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जहर का बम गिराने के मुद्दे पर बना हुआ है मतभेद




कैलिफोर्नियाः जहर का बम गिराकर महामारी पीड़ित चूहों को मारने के प्रस्ताव का जबर्दस्त विरोध भी हो रहा है। पर्यावरण के विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे फॉर्लोन द्वीप का पर्यावरण संतुलन भी बिगड़ जाएगा। अगर हेलीकॉप्टर से जहर का बम गिराय गया तो इस द्वीप पर मौजूद सारे प्राणी उसकी चपेट में आ जाएंगे। दरअसल वहां जहर का बम गिराने का प्रस्ताव इस वजह से आया है क्योंकि इस द्वीप में मौजूद चूहों में प्लेग जैसे विषाणु पाये जा रहे हैं। वैज्ञानिक मान रहे हैं कि यह विषाणु तेजी से फैलता भी जा रहा है। इसलिए उसे तत्काल नियंत्रण करने का सीधा रास्ता है कि जहर का बम वहां गिराया जाए। इस बम गिराने का असली मकसद बीमार चूहों का सफाया करना है। बता दें कि इस द्वीप पर चूहों के अलावा अनेक किस्म के पक्षी भी रहते हैं। खास तौर पर गल्स और बुरोइंग ओल्स की बड़ी आबादी इस द्वीप पर वास करती है।




जहर का बम गिराने का जोरदार विरोध भी है

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जहर का बम गिराने के बाद उसका इन प्राणियों पर क्या असर होगा, उसका कोई मूल्यांकन ही नहीं किया गया है। वर्तमान में लंबी बहस के बाद जहर का बम गिरान का प्रस्ताव 5-3 वोट से पारित तो कर दिया गया है।




जिसके बारे में अमेरिकी फिश एंड वाइल्डलाइफ सर्विस (एफडब्ल्यूएस) के क्षेत्रीय निदेशक को अब फैसला लेना है। सॉन फ्रांसिस्को के तट के करीब यह द्वीप स्थित है। वैसे योजना के मुताबिक दोनों पक्षों के वैज्ञानिक अभी वहां के घटनाक्रमों का और अध्ययन कर रहे है। इसलिए जहर का बम गिराने का काम तत्काल नहीं किया जाएगा। अगर यह प्रस्ताव पारित कर दिया गया तो यह कार्रवाई वर्ष 2023 में होगी। इस द्वीप में प्लेग जैसी महामारी के मौजूद होने का पता चलने के बाद से ही उसका निरंतर अध्ययन किया जा रहा है। प्रारंभिक तौर पर ही कुछ वैज्ञानिकों ने जहर का बम गिराकर सारे चूहों को मार देने की राय जाहिर की थी।

चूहा मारने के लिए दूसरे जीवों की हत्या क्यों

दूसरी तरफ द्वीप पर मौजूद अन्य प्राणियों के जीवन की रक्षा का बड़ा सवाल भी उठ खडा हुआ है। वैसे समझा जाता है कि नाविकों के नाव इस द्वीप पर पहुंचने के साथ ही इस जगह पर चूहों का आगमन हुआ था। जिनकी आबादी में अब प्लेग जैसे संकेत मिल रहे हैं। जहर का बम गिराने के पक्ष में यह दलील दी गयी है कि इसके पहले द्वीप पर मौजूद पक्षियों को उड़ा दिया जाएगा। लेकिन इसका विरोध करने वालो का कहना है कि जहर का बम गिराने के बाद जो चूहे मर जाएंगे, उन्हें अपना भोजन बनाने वाले अन्य प्राणियों और पक्षियों के जीवन की गारंटी कौन लेगा।



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