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बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से आलू की खेती को नुकसान

  • राज्य के अनेक इलाकों में पड़े थे ओले

  • कुछ इलाकों में बर्फ की चादर जैसी थी

  • खेतों में ही नष्ट हो गये आलू के पौधे

  • आलू की फसल निकालने की तैयारी थी अब

संवाददाता

रांचीः बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हुआ नुकसान अब सामने आने लगा है। राज्य के

अनेक इलाकों से इस ओलावृष्टि से किसानों को हो रही परेशानी अलग अलग तरीके से

बाहर आ रही है। अनेक पंचायतों में हुई ओलावृष्टि की सूचना तो पहले ही आ गयी थी।

लेकिन इससे क्या कुछ नुकसान हुआ है, उसकी सूचनाएं अब धीरे धीरे बाहर आ रही हैं।

कुछेक इलाकों में इस नुकसान की भरपाई के लिए किसान प्रखंड कार्यालय के अधिकारियों

तक भी पहुंचे हैं।

तमाम संकलित सूचनाओं के मुताबिक जिन किसानों ने अधिक बड़े इलाके में आलू की खेती की थी, उन्हें जबर्दस्त नुकसान हुआ है।

इन किसानों को उम्मीद थी कि अगले कुछ दिनों में वे खेतों से आलू निकालना प्रारंभ करेंगे।

ऐन मौके पर बारिश और पत्थर पड़ने से उनकी फसल खेतों में ही चौपट

हो गयी है। मजबूरी में जो कुछ आलू खेतों में बचे हैं, उन्हें भी सड़ने से बचाने के लिए निकाला जा रहा है।

दूसरी तरफ कई प्रखंडों तक यह सूचना आने के बाद उच्चाधिकारियों को इसके बारे में पत्र

भेजने की तैयारी हो रही है। विभागीय अधिकारी मानते हैं कि किसानों को हुए इस

नुकसान का आकलन कर मुआवजा भुगतान की कार्रवाई ऊपर के आदेश से ही हो सकती

है। वैसे ऐसे सरकारी कर्मचारी भी मानते हैं कि नुकसान अधिक हो चुका है। अधिकांश

आलू तैयार होने के ठीक पहले मौसम की मार से नष्ट हो गये हैं।

बेमौसम बारिश से खेतों में जमा हो गया था पानी

कई इलाकों में बारिश की वजह से खेतों में काफी पानी जमा हो गया था। इसी दौरान ओला

पड़ने की वजह से आलू की फसल को नुकसान हुआ है। आलू की कुल खेती का इलाका वार

आंकड़ा होने के बाद भी अब तक पूरे राज्य में इससे कितना नुकसान हुआ है, उसका सही

अनुमान राज्य स्तर पर ही लगाया जा सकता है। जानकार मानते हैं कि रांची जिला के

अलावा भी राज्य के अनेक इलाकों में ऐसी शिलावृष्टि हुई है और कुछेक इलाकों में तो

ओला पड़ने की वजह से बर्फ बिछ जाने जैसा नजारा हो गया था। अब इसकी चपेट में आलू

का कितना उत्पादन नष्ट हुआ है, उसका आकलन के बाद ही क्षतिपूर्ति भुगतान की

प्रक्रिया राज्य स्तर पर ही प्रारंभ की जा सकती है।


 

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