आर्थिक नीति पर फिर से विचार हो- मोहन भागवत

मंच पर मौजूद थे लालकृष्ण आडवाणी और नीतीन गडकरी

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नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भी देश की आर्थिक नीतियों पर नये सिरे से विचार करने की वकालत की है।

दशहरा के मौके पर संघ प्रमुख हमेशा राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त किया करते हैं।

श्री भागवत ने इसी मौके पर यह वैचारिक बम फोड़ा है।

उल्लेखनीय है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा के एक लेख के बाद

वर्तमान सरकार के वित्त मंत्री और आर्थिक नीति कई स्तरों पर आलोचनाओं के घेरे में आ चुकी है।

यशवंत सिन्हा के आरोपों के उत्तर देने के लिए उनके ही पुत्र जयंत सिन्हा को आगे कर दिया गया है।

श्री भागवत ने कहा कि सरकार को आर्थिक नीतियों को बदलना चाहिए

तथा आर्थिक विशेषज्ञों को वास्तविकता के आधार पर समस्याओं के समाधान का रास्ता तलाशना चाहिए।

इसके लिए किसी भी वाद से उबर आना ही देश के लिए बेहतर होगा।

संघ प्रमुख ने कहा कि देश की आर्थिक नीति कुछ ऐसी हो जिसमें सभी का फायदा हो।

खासकर बड़े, मध्यम और लघु उद्योग, किसान आदि पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि पिछली बार की आर्थिक मंदी के दौरान

देश के इन्हीं वर्गों से देश की अर्थनीति को थामने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी।

इन सभी क्षेत्रों पर कमसे कम प्रतिकूल प्रभाव हो, यह देखना भी सरकार की जिम्मेदारी है. आर्थिक मोर्चे पर बदलाव तो होने चाहिए

लेकिन इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि जिन क्षेत्रों से देश की अर्थनीति को संबल मिलता है, उन्हें स्थायित्व मिले।

कश्मीर के लिए संविधान संशोधन हो

संघ प्रमुख ने अवैध घुसपैठ पर भी स्पष्ट तौर पर अपनी राय जाहिर की।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और म्यानमार से लोग गलत तरीके से भारतवर्ष में घुस आये हैं।

इससे देश की सुरक्षा को भी खतरा हो रहा है जबकि देश के लोगों के रोजगार के अधिकार पर भी दबाव पड़ रहा है।

शरणार्थियों के बारे में सोचने के पूर्व देश को कश्मीर से विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास पर भी सोच लेना चाहिए।

खासकर रोहिंग्या पर विचार के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा पर ध्यान देना सबसे जरूरी है।

जब श्री भागवत यह विचार व्यक्त कर रहे थे तो वहां लालकृष्ण आडवाणी और नीतीन गडकरी भी मौजूद थे।

श्री भागवत ने कहा कि यह समय की मांग है कि हम अब कश्मीर में चली आ रही व्यवस्थाओं पर भी नये सिरे से विचार कर आवश्यक संशोधन करें।

इसके लिए यदि जरूरी हो तो संविधान संशोधन हो और पुराने प्रावधानों को बदला जाए।

ऐसा कहकर श्री भागवत ने धारा 370 के बारे में भी अपनी राय सार्वजनिक तौर पर जाहिर कर दी है।

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