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तृणमूल कांग्रेस की जीत पर प्रशांत किशोर ने खुशी जतायी

पटना : तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल चुनाव में भारी बहुमत मिलने पर बिहार में भी

खुशी की लहर दौड़ गई है। बिहार में विपक्ष के सभी नेताओं ने इसके लिए ममता बनर्जी

को बधाई दी है और कहा है कि वह आने वाले दिनों में विपक्ष का केंद्रीय चेहरा बनेंगी। नेता

प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से लेकर अन्य कई दलों और नेताओं ने ममता बनर्जी को जीत पर

भारी बधाई दी है। साथ ही कहा है कि उनकी जीत में बिहार के मेधावी व्यक्ति प्रमुख

रणनीतिकार प्रशांत किशोर की महती भूमिका थी, जिसने पहले ही घोषित कर दिया था

कि भाजपा 100 सीटों से अधिक नहीं ला पाएगी। बंगाल चुनाव के रुझानों में टीएमसी की

डबल सेंचुरी के बाद चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पहली प्रतिक्रिया सामने आई

है। चुनाव आयोग ने बीजेपी के 80 के करीब सीटों पर ही सिमटने को लेकर कहा कि उन्हें

इस बात का अंदाजा था। इसके साथ ही पीके ने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधते हुए

पक्षपात का आरोप लगाया है। प्रशांत किशोर ने कहा, चुनाव आयोग की ओर से पक्षपात के

चलते बीजेपी ऐसी स्थिति में आ सकी है। यदि आयोग ने निष्पक्षता के साथ काम किया

होता तो ऐसा नहीं होता। आयोग ने अपने सिस्टम के जरिए बीजेपी को सपोर्ट करने का

काम किया था। उसके चलते ही चुनाव ज्यादा से ज्यादा चरणों में कराया गया था। यह

चुनाव 10 या 15 दिनों ही कराया जा सकता था, लेकिन दो महीने का समय लिया गया।

तृणमूल कांग्रेस की जीत पर टेलीफोन से बात की

प्रशांत किशोर ने पटना के पत्रकारों से दूरभाष पर बातचीत करते हुए कहा, मुझे खुशी है कि

राज्य में ध्रुवीकरण के मुद्दे काम नहीं किए हैं। इससे साफ है कि ध्रुवीकरण की सीमा है और

पता चलता है कि आखिर बीजेपी के खेमे में कितने वोट जा सकते हैं। साफ है कि आप

सिर्फ ध्रुवीकरण के भरोसे ही नहीं जीत सकता। प्रशांत किशोर ने कहा कि ममता बनर्जी

पर मुस्लिमों से एकजुट होकर मतदान की अपील करने पर नोटिस मिला था। यदि ऐसा ही

है तो फिर बीजेपी के हर नेता को नोटिस मिलना चाहिए था। दीदी की जमकर तारीफ करते

हुए ने कहा कि ममता बनर्जी के साथ काम करना मेरे लिए खुशी की बात है। प्रशांत किशोर

ने कहा कि राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग की इस तरह की हरकत के खिलाफ एकजुट

होना चाहिए। प्रशांत किशोर ने कहा कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने गलत प्रोपेगेंडा

फैलाया था, जिसका उसे खामियाजा भुगतना पड़ा था। उन्होंने टीएमसी ने 2019 के बाद

लोगों के सामने पैदा हुए संकट को मुद्दा बनाया था। सबसे खुशी की बात तो जा रही कि

बंगाल की जनता भाजपा खासकर मोदी और शाह के झांसे में नहीं आए। भाजपा ने रैलियों

में अरबों रुपया बहाया। करोड़ रुपया खर्च करके लोगों को भाषण सुनने के लिए बुलाया।

लेकिन लोगों ने मदारियों की भाषा को समझा और उस पर कतई भरोसा नहीं किया। हिंदी

भाषी क्षेत्र के लोगों को भी बंगाल के लोगों से सबक सीखना चाहिए।

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