झारखंड की मजबूर बेटियां कर रही हैं गुजरात में चार हजार की नौकरी

झारखंड की मजबूर बेटियां कर रही हैं गुजरात में चार हजार की नौकरी
  • महानगरों के होटलों में भरे पड़े हैं झारखंड के युवा

  • झारखंडियों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं

  • घर चलाने के लिए कर रहे है संघर्ष

  • राज्य में नौकरी का कोई अवसर नहीं

संवाददाता



रांचीः झारखंड की अनेक लड़कियां गुजरात के होटलो में बहुत ही कम मजदूरी पर काम करने पर मजबूर हैं।

इन लड़कियों को वहां मात्र चार हजार रुपये वेतन मिलता है।

यह स्थिति गुजरात के अच्छे और नामी चार सितारा होटलों की है।

यहां तक कि प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थल के करीब भी सिंहभूम, सराईकेला, गुमला और आस-पास के इलाकों की लड़कियां होटलों में वेटर का काम कर रही हैं।

मात्र चार हजार में गुजारा कैसे होते है के सवाल पर इन लड़कियों का उत्तर होता है कि मजबूरी में करना पड़ता है।

सभी साथ में रहते हैं। कुछ पैसे टिप्स के मिल जाते हैं।

इसलिए घर पर तीन-साढ़े तीन हजार भेजने के बाद किसी तरह अपना काम चला लेती हैं।

यही हाल सिर्फ सोमनाथ नहीं बल्कि गुजरात के अनेक प्रसिद्ध पर्यटन केंद्रों का है।

इनमें से राजकोट के एक चार सितारा होटल में

झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल की भी कुछ लड़कियां बहुत ही कम वेतन पर काम कर रही हैं।

झारखंड के 72 लड़के रामेश्वरम के होटलों में हैं

झारखंड के युवा फंसे हैं मामूली वेतन की नौकरियों में
आलीशान होटल में भी न्यूनतम मजदूरी नहीं झारखंड के युवाओं को

केरल के प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थल रामेश्वरम में भी झारखंड के 72 लड़के होटलों में यही काम करते हैं।

उन्हें भी कम वेतन मिलता है।

घर पर पैसा भेजने की मजबूरी होने की वजह से सभी लड़के आपस में एक साथ रहते हुए कुछ बचत कर लेते हैं।

न्यूनतम मजदूरी का सवाल नहीं करने के प्रश्न पर उनका उत्तर होता है कि

एक तो झारखंड में कोई नौकरी ही नहीं है।

यहां इसी मुद्दे पर सवाल करेंगे तो नौकरी से निकाल दिया जाएगा।

घर पर पैसा भेजना पड़ेगा क्योंकि पैसे की अभिभावकों को बहुत जरूरत है।

इसलिए सब कुछ समझते हुए भी चुपचाप काम करते हैं।

झारखंड के वेटर आपको मुंबई की होटलों में भी मिलेंगे

इनके अलावा मुंबई के एयरपोर्ट के पास के होटलों में भी झारखंडी युवाओं की भरमार है।

इनमें से अधिकांश हजारीबाग इलाके से आते हैं। उनकी कहानी भी कुछ वैसी ही है।

अपने परिचित के माध्यम से मुंबई आने के बाद वे लगातार परिश्रम कर रहे हैं।

उनके लिए भी घर पर समय पर पैसा भेजना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

इस वजह से सारी स्थिति समझते हुए भी वे झारखंड लौटकर फिर से बेरोजगार होना नहीं चाहते।



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