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पुलिस हिरासत में कुख्यात पप्पू देव की हुई मौत या हत्या?




मुंगेर गोलीचालन के बाद सवालों के घेरे में लिपि सिंह
इलाके का कुख्यात अपराधी था मरने वाला व्यक्ति
कहा गया था कि मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया था

दीपक नौरंगी

सहरसा: पुलिस हिरासत में कुख्यात पप्पू देव की मौत हुई या फिर उसकी हत्या हुई, यह सवाल अब सहरसा में चर्चित हो उठा है। इसी वजह से वहां की एसपी और आईपीएस अधिकारी लिपि सिंह फिर एक बार सुर्खियों में हैं।




मुंगेर में भारी बवाल होने के बाद चुनाव आयोग के निर्देश के बाद लिपि सिंह को मुंगेर से हटाया था। चुनाव खत्म होते ही राज्य सरकार ने लिपि सिंह को तुरंत ही सहरसा का एसपी बनाया था।

सहरसा से ताजा खबर आ रही है कि कुख्यात पप्पू देव की पुलिस हिरासत में दिल का दौरा पड़ने से अहले सुबह सदर अस्पताल में मौत हो गई।

यह बयान पुलिस का है लेकिन पप्पू देव की पुलिस हिरासत में मौत हुई है या हत्या सहरसा पुलिस सहित सहरसा पुलिस कप्तान लिपि सिंह सवालों के घेरे में है

सवाल ये उठता है क्या किसी भी राज्य में जिले में तैनात आईपीएस अधिकारी आम जनता की सुरक्षा करता है या लगातार किसी आईपीएस अधिकारी को हर जिले में कप्तान बनाने की कृपा लुटाते आये हैं।

इसका जीता जागता उदाहरण है बिहार में लिपि सिंह, क्योंकि केंद्रीय इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह की पुत्री है जिसके कारण बिहार में लिपि सिंह को प्रभावशाली माना जाता है

पुलिस सूत्रों के अनुसार पप्पू देव को पुलिस ने जमीन कब्जे के एक मामले में शनिवार की देर रात हिरासत में ले लिया था। इसी दौरान उसे दिल का दौरा पड़ा। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

पुलिस हिरासत में मौत पर सवाल उठने के कारण हैं

जानकारी के अनुसार शनिवार की शाम पप्पू देव और उसके गुर्गे शहर के सराही मोहल्ले में एक जमीन पर कब्जा करने आए थे।

सदर थाना को इसकी जानकारी मिली तो पुलिस वहां पहुंची। लेकिन पप्पूदेव अपने गुर्गो के साथ भागने में कामयाब रहा।

इस दौरान पुलिस ने तीन लोगों को पिस्तौल, गोली, के साथ हिरासत में ले लिया। जिसके बाद कई थाना की पुलिस ने बिहरा थाना इलाके में पप्पू देव के घर पर छापेमारी की।




वहां मौजूद दो लोगों को जब हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो पता चला कि वो नजदीक के चिमनी भट्ठे के बगल में उमेश ठाकुर के मकान में सोया है।

पुलिस के पहुंचते ही जब पप्पू समर्थकों गोलीबारी शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने भी गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। पप्पूदेव वहां से भागने के फिराक में था। लेकिन पुलिस ने उसे दबोच लिया।

पुलिस हिरासत में देर रात सीने में दर्द की शिकायत पर उसे सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। सदर अस्पताल में डाक्टरों ने पप्पू देव को पटना या दरभंगा के लिए रेफर कर दिया।

पुलिस इसकी तैयारी कर ही रही थी कि पप्पू देव ने दम तोड़ दिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक दिल का दौड़ा पड़ने से उसकी मौत हुई है।

लेकिन पप्पू देव की मौत के बाद उसके समर्थकों का अस्पताल में जमावड़ा लग गया है। क्योंकि पप्पू देव के शरीर में कई गंभीर जख्म देखे गए हैं। अब कई जगह काले का निशान है। फोटो देखने से यह प्रतीत होता है कि पुलिस पिटाई से पप्पू देव की मौत होती हुई है।

दावा है कि मुठभेड़ के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था

पप्पू देव की मौत का रहस्य मामला जांच के बाद ही सामने आएगा कि इसमें सच्चाई क्या है अपराध जगत में कोसी के डान कहे जाने जाने वाले पप्पू देव पर बिहार से लेकर नेपाल तक दर्जनों केस दर्ज थे।

नेपाल से सजा काटने के बाद आठ वर्ष पूर्व बिहार लाया गया था।

पुलिस मुख्यालय के वरीय अधिकारियों को सहरसा के जमीन विवाद में पप्पू देव की गिरफ्तारी के मामले की जांच गंभीरता पूर्वक करनी चाहिए कि जमीन के मामले में एसपी लिपि सिंह के द्वारा क्यों रूचि ली गई

क्या पूरे जमीन के कारोबार में पुलिस की क्या भूमिका है और बार-बार ही जिस जिला में लिपि सिंह तैनात रहती है वही खुद सवालों के घेरे में क्यों आती है आखिर सहरसा में पप्पू देव की मौत हुई या हत्या इसकी जांच पुलिस मुख्यालय को गंभीरता पूर्वक करनी चाहिए।



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