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दिग्विजय सिंह के बेंगलुरु पहुंचने के बाद आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज

भोपालः दिग्विजय सिंह के कल बेंगलुरु पहुंचते ही राजनीति तेज होने लगी है। उनके

वहां पहुंचने ही पिछले दो सप्ताह से चल रहा सियासी संघर्ष फिर से चरम पर पहुंच

गया। ताजा राजनैतिक घटनाक्रमों के बीच जहां पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपने

सहयोगियों के साथ बेंगलुरु पहुंचे और उन्होंने उस रिसार्ट में प्रवेश का प्रयास किया,

जहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर कुछ समय बाद रिहा कर दिया गया। इस बीच

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट के माध्यम से कहा कि बेंगलुरु में भाजपा द्वारा ‘बंधक’

बनाये गये कांग्रेस विधायकों से मिलने गये कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार दिग्विजय

सिंह व कांग्रेस के मंत्रियों, विधायकों को मिलने से रोकना, उनसे अभद्र व्यवहार करना,

उन्हें बलपूर्वक हिरासत में लेना पूरी तरह से ‘तानाशाही व हिटलरशाही’ है। श्री

कमलनाथ ने आरोप लगाते हुए कहा कि पूरा देश आज देख रहा है कि एक चुनी हुई

सरकार को अस्थिर करने के लिये किस प्रकार से भाजपा द्वारा लोकतांत्रिक मूल्यों की

हत्या की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्यों विधायकों से मिलने नहीं

दिया जा रहा है। आख़रि किस बात का डर भाजपा को है। उनका आरोप है कि भाजपा

द्वारा एक गंदा खेल प्रदेश में खेला जा रहा है। लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मूल्यों व

अधिकारों का दमन किया जा रहा है। उन्होंने हिरासत में लिये गये नेताओं को शीघ्र रिहा

करने और विधायकों से मिलने की इजाजत दिए जाने की मांग की है। दूसरी ओर

बेंगलुरु में मौजूद विधायकों और पूर्व विधायकों के वीडियो आज फिर सोशल मीडिया में

तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें ये नेता कह रहे हैं कि  ज्योतिरादित्य सिंधिया के

साथ जाने और अपने त्यागपत्र पर अडिग हैं।

दिग्विजय सिंह के पहुंचने के बाद विधायकों के वीडियो वायरल

ये नेता कहते हुए सुने गए कि वे श्री दिग्विजय सिंह से मिलना नहीं चाहते हैं और वे

अपने दल बल समेत वापस लौट जाएं। बेंगलुरु में कांग्रेस के 22 विधायक एवं पूर्व

विधायकों के एक होटल में रुके हुए हैं। इन सभी 22 विधायकों ने त्यागपत्र दे दिए हैं,

जिनमें से छह विधायकों के त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार भी कर लिए हैं।

शेष 16 विधायकों के त्यागपत्र अभी तक स्वीकार नहीं किए गए हैं। माना जा रहा है कि

मौजूदा सरकार के अभूतपूर्व संकट में आने की सबसे बड़ी वजह कांग्रेस विधायकों के

त्यागपत्र ही हैं। ये विधायक वरिष्ठ नेता एवं कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने

वाले श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं। जिन छह विधायकों के त्यागपत्र

स्वीकार हुए हैं, वे कमलनाथ सरकार में मंत्री भी थे, जिन्हें बर्खास्त कर दिया गया है।

दूसरी ओर भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और वरिष्ठ विधायक

नरोत्तम मिश्रा लगातार कहते आ रहे हैं कि कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गयी है।

सरकार राज्यपाल के निर्देश के बावजूद सदन में बहुमत साबित नहीं कर रही है और वह

अल्पमत में होने के बावजूद संवैधानिक संस्थाओं में नियुक्तियां और तबादले कर रही

है। श्री चौहान ने कहा कि ये ठीक नहीं है और नयी सरकार आते ही सभी नियुक्तियां रद्द

की जाएंगी। श्री चौहान ने तो कल बाकायदा एक वीडियो जारी कर चेतावनी भरे लहजे में

कहा है कि उनके पास लगातार सूचनाएं आ रही हैं कि कुछ अधिकारी सत्तारूढ़ दल

कांग्रेस के पक्ष में नियम विरूद्ध कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह उचित नहीं है और

सरकार बदलने पर ऐसे सभी अधिकारियों को देखा जाएगा। उनके पास ऐसे सभी

अधिकारियों के नाम भी हैं।


 

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