fbpx Press "Enter" to skip to content

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आग्रह देश के लिए बचाव का रास्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में देश के उन लोगों से माफी मांगी है, जिन्हें इस

राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की वजह से परेशानी हो रही है। लेकिन देश को भी ऐसे माफी पर

अधिक सक्रियता के साथ अपनी बात रखनी चाहिए थी। लोगों को आगे बढ़कर यह बताना

चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले के साथ देश का बहुमत पूरी मुस्तैदी के साथ

खड़ा है। जो पाबंदियां लगायी गयी है, उससे सरकार या खुद नरेंद्र मोदी को कोई

व्यक्तिगत लाभ नहीं होने जा रहा है। कोरोना वायरस के संक्रमण को अधिक फैलने से

रोकने का यह एक सामयिक तरीका है। विज्ञान की कसौटी पर साबित नहीं होने के बाद भी

यह तय है कि अधिक तापमान पर कोई भी वायरस अपनी मारक क्षमता खो देता है।

अभी तक नहीं बनी है इसके लिए कोई मानक दवा

इसलिए जब तक विज्ञान इस कोविड-19 के ईलाज के लिए कोई दवा तैयार नहीं कर ले, पूरे

देश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात का अक्षरशः पालन करना चाहिए। इस स्थिति में

देश के कुछ अन्य जिम्मेदार मंत्रियों के गैर जिम्मेदाराना वक्तव्य की भी आलोचना

प्रासंगिक है। जिन्होंने इस राष्ट्रीय संकट के दौर में राहुल गांधी द्वारा कही गयी बात का

मजाक उड़ाते हुए कहा कि वह इस मौके पर सिर्फ लोगों में भय पैदा करने की राजनीति कर

रहे हैं। लिहाजा श्री मोदी के फैसले का समाज को आगे बढ़कर समर्थन करना चाहिए।

समय बीतने के साथ साथ यह साबित होता जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो कड़ा

फैसला लिया था, वह भारत जैसे घनी आबादी वाले देश के लिए एक सही फैसला था।

कमसे कम इस प्रारंभिक कड़ाई से कोरोना के फैलने पर कुछ हद तक रोक लगी है। देश के

अनेक इलाके अब भी इस रोग से पूरी तरह मुक्त है।

प्रधानमंत्री मोदी ने बचाव का सही रास्ता बतलाया है

लेकिन अलग अलग स्थानों से जो लोग अन्यत्र गये हैं, उनमें अगर संक्रमण छिपा हुआ है

तो उसके बाहर आने में अभी वक्त लगेगा। साथ ही ऐसे अनजान संक्रमण की चपेट में

आने वालों के बीमार पड़ने का क्रम और आगे तक जारी रहेगा। ऐसे में कमसे कम संक्रमण

को खास इलाकों तक सीमित रखने की यह कोशिश सही फैसला साबित होने जा रही है।

देश के लिए बचाव का यही सबसे आसान और सही रास्ता है। आने वाले दिनों में अगर

इसके सफल ईलाज के लिए कोई दवा बाजार में उपलब्ध होती है तो स्थिति और रणनीति

कुछ और होगी। इस बीच हमारे पास इस अदृश्य शत्रु से लड़ने का जो वक्त मिला है, उस

समय में हम अस्पताल और वैकल्पिक अस्पताल बना लेने के अलावा कोरोना से बचाव

और ईलाज के लिए अन्य उपकरण जुटाने की तैयारियों पर युद्धस्तर पर ध्यान दे सकते

हैं। अच्छी बात यह है कि अधिकांश राज्य सरकारें इस दिशा में काम करना प्रारंभ कर

चुकी है। लेकिन अभी तक जो तैयारियां हैं, वे शायद अगले दो चरण के लिए पर्याप्त नहीं

हैं। लिहाजा संक्रमण के और फैलने के पहले ही हमें तमाम ऐसे संभावित रोगियों के अलग

थलग ईलाज की व्यवस्था कर लेनी चाहिए। इससे जो संक्रमण मुक्त हैं, उन्हें इस राष्ट्रीय

आपदा में अन्य जरूरी राष्ट्रीय जिम्मेदारियों को निभाने का अवसर मिल जाएगा। यह

सुखद स्थिति है कि सरकारों के अलावा भी सामाजिक संगठन और लोग निजी स्तर पर

भी इस काम में अपना योगदान दे रहे है। प्रारंभिक दिनों में थोड़ी अव्यवस्था होने के बाद

दिनोंदिन इस वैकल्पिक व्यवस्था में निरंतर सुधार होता जा रहा है। इसलिए देश को पूरी

मजबूती के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐसे फैसले के साथ खुलकर खड़ा होना चाहिए।

ऐसे अवसरों पर सिर्फ नैतिक समर्थन कई बार पर्याप्त नहीं होता।

लिहाजा ऐसे अवसरों पर नेतृत्व को मुखर समर्थन भी चाहिए

ऐसे अवसरों पर समर्थन का मुखर होना भी जरूरी है। ताकि कठोर फैसला लेने वाले जिस

मानसिक द्वंद्व से गुजर रहा है, उसमें वह यह महसूस कर रहे कि वाकई देश के बहुमत

का फैसला उसके पक्ष में है। इस किस्म के कठोर फैसला लेने के दौरान ऐसी मानसिक

परेशानी से हर कोई गुजरता है। इसलिए उसे यह महसूस न हो कि वह अकेला है, उसके

लिए जनता की तरफ से मुखर समर्थन की जरूरत है। कोरोना की परेशानी से हमारी

अर्थव्यवस्था भी बुरे दौर में पहुंच चुकी है। इसलिए कोरोना का प्रकोप समाप्त होने के बाद

भी हमें आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में संयम बरतना होगा। क्योंकि

भारतीय सामाजिक अर्थव्यवस्था जिस पद्धति पर आधारित है, वही व्यवस्था इस संकट में

पहले भी काम आयी थी और आगे भी कारगर साबित होने जा रही है। सिर्फ ऐसे अवसरों

पर भी निजी हित साधने अथवा मुनाफाखोरी करने वाले तत्वों की पहचान जरूरी है। ताकि

कोरोना के संकट से निपटने के बाद ऐसे तत्वों को राष्ट्रद्रोह और आवश्यक वस्तु

अधिनियम की धाराओं के तहत दंडित किया जा सके।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

3 Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!
Open chat