थिति को साध लिया था।

वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे जो लोकतंत्र को ताकत देने को समर्पित थे।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति नायडू, लोकसभा अध्यक्ष महाजन, राज्यसभा में विपक्ष के आजाज ने भी अपने विचार रखे।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल दिसंबर के अंत में पोर्ट्रेट समिति की बैठक में

अटल बिहारी वाजपेयी का तैल चित्र केंद्रीय कक्ष में लगाने का निर्णय लिया गया था।

संसद की पोर्ट्रेट समिति की अध्यक्ष एवं स्पीकर सुमित्रा महाजन ने

अटल बिहारी वाजपेयी का तैल चित्र लगाये जाने की तिथि का फैसला किया।

इस तैल चित्र को चित्रकार कृष्ण कन्हाई ने तैयार किया है।

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