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प्राचीन कला केंद्र ने मान्यता रद्द किये जाने पर सरकार को पत्र लिखा

रांचीः प्राचीन कला केंद्र ने झारखंड सरकार द्वारा उनकी मान्यता रद्द किये जाने पर

विरोध पत्र सह ज्ञापन भेजा है। झारखंड सरकार ने अपने 28 मई के पत्र के माध्यम से इस

केंद्र द्वारा ली जाने वाली संगीत की परीक्षा और उसके प्रमाणपत्रों की मान्यता रद्द किये

जाने की घोषणा की है। सरकार ने इसे एक फर्जी संस्थान मानते हुए यह आदेश जारी

किया है। इस आदेश के जारी होने की वजह से इसी प्राचीन कला केंद्र की डिग्री के आधार

पर अनेक स्कूलों में संगीत शिक्षक की नौकरी कर रहे लोगों की नौकरी पर भी खतरा मंडरा

रहा है। सरकार ने ऐसे लोगों को नौकरी के निकालने की बात कही है क्योंकि उनकी डिग्री

की मान्यता समाप्त कर दी गयी है।

प्राचीन कला केंद्र की तरफ से झारखंड सरकार के इस फैसले की आलोचना की गयी है।

झापन में यह बताया गया है कि साठ साल पुरानी इस संस्था की मान्यता समाप्त करना

और उसे एक फर्जी संस्थान करार दिया जाना गलत है। संस्थान के पत्र में यह भी लिखा

गया है कि ऐसा फैसला लेने के पहले सरकार ने उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं

दिया है, जो सामान्य न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। संस्था की गतिविधियों तथा

झारखंड सरकार से हुए पत्राचार के अलावा संस्थान की तरफ से यह भी बताया गया है कि

सरकार की अपनी संस्था झारखंड कला मंदिर भी उनकी ही संस्था से मान्यता प्राप्त है।

प्राचीन कला केंद्र ने संबंधित दस्तावेज भी जमा किये हैं

संस्था की तरफ से देश भर के विश्वविद्यालयों में इस संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त लोगों के

कार्यरत होने तथा उन्हें दी गयी मान्यता का विवरण भी इस ज्ञापन के साथ संलग्न किया

गया है। प्राचीन कला केंद्र ने झारखंड सरकार से यह आग्रह किया है कि वह अपने इस

फैसले को वापस लें ताकि झारखंड के जो हजारों बच्चे इस संस्थान से जुड़े हुए हैं वे भी

संगीत एवं अन्य कला की अपनी शिक्षा ग्रहण कर सकें।


 

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