Press "Enter" to skip to content

सज गयी है चुनावी बिसात राजनीतिक दलों की अब खेल की बारी




सज चुकी है पांच राज्यों में चुनावी रण की शतरंज। चुनाव आयोग ने पांच राज्यो में विधानसभा चुनाव कराने का अंततः एलान कर दिया है। वैसे इस एलान के लिए यह समझा जा रहा था कि इसकी घोषणा 12 जनवरी के बाद होगी क्योंकि तब तक नरेंद्र मोदी को कई जनसभाओं में भाषण देना था।




अब आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद वह विकास कार्यक्रमों का कुछ नहीं कर पायेंगे। इसलिए इस अप्रत्याशित एलान को पंजाब की घटना से जोड़कर भी देखा जा सकता है। कौन कितने पानी में हैं, उसकी असली परख अब होने जा रही है क्योंकि जब तक चुनाव का एलान नहीं हुआ था, सभी दल वॉर्मअप मैच खेल रहे थे ताकि माहौल बना रहे।

अब असली खेल प्रारंभ हो चुका है। लेकिन इस बार का चुनाव पहले जितना आसान नहीं होगा क्योंकि कोरोना की वजह से कई किस्म की पाबंदियां लगायी गयी हैं। ऐसे में जनता तक सीधी पहुंच के रास्ते कम हो गये हैं। जो काम खुद नरेंद्र मोदी कर सकते थे, वही काम भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ता भी कर पायेंगे, इसकी कम उम्मीद है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि साल 2012 में सभी राज्यों में कुल नौ चरणों में और 2017 में कुल आठ चरणों में वोट डाले गए थे। श्री चन्द्रा ने कहा कि यह लोकतंत्र का त्योहार है, इसमें मतदाताओं को पूरे उत्साह से भाग लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनावों को सफल बनाना राजनीतिक दलों सहित सभी संबंधित पक्षों का अहम् दायित्व है।

चुनाव आयोग के इस वर्ष पांच राज्यों में होने वाले चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा के साथ ही आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों में कोविड प्रोटोकाल पर विशेष ध्यान दिया है।

सज चुकी बिसात पर कोरोना का साया भी

चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि इनचुनावों के दौरान पूर्ण रूप से कोविड-दिशानिर्देश लागू किये जायेंगे। कोविड की वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए 15 जनवरी 2022 तक सभी प्रकार की प्रत्यक्ष रैलियों, साइकिल और मोटरसाइकिल रैली, पद यात्राओं, नुक्कड़ सभाओं, जनसभाओं इत्यादि पर रोक रहेगी।




चुनाव में भाग लेने वाले दल वर्चुअल रैलियों के माध्यम से प्रचार कर सकेंगे। स्थिति पर 15 जनवरी को समीक्षा करने के बाद पार्टियों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। इस दौरान राजनीतिक दल रात आठ बजे से सुबह आठ बजे तक कोई रैली नहीं कर सकेंगे। रैली के समय राजनीतिक दल कोविड के नियमों के तहत जनता को मास्क उपलब्ध करायेंगे।

डोर टू डोर कैम्पेन के लिए पांच लोगों की इजाजत होगी, साथ ही प्रचार में कोविड गाइडलाइन का ध्यान रखना जरूरी है। सभी मतदान केंद्र प्रथम तल पर स्थित होंगे और वहां सेनेटाइजर, मास्क, दस्ताने इत्यादि की पूर्ण रूप से व्यवस्था होगी। केंद्रों पर मौजूद सभी कर्मचारियों दोनों डोज ले चुके होंगे, जरूरत पड़ने पर बूस्टर डोज की व्यवस्था होगी। चुनाव में भाग लेने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को फ्रंट लाइन वर्कर्स का दर्जा दिया जाएगा।

कोविड नियमों का पालन न करने वालों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जनता से नेताओँ की सीधी मुलाकात इस निर्देश की वजह से कठिन हो गयी है। दरअसल जो वोट प्रभावित करने वाले नेता हैं, वे सभी स्थानों पर अपनी उपस्थिति तो दर्ज नही करा पायेंगे। दूसरी तरफ वर्चुअल रैली के जरिए जनता को अपनी तरफ खींचने में कठिनाई भी रहेगी। इसलिए अचानक से इस एलान की वजह से चुनाव फिर से सभी दलों के लिए पहले के मुकाबले बहुत कठिन हो गया है।

कोरोना गाइड लाइनों की वजह से बड़े दल संकट में

वैसे इन सारे चुनावों में से सबसे अधिक महत्वपूर्ण तो उत्तरप्रदेश का चुनाव है। वहां मतदान सात चरणों में होंगे। पांचों राज्यों की कुल 690 विधानसभा सीटों के लिए मतदान कराया जायेगा। उत्तर प्रदेश में 403, पंजाब में 117, उत्तराखंड में 70, मणिपुर में 60 और गोवा में 40 विधानसभा सीटों के लिए मतदान कराया जायेगा।

पहले चरण में 10 फरवरी को वोट डाले जाएंगे और सभी राज्यों में मतगणना 10 मार्च को होगी। दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में भी वोट 14 फरवरी को डाले जाएंगे। तीसरे चरण का मतदान केवल उत्तर प्रदेश में 20 फरवरी को, चौथे चरण का मतदान केवल उत्तर प्रदेश में 23 फरवरी को होगा।

पांचवे चरण में उत्तर प्रदेश के साथ मणिपुर में पहले चरण के लिए 27 फरवरी को वोट डाले जाएंगे। उत्तर प्रदेश में छठे चरण और मणिपुर के दूसरे चरण का मतदान तीन मार्च को होगा। आखिरी और सातवें चरण के लिए उत्तर प्रदेश में सात मार्च को वोट डाले जाएंगे। अब पंजाब की घटना के बाद इन राज्यों में भी चुनावी माहौल में परिवर्तन होना तय है। अब यह बदलाव भाजपा के पक्ष में होगा या उसके खिलाफ यह समय के परख का विषय है। इसी वजह से यह चुनाव एलान के साथ ही रोचक मोड़ पर पहुंच गया है।



More from HomeMore posts in Home »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »

3 Comments

  1. […] चुनावी दौर में वैसे ही भारतीय जनता पार्टी अभी चौतरफा चुनौतियों से जूझ रही है। इसके बीच ही फिर से एलआईसी के निजीकरण की चर्चा सामने आने से पार्टी को फिर से उन्हीं सवालों को झेलना पड़ेगा, जिनसे सरकार और भाजपा लगातार बचकर निकलना चाहती है। […]

Leave a Reply

%d bloggers like this: