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गरीब कल्याण रोजगार नाकाफी, विशेष सहायता चाहिए-कांग्रेस

रांचीः गरीब कल्याण योजना प्रारंभ किये जाने पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कहा है

कि देश की जनता ने पूर्व में भी स्टैंड अप इंडिया और मेक इन इंडिया का हश्र देख चुकी है

और अब आज से शुरू गरीब कल्याण रोजगार अभियान का कितना फायदा मिलेगा, यह

तो समय ही बताएगा, लेकिन कोरोना वायरस के कारण देशव्यापी पूर्ण तालाबंदी के कारण

पूरे देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है, ऐसी स्थिति में देश के सिर्फ 116 जिलों और

झारखंड जैसे पिछड़े राज्य के सिर्फ तीन जिलों में ही गरीब कल्याण रोजगार अभियान की

शुरुआत नाकाफी है। प्रदेश प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे,लाल किशोर नाथ शाहदेव,डा राजेश

गुप्ता छोटू ने कहा कि पूर्व में भी प्रधानमंत्री द्वारा 20 लाख करोड़ रुपये की राहत पैकेज

की घोषणा की गयी, इसका कितना फायदा गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को मिला,

यह सर्वविदित है। अब इस नई योजना से भी कितना फायदा मिलेगा, यह भी सबको जल्द

ही पता चल जाएगा। कुछ चंद दिन पहले आत्म निर्भर भारत की ढोल बजाकर शुरुआत

हुई थी आज फिर नया झुनझुना देश की जनता को थमाने का काम किया गया है। उन्होंने

कहा कि झारखंड के 24 में से 18 जिले आंकाक्षी जिलों की सूची में शामिल है, ऐसे में सिर्फ

तीन जिलों में ही शायद रोजगार के थोड़े अवसर मिलने की संभावना हो सकती है। अन्य

जिलों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए मनरेगा योजना के लिए अधिक राशि उपलब्ध

करायी जानी चाहिए। साथ ही खाद्य सुरक्षा कानून के तहत विशेष सहायता मुहैय्या

कराने की जरूरत है।

गरीब कल्याण योजना से पहले आर्थिक पैकेज का हाल दिखा है

उन्होंने कहा कि पिछले दिनों केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग के सचिव ने झारखंड के दौरे

में मनरेगा मजदूरी दर में बढ़ोत्तरी से इंकार कर दिया था, जबकि देश के कई अन्य राज्यों

में झारखंड की अपेक्षा अधिक मनरेगा दूरी मिल रहा है, ऐसे में राज्य के मनरेगा श्रमिकों में

आक्रोश है। उन्होंने बताया कि झारखंड में अभी मनरेगा योजनाओं के माध्यम से साढ़े

सात लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है, वहीं राज्य सरकार की ओर से खाद्य

सुरक्षा कानून के तहत दिसंबर तक राशन उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है,

झारखंड की आबादी भी बढ़ी है, लेकिन केंद्र सरकार का कहना है कि 2021 की जनगणना

के बाद अतिरिक्त राशन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बावजूद झारखंड के लोगों को

उम्मीद है कि केंद्र सरकार उदारतापूर्व निर्णय लेगी और लोगों की मुश्किलें दूर होगी।

नेताओं ने कहा कि झारखंड के तीन ही नहीं, बल्कि सभी जिलों में देश के विभिन्न हिस्सों

से बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक घर वापस लौटे है। संताल परगना के ही हजारों कामगार

सीमा सड़क संगठन, बीआरओ की विभिन्न परियोजनाओं में काम करने के लिए रवाना

होने वाले थे, लेकिन भारत-चीन सीमा पर तनाव उत्पन्न हो जाने के कारण वे रवाना नहीं

हो पाए, अब उनके समक्ष रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है। वहीं कोल्हान और पलामू

प्रमंडल के भी लाखों प्रवासी कामगारों के समक्ष रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है।


 

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