fbpx Press "Enter" to skip to content

प्रकृति के सफाईकर्मी यानी गिद्धों का कुनबा बढ़ा है हजारीबाग में

  • ढेंगुरा नदी के पास एक सौ गिद्धों का झूंड देखा गया

  • गिद्ध की प्रजाति देशभर में लुप्त होती नजर आ रही है

  • प्राकृतिक माहौल में विलुप्त पक्षियों को मिला संरक्षण

अशोक कुमार शर्मा

हज़ारीबाग: प्रकृति के सफाईकर्मी का नाम लेते ही हमें गिद्ध की याद आती है। यह बड़े

आकार के पक्षी वाकई प्रकृति के सफाई कर्मी ही है। अगर वे नहीं होते तो अनेक इलाको में

मरे जानवरों की लाशों का निष्पादन एक बड़ी चुनौती बन जाती । हाल के दिनों में वे

रासायनिक पदार्थों की वजह से विलुप्ति के कगार पर पहुंच गये थे।  देशभर में इसके

संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सरकार द्वारा कई जगह एक्स सीटू कंज़र्वेटिव किया जा है।

वीडियो में जानिए हजारीबाग के गिद्धों की स्थिति

वहीं हमारे हजारीबाग में ये उन्मुक्त गगन में विचरण करते हुए प्राकृतिक पर्यावास में

अपना कुनबा बढ़ा रहे हैं। गिद्ध यूं तो सामान्य तौर पर हजारीबाग में दिखते हैं लेकिन आज

देर शाम को हजारीबाग स्थित ग्राम पंचायत ढेंगूरा अवस्थित ढेंगुरा नदी करकस

डिस्पोजल साइट पर अलग- अलग जगह करीब एक सौं की संख्या में गिद्ध का दिखना

सुखद संकेत है. यह बेहद जरूरी भी है। गिद्ध सड़े गले मृत पशुओं को खाकर कई तरह की

महामारी बीमारियों जैसे कोलेरा, एंथैक्स, रैबिज इत्यादि से बचाते हैं और मनुष्य की

सहायता करते हैं। इनके होने से ही प्रकृति कई किस्म की परेशानियों से बची रहती है। 

प्रकृति के अनुकूल हजारीबाग इन्हें रास आया है

इन्हें हजारीबाग में आशियाना बनाना और प्रवास करना भी अच्छा लगता है। भारतवर्ष में

गिद्धों की 09 प्रजातियां पाई जाती है, जिसमें हजारीबाग में 03 प्रजातियो पाए गए हैं। गिद्ध

के विलुप्ति का मुख्य कारण मवेशियों में प्रयोग होने वाला दर्द निवारक दवा डिक्लोफेनेक

हैं। अतः डिक्लोफेनेक के जगह मेलोसिकं का प्रयोग कर इनके संरक्षण में सहयोग किया

जा सकता है ।. गिद्ध को वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के – स्कीडुले I में संरक्षण

प्राप्त है और इसे नुकसान पहुंचाना कानून जुर्म है। गिद्धों के संरक्षण और जागरूकता के

लिए कार्य कर रही हजारीबाग की एनजीओ न्यू ह्यूमन फाऊंडेशन द्वारा हर साल इसकी

गणना और पहचान की जाती है। गिद्ध का मृत्यु दर अधिक और प्रजनन दर बहुत कम है।

एक जोड़ा गिद्ध साल में सिर्फ एक ही अंडे देते हैं और उसका प्रजनन करते हैं।

गिद्ध संरक्षण के लिहाज से सेफ जोन घोषित है

गिद्ध संरक्षण की दिशा में हजारीबाग को फिलहाल प्रोविसिनल सेफ जोन घोषित किया

गया है। उम्मीद है कि गिद्धों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आने वाले दिनों में इसे वल्चर

सेफ जोन घोषित किया जा सकता है। वन प्राणी प्रमंडलीय हजारीबाग के द्वारा केवल

आज तक कागजात पर ही खानापूर्ति किया गया। वन प्रमंडलीय विभाग के द्वारा गिद्ध को

बचाने के नाम पर कई लाख सरकार का रुपया कागज पर दिखाकर खर्चा कर दिखा

जाता है। वही हजारीबाग जिला में लुप्त प्राणी गिद्ध को एक सौ की संख्या में भ्रमण करते

हुए देखा गया। वन विभाग प्रमंडलीय के द्वारा इस गिद्ध को बचाने के लिए कोई व्यवस्था

नहीं कर पाया गया है।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from पर्यावरणMore posts in पर्यावरण »
More from वीडियोMore posts in वीडियो »
More from हजारीबागMore posts in हजारीबाग »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!