fbpx Press "Enter" to skip to content

कोरोना काल में गर्भवती महिलाओं को हो रही सबसे ज्यादा परेशानी

रांची : कोरोना काल में रांची की महिलाओं पर सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है। हाल में ही

ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें नवविवाहित दंपत्तियों ने अपने नन्हें-मुन्हों को खोया

है। इसके बाद भी राजधानी में मां बनने वाली गर्भवती महिलाएं मुश्किल हालात से गुजर

रही हैं। उनका उपचार नहीं हो पा रहा है। राज्य में कई ऐसी गर्भवती महिलाएं हैं जिनका

समय पर अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। इसका एक ही कारण है कि अधिकतर अस्पताल

अल्ट्रासाउंड करने से इन्कार कर रहे हैं। गिने चुने ही अस्पताल खुले हैं, लेकिन किसी भी

नए मरीज को लेने से इन्कार कर दिया है। निजी अस्पतालों का कहना है कि जब तक

चिकित्सक अस्पताल में नहीं आएंगे, वह मरीजों का उपचार करने में असमर्थ हैं। बता दें

कि सीएम ने भी सभी निजी अस्पतालों को खोलने और आम लोगों के इलाज के लिए

तैयार रहने के निर्देश दिये हैं। लेकिन इसके बावजूद भी कई अस्पतालों में ताले लटके हैं।

निजी अस्पताल नहीं ले रहे कोई नया केस

मैटरनिटी हेल्पलाइन में अब तक 300 से अधिक कॉल आ चुके हैं, जिसमें अधिकतर

मामले गर्भवती महिलाओं के उपचार को लेकर हैं। इसमें 100 गर्भवती महिला ऐसी हैं,

जिनका अल्ट्रासाउंड नहीं हुआ है। ऐसे में जच्चा और बच्चा दोनों की जिंदगी के लिए

खतरा बन सकता है। जिला प्रशासन के निर्देश के बाद भी निजी अस्पताल आदेश का

रोजाना उल्लंघन कर रहे हैं। इसका खामियाजा गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है।

हाल ही में गर्भवती महिला के प्रसव में हुई लापरवाही और बच्चे की मौत पर न्यायालय

और मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया था। इसके बावजूद मामले को लेकर कोई भी गंभीरता नहीं

दिखाई जा रही है। इस मामले में अधिकतर फोन हिंदपीढ़ी क्षेत्र से ही आते हैं।

कोरोना के कारण सदर व रिम्स दबाव में

सदर अस्पताल और रिम्स पर कोरोना के कारण दबाव अधिक होने के कारण इतनी सारे

मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। ऐसे में निजी अस्पतालों के इस रवैये से परेशानी

बढ़ गई है। ये जिला प्रशासन के नियंत्रण के बाहर हो गए हैं। दो-तीन को छोड़कर

अधिसंख्य अस्पताल तरह-तरह के बहाना बनाकर मरीज को लेने से इन्कार कर रहे हैं।

प्रसव के लिए ईएसआई ने भी हाथ खड़े किए

ईएसआई अस्पताल जो निजी कार्यों में लगे लोगों के लिए व्यवस्थित है, पर आज के दौर

में दवा के सिवा किसी भी तरह की जांच व्यवस्था पर हाथ खड़े कर दिये है। इस मामले में

ईएसआई अस्पताल प्रबंधन का भी यही निर्णय है कि कोई भी मरीज़ को फ़िज़िकल जांच

नहीं करना है, जिसके कारण ओपीडी में बाहर खिड़की से ही पर्ची काट कर सिर्फ दवा दी जा

रही है। प्रसव व अन्य किसी बीमारी के बारे में पुछे जाने पर बाहर इलाज करवाने की

सलाह दी जा रही है या रिम्स चले जाने को कहा जा रहा है। लगभग सभी दरवाजे बंद है।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from अजब गजबMore posts in अजब गजब »
More from अपराधMore posts in अपराध »
More from कामMore posts in काम »
More from कोरोनाMore posts in कोरोना »
More from झारखंडMore posts in झारखंड »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from बयानMore posts in बयान »
More from महिलाMore posts in महिला »
More from रांचीMore posts in रांची »
More from विधि व्यवस्थाMore posts in विधि व्यवस्था »
More from स्वास्थ्यMore posts in स्वास्थ्य »
More from हादसाMore posts in हादसा »

One Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!