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क्षेत्रीय दलों में आपसी संवाद के साथ भाजपा को चुनौती देने की रणनीति

  • दिल्ली दखल की लड़ाई में ममता के साथ प्रशांत किशोर

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः क्षेत्रीय दलों ने आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को चुनौती देने की अलग

रणनीति पर शायद काम करना प्रारंभ कर दिया है। इस बारे में औपचारिक तौर पर कोई

दल कुछ नहीं कहता लेकिन सभी अपने अपने राज्यों में भाजपा को परास्त करने की

रणनीति के अलावा सामूहिक तौर पर 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ

मोर्चाबंदी की जरूरत सभी महसूस कर रहे हैं। इसी वजह से पश्चिम बंगाल चुनाव में

तृणमूल की प्रचंड जीत के बाद काम छोड़ चुके प्रशांत किशोर के साथ ममता बनर्जी का

रिश्ता आगे भी बना रहेगा। दरअसल ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के नये महासचिव

की पहल पर यह काम हुआ है। यह तय हुआ है कि उनके नहीं होने के बाद भी प्रशांत

किशोर की कंपनी आईपीएसी अगले चुनाव तक टीएमसी के लिए काम करती रहेगी। इसी

बीच प्रशांत किशोर से लोकसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक सुझाव लेने

का भी निर्णय अंदरखाने में हो चुका है। वर्ष 2026 तक प्रशांत किशोर की कंपनी इंडियन

पॉलिटिकल एक्शन कमेटी बंगाल में टीएमसी के साथ जुड़ी रहेगी। खुद को इस कंपनी से

अलग करने के बाद भी अब प्रशांत किशोर भाजपा विरोधी खेमा के लिए एक सुपरिचित

नाम है। उनका चुनावी आकलन बंगाल के लिए सही साबित होने के बाद अन्य दल भी

उनकी राय को काफी गंभीरता से लेते हैं। याद दिला दें कि पश्चिम बंगाल में चुनाव होने के

काफी पहले ही प्रशांत किशोर ने यह आकलन किया था कि भाजपा अपनी तमाम कोशिशों

के बाद भी एक सौट सीट नहीं जीत पायेगी। दूसरी तरफ भाजपा के दिग्गज नेता इस

चुनाव में दो सौ से अधिक सीट जीत लेने का दावा कर रहे थे।

क्षेत्रीय दलों की सोच है कि अपने इलाके में भाजपा को पछाड़ लेंगे

चुनाव के दौरान ही भाजपा नेताओं की टीका टिप्पणी से नाराज ममता बनर्जी ने

सार्वजनिक तौर पर एलान कर दिया था कि बंगाल में कोई बदलाव नहीं होने के बाद

दिल्ली में बदलाव अवश्य होगा। अब चुनाव निपटने के बाद ममता बनर्जी अपने उसी

एजेंडा पर सक्रिय हो रही हैं। दूसरी तरफ आईपीएसी भी अपनी चुनावी सफलताओं के बाद

राष्ट्रीय परिदृश्य में अपनी बड़ी भूमिका तलाश रही है। शायद इसी वजह से अगले

लोकसभा चुनाव के लिए प्रशांत किशोर ने ममता बनर्जी के साथ रहना तय किया है। वैसे

पश्चिम बंगाल के अलावा तमिलनाडू में डीएमके की जीत में भी उनकी भूमिका रही है।

इस बीच प्रशांत किशोर की एनसीपी प्रमुख शरद पवार से भी भेंट हुई है। श्री पवार के

आवास पर हुई उनकी बैठक करीब तीन घंटे तक चली है। सभी पक्ष इस बैठक के बारे में

कोई जानकारी देने से इंकार करते हैं। वैसे यह पता चला है कि इस बैठक में एनसीपी के

प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल के अलावा शरद पवार के भतीजे और विधायक रोहित पवार

मौजूद थे। बैठक में प्रफुल्ल पटेल या अजीत पवार शामिल नहीं थे। इसलिए वहां क्या कुछ

बात चीत हुई है, उसका विवरण सार्वजनिक नहीं हो पाया है।

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