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प्रशांत किशोर के चैट ने अर्णव गोस्वामी चैट की याद दिला दी

  • अब तक अस्पष्ट है कि सुरक्षा जानकारी लीक किसने की

  • भाजपा के अन्य नेताओँ के गुड बूक में नहीं हैं अर्णव

  • शक की सूई प्रधानमंत्री मोदी कार्यालय की तरफ है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः प्रशांत किशोर का चैट मतदान के दिन भाजपा साइबर सेल के प्रमुख अमित

मालवीय की तरफ से जारी किया गया। लेकिन अमित मालवीय शायद यह सोचने में

गलती कर बैठे कि इससे किसी पुराने चैट की चर्चा भी फिर से ताजी हो जाएगी। अब

प्रशांत किशोर का चैट लीक हुआ तो यह सवाल फिर से कफन फाड़कर निकल आया कि

अर्णव गोस्वामी के चैट का आखिर क्या हुआ। यूं भी इस चैट प्रकरण के सामने आने के

बाद अर्णव गोस्वामी के तेवर वैसे ही बहुत ढीले पड़ गये हैं। लेकिन लोगों के जेहन में फिर

से यह सवाल उभरा कि आखिर प्रशांत किशोर के एक चैट पर सारे बड़े मीडिया संस्थान

इतनी चीख पुकार मचाने लगे तो अर्णव गोस्वामी मामले में सभी ने मुंह क्यों बंद कर लिये

हैं। याद दिला दें कि मुंबई पुलिस ने अर्णव के खिलाफ जारी जांच के तहत उनके व्हाट्सएप

चैट के विवरण भी अदालत में दाखिल किये हैं। जिसमें यह बताया गया है कि अर्णव

गोस्वामी को सुरक्षा योजनाओं की अग्रिम सूचनाएं थी। इसी वजह से यह सवाल जब खड़ा

हो गया था कि आखिर अर्णव को यह सूचना किस माध्यम से मिली थी। सामान्य सैनिक

रणनीति के तहत इस किस्म की युद्ध संबंधी तैयारियों की जानकारी सार्वजनिक नहीं

होती। जिन चंद लोगों को इसकी जानकारी थी, उनमें संदेह के घेरे में सबसे ऊपर खुद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय का नंबर आता है।

प्रशांत किशोर के चैट की चर्चा ही अर्णव प्रकरण की याद दिला गया

बाकी लोगों के अर्णव गोस्वामी के रिश्ते हैं भी या नहीं इसकी कोई पुष्टि नहीं है। लेकिन श्रा

मोदी के साथ उनके मधुर रिश्ते हैं, यह जगजाहिर है। इसलिए अब प्रशांत किशोर का चैट

उजागर कर भाजपा साइबर सेल के प्रमुख अमित मतदान को अपने पक्ष में करने की

कोशिश में जुटे थे तो कुशल रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने सोशल मीडिया के माध्यम से

उस प्रचार की हवा निकाल दी। लेकिन इसी उठा पटक में फिर से अर्णव को इतनी गोपनीय

सूचना किसने दी, यह सवाल फिर से जीवित हो उठा है। वैसे अर्णव गोस्वामी के व्हाट्सएप

चैट का हिस्सा बाहर आने के बाद अनेक भाजपा नेताओं ने उससे दूरी बना ली है क्योंकि

उन्हें पता चल गया है कि उनके बारे में अर्णव की असली राय क्या है। बदले माहौल को

भांपते हुए खुद अर्णव भी अपने तेवर को तीखा नहीं रख पा रहे हैं क्योंकि दिनोंदिन उनका

विरोध भी बढ़ता ही जा रहा है क्योंकि वह किसी खास एजेंडा को आगे बढ़ाते हुए रंगे हाथ

पकड़े गये हैं।

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