तेजस्वी के बयान से बिहार में बवाल

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पटना : लालू  की पार्टी के लोग सीधे नीतीश कुमार पर निशाना साध रहे हैं, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि कहीं महागठबंधन खतरे में तो नहीं है? एक नजर पूरे विवाद से जुड़ी अहम बातों पर  यूं हुई थी विवाद की शुरुआत – पूरा मामला राष्ट्रपति उम्मीदवार के चयन का है।

भाजपा ने बिहार के राज्यपाल (अब इस्तीफा दे चुके हैं) रामनाथ कोविंद का ऐलान किया तो नीतीश ने इसका समर्थन किया। वहीं दलित से दलित का तोड़ निकालने की नियत से जब कांग्रेस और सहयोगी दलों ने मीरा कुमार को मैदान में उतारा तो नीतीश ने कहा, बिहार की बेटी (मीरा कुमार) को हराने के लिए चुनाव लड़ाया जा रहा है।

नीतीश की यह बात बिहार के उप मुख्यमंत्री और लालू के बेटे तेजस्वी यादव को रास नहीं आई। उन्होंने कहा, महागठबंधन के नेताओं को अपने बयानों पर संयम रखना चाहिए। मैदान में उतरने से पहले कोई कैसे कह सकता है कि कौन जीतेगा कौन हारेगा। हमारी लड़ाई विचारधारा से है। इसके बाद से जदयू और राजद आमने-सामने हैं। यह बिगड़ी बात बनने के बजाय रविवार को तब और अधिक बिगड़ गई, जब तेजस्वी और राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे ने मुख्यमंत्री को लक्ष्य करके नए बयान जारी कर दिए। हालात देख जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह को कहना पड़ा कि राजद के लोग शायद किसी बात के लिए मन बना चुके हैं।

वहीं जदयू प्रवक्ता संजय सिंह ने चेतावनी दे दी कि नीतीश कुमार को गालियां देना बंद नहीं किया गया तो राजद समझ ले कि जदयू के लोग चूडि़यां नहीं पहने हैं। बहरहाल, इसका भी कोई असर नहीं हुआ। दोपहर में तेजस्वी यादव ने अपने ‘दिल की बात’ में किसी का नाम लिए बगैर कह दिया कि अहंकार और भ्रम की वजह से विपक्ष बिखर गया है।

उनका इशारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर था।  नीतीश कुमार पर तेजस्वी यादव द्वारा किए जा रहे हमले पर राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की चुप्पी से भी स्थिति बिगड़ रही है। 23 जून को अपने आवास पर आयोजित इफ्तार पार्टी में भी लालू ने नीतीश से बातचीत नहीं की थी। इसके बाद नीतीश कुमार पर तेजस्वी के आक्रामक हमले पर भी वह मौन हैं। माना जा रहा है कि जो कुछ हो रहा, उसमें राजद अध्यक्ष की सहमति है। भाजपा की हालात पर नजर – महागठबंधन का झगड़ा प्रत्यक्ष तौर पर राष्ट्रपति चुनाव में राजग उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को जदयू के समर्थन से शुरू हुआ है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से नीतीश के लिए भाजपा का ‘सॉफ्ट कॉर्नर’ बना हुआ है। पार्टी के नीतीश-विरोधी स्वर पूरी तरह शांत हो चुके हैं।

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