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अगले चरण के जनता कर्फ्यू के लिए खुद को तैयार कीजिए

अगले चरण में हमारी चुनौतियां और कठिन होने जा रही है। कोरोना वायरस का बढ़ते

प्रभाव की आज की खबर यही संकेत दे रही है। देश में कोरोना वायरस का प्रकोप अब

बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। जाहिर है कि आपसी मेल जोल की वजह से यह संक्रमण

फैला है। जो लोग इस बीमारी से पीड़ित घोषित हो चुके हैं, उसके अलावा भी शायद

हजारों लोग अपने साथ यह विषाणु लिए घूम रहे हैं। इस बात पर संदेह की कोई गुंजाइश

नहीं है कि आज के 14 घंटे के जनता कर्फ्यू के अपने प्रदर्शन से जनता ने यह दर्शा दिया

है कि राष्ट्रीय आपदा के वक्त पर हम वाकई एकजुट हो जाते हैं। इनमें कुछ उन्मादी

उपद्रवी तत्वों को अपवाद मानकर ही सोचना चाहिए। लेकिन आज की इस रक्षात्मक

नीति के बीच ही दुखद सूचना है कि कोरोना से मरने वालों की संख्या और पीड़ितों की

संख्या बढ़ी है। लिहाजा यह समझा जाना चाहिए कि इस खतरे को अभी और गंभीरता

के साथ लेने की आवश्यकता है। एक संक्रमित व्यक्ति अपने करीब आने वाले अथवा

नहीं आने वालों के बीच भी कितना संक्रमण फैला सकता है, इसके नापने का कोई

तरीका नहीं है। जिस तरीके से सरकार को एक एक कर शहरों को बंद करने तथा

परिवहन रोकने जैसा कड़ा फैसला लेना पड़ रहा है, वह यही दर्शाता है कि आनने वाले

दिनों में संक्रमण पीड़ितों की संख्या में अचानक ही विस्फोट हो सकता है। विदेश से चंद

लोग ही यह संक्रमण लेकर आये हैं। इन्ही लोगों की बदौलत आज घोषित तौर पर तीन

सौ से अधिक पीड़ित भारत में पाये गये हैं। संदिग्धों में से कितनों के यह संक्रमण हो

चुका है, इसका पता चलना अभी शेष है।

अगले चरण में जो यहां संक्रमित विस्फोट होगा

लेकिन इसके बीच भी आपसी मेल जोल और गतिविधियों के माध्यम से जो विषाणु

हमारे बीच फैल रहा है, उसे हर कीमत पर रोका जाना चाहिए। यह इसलिए भी जरूरी है

क्योंकि हम घनी आबादी वाले देशों में से एक है। प्रारंभिक सूचनाओं को नजरअंदाज

करने का खतरनाक नतीजा हम इटली जैसे देश में देख रहे हैं। और समझदारी इसी में है

कि दूसरों की हालत देखकर भी हम सबक लें तथा बचाव के तौर तरीकों पर अमल करें।

जैसे जैसे दिन बीतेंगे, कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा भी देश में बढ़ता हुआ नजर

आयेगा। लेकिन दरअसल देश के दूसरे इलाकों और लोगों तक यह संक्रमण नहीं फैले,

इसे रोकना हर देशवासी की राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। खुद को पूर्ण स्वस्थ महसूस करने के

बाद भी हो सकता है कि हम खुद किन्हीं कारणों से इस संक्रमण की चपेट में हो और मेरे

ही माध्यम से दूसरों तक यह रोग फैलता जा रहा है। यह विज्ञान सम्मत तथ्य है कि

शारीरिक तौर पर स्वस्थ्य लोगों पर यह विषाणु जानलेवा हमला नहीं कर पाता। लेकिन

बीमार और अधिक उम्र के लोगों पर इसका असर घातक ही होता है। साथ ही यह भी

याद रखना चाहिए कि भारत में चिकित्सीय सुविधाएं उतनी विकसित नहीं है जहां

हजारों लोग अगर किसी एक शहर में बीमार पड़ जाएं तो उनके ईलाज के लिए चीन के

जैसा एक सप्ताह में अस्पताल भी तैयार हो सके। इसलिए अगले चरण में इसके पहुंचने

के दौरान फिर से कोरोना के चक्र को रोकने के लिए यह जरूरी है कि आवश्यकता पड़ने

पर लगातार 48 घंटे के लिए भी यह पाबंदी लगायी जाए। लिहाजा हरेक को खुद को

इसके लिए अभी से ही तैयार हो जाना चाहिए।


 

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