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फंस गया है पूर्णिया के धमदाहा थाना कांड के बारे में लिखी गयी रिपोर्ट

  • दो निर्दोषों को जबरन जेल भेजा गया था

  • पुलिस मुख्यालय ने इसकी जांच करायी थी

  • विनोद कुमार की रिपोर्ट को बदल नहीं सकते

  • व्यक्तिगत विवरणी में दर्ज साक्ष्यों को मिटाना कठिन

दीपक नौरंगी

भागलपुरः फंस गया है पूर्णिया के धमदाहा कांड के लूट का मामला। दरअसल इस मामले

में निर्दोष और पीड़ितों को जेल भेजे जाने का मामला तत्कालीन आईजी अब स्वर्गीय

विनोद कुमार ने पकड़ा था। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर उन्होंने इसे एसपी विशाल

शर्मा की तरफ से जांच मे की गयी चूक करार दिया था। उन्होंने इस बारे में मुख्यालय में

रिपोर्ट भी भेज दी थी।

पूरा घटनाक्रम फिर से इस वीडियो में जान लें

एसपी के खिलाफ रिपोर्ट किये जाने से अधिकारियों का एक बड़ा तबका उनके खिलाफ हो

गया था। एक प्रभावशाली लॉबी श्री कुमार (स्वर्गीय) को प्रताड़ित भी करने लगी थी। इस

बीच कोरोना से पीड़ित होने के बाद श्री कुमार का निधन हो गया। लेकिन उनके द्वारा

लिखी गयी बातों को नजरअंदाज कर पाना सरकार मे बैठे चंद अधिकारियों के लिए

आसान काम नहीं रह गया है। यह भी उल्लेखनीय है कि चुनाव के दौरान अपनी

उल्लेखनीय सेवा की वजह से स्वर्गीय विनोद कुमार को चुनाव संचालन में महत्वपूर्ण

भूमिका निभाने के लिए मरणोपरांत पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है। अंदरखाने की चर्चा

के मुताबिक अधिकारियों की एक लॉबी इस पूरे धमदाहा कांड में बरती गयी हर किस्म की

अनियमितताओं को दरकिनार करने की पुरजोर कोशिश कर ही है। इसी संबंध में खुद

तत्कालीन एसपी ने भी बिहार सरकार को अपनी तरफ से जवाब दिया है। लेकिन रिपोर्ट में

जिन मुद्दों का खास तौर पर उल्लेख किया गया है, वे अकाट्य होने की वजह से बड़ा पेंच

फंस गया है। बाद के आईजी ने भी पूर्व आईजी के रिपोर्ट को सही माना था। 

फंस गया है इसलिए कि अब रिपोर्ट बदली नहीं जा सकती

बताते चलें कि धमदाहा थाना कांड संख्या 170-19 के अलावा के हाट थाना कांड संख्या

294-19 और बी कोठी केस संख्या 1654-17 का भी उल्लेख पुलिस के दस्तावेजों में दर्ज है।

इन सभी में तत्कालीन आईजी स्वर्गीय विनोद कुमार की रिपोर्ट तत्कालीन एसपी विशाल

शर्मा के खिलाफ है। इनमें से धमदाहा का मामला अधिक चर्चित इसलिए हुआ था क्योंकि

दो निर्दोष लोगों को जेल भेजने के बाद अदालत ने दोनों को रिहा कर दिया था। समझा

जाता है कि इन तमाम किस्म की विसंगतियों की चर्चा उनकी वार्षिक विवरणी में दर्ज होने

की वजह से अधिकारियों की लॉबी को मामला दरकिनार करने में सफलता नहीं मिल पायी

है। इस किस्म की प्रतिकूल टिप्पणी होने की वजह से संबंधित अधिकारी को प्रोन्नति में

दिक्कत होती है तथा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में नहीं भेजे जाने के साथ साथ कई बार

वेतनवृद्धि भी रोक दी जाती है। दूसरी तरफ सफल चुनाव के संचालन कीतैयारियों मे जुटे

होने के बीच ही आईजी विनोद कुमार कोरोना से संक्रमित हो गये थे और बाद में पटना में

उनकी मौत भी हो गयी थी। लिहाजा उनके द्वारा दस्तावेजों में जो कुछ लिखा गया है,

उन्हें अब संशोधित करने की भी कोई गुंजाइश नहीं बची है। अब पटना में बैठी

अधिकारियों का एक लॉबी इस दाग को कैसे मिटाया जाए, इस पर अपनी माथापच्ची कर

रही है। वैसे यह स्पष्ट है कि अधिकारियों की लॉबी इस मामले को रफा दफा करने में  सही 

मायने में मिल जुलकर माथापच्ची कर रही है। 

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