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असम के भूमिहीन 1.06 लाख परिवारों को जमीन के पट्टा देने के कार्यक्रम प्रारंभ

  • पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के साथ आत्मनिर्भर भारतःमोदी

  • राज्य भर में मोदी के खिलाफ प्रदर्शन जारी

  • नागरिकता संशोधन के खिलाफ छात्र संगठन

  • पुलिस का लाठी चार्ज कई छात्र नेता घायल

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: असम के भूमिहीन परिवारों को जमीन देने का शुभारंभ आज खुद प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी ने किया। कोरोना काल में पहली बार असम पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने

शनिवार को शिवसागर जिला के ऐतिहासिक जेरेंगा पथार (मैदान) में असम के भूमिहीन

1,06,940 लाख परिवारों को भूमि के स्वामित्व का अधिकार देने के कार्यक्रम का

औपचारिक रूप से शुभारंभ किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत

असमिया भाषा में राज्यवासियों का स्वागत करते हुए किया। उन्होंने जेरेंगा पथार को

लेकर पूर्व की सरकारों पर इसकी अनदेखी का भी आरोप लगाया गया है। इस कारण देश

की आजादी के 70 वर्ष बाद देश का शीर्ष नेतृत्व पहली बार इस मैदान में पहुंचा है। इसको

लेकर यहां के लोगों में भारी खुशी देखी गयी। जेरेंगा पथार को सति जयमति के द्वारा देश

की आजादी के लिए बलिदान के रूप में भी जाना जाता है। प्रधानमंत्री से प्रमाण पत्र लेने

वाले लोगों का सरकार ने पहले ही आरटीपीसीआर के जरिए कोरोना का टेस्ट करवाया था।

एक विशाल सभा को संबोधित करते हुए, मोदी ने कहा कि चूंकि केंद्र सरकार का नेतृत्व

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था, इसलिए वर्तमान एनडीए (राष्ट्रीय

जनतांत्रिक गठबंधन) सरकार असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के लिए

सर्वोच्च प्राथमिकता के अनुसार रही है। बुनियादी सुविधाओं और कनेक्टिविटी विकास से

लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार सृजन में वृद्धि तक, केंद्र और राज्य में डबल इंजन सरकारें

असम की सर्वांगीण प्रगति को आगे ले जा रही हैं। सरकार ने असम और अन्य पूर्वोत्तर

राज्यों के सड़क, रेल, वायु, जल संयोजकों के विकास और विस्तार के लिए एक साथ

परियोजनाएं शुरू की हैं।

असम के भूमिहीन को पट्टा देने के अलावा विकास की बात की

उन्होंने कहा, ‘इन मल्टी डायमेंशनल कनेक्टिविटी प्रॉजेक्ट्स में बांग्लादेश, नेपाल, भूटान

और म्यांमार भी शामिल हैं। असम की लगभग 70 जनजातियों को सामाजिक सुरक्षा

प्रदान की गई है। असम की भाजपा सरकार ने भी उनके शीघ्र विकास के लिए कई

योजनाएँ शुरू कीं। श्री मोदी ने कहा कि असम के लोगों का प्यार मुझे बार-बार वापस लाता

है। मुझे वर्षों से राज्य के विभिन्न हिस्सों में जाने का सौभाग्य मिला है। मैं राज्य के

स्वदेशी लोगों की एक बड़ी उपलब्धि पर राज्य के लोगों के साथ जश्न मनाने आया हूं।

कार्यक्रम का शुभारंभ राज्य के शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्त आदि मामलों के मंत्री डॉ हिमंत

विश्वशर्मा के उद्घाटन भाषण से हुआ। मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने भी प्रधानमंत्री के

सबल नेतृत्व की सराहना करते हुए असम के विकास में उनके योगदान का उल्लेख किया।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री रामेश्वर तेली,शिक्षा मंत्री डॉ. विश्वशर्मा, असम सरकार के

मंत्री संजय किसान, मंत्री जगनमोहन, असम गण परिषद के अध्यक्ष व राज्य के कृषि

मंत्री अतुल कुमार बोरा, मंत्री केशव महंत, हाउसफेड के चेयरमैन रंजीत कुमार दास,

सांसदगण, विधायकगण के साथ ही लाखों स्थानीय लोग इस मौके पर मौजूद थे।

मोदी के इस दौरे के दौरान राज्य भर में सीएए विरोधी प्रदर्शन

दूसरी ओर , प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा यात्रा के दौरान, पुलिस ने केंद्र सरकार के

विवादास्पद नागरिकता कानून का विरोध करने के लिए शुक्रवार की रात तेजपुर में रैली

निकालने वाले ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू ) के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज का

सहारा लिया। इसमें बहुत सारे छात्र और छात्र नेता घायल हुए हैं। नागरिकता संशोधन

अधिनियम का विरोध करते हुए, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र

मोदी को काले झंडे दिखाने की कोशिश की है। पुलिस ने असम के विभिन्न जिलों में

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान शुक्रवार के रात को

कई एएएसयू कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने राज्य भर में

मशाल रैलियां की। एएएसयू ने पुलिस की कार्रवाई की निंदा की और पुलिस की कार्रवाई

का विरोध करने के लिए शनिवार को सोनितपुर जिले में बंद की घोषणा की। शुक्रवार की

रात, एएएसयू कार्यकर्ताओं द्वारा निकाली गई विशाल मशाल रैली को पुलिस ने बीच

रास्ते में रोक दिया था। इसके मुख्य सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य और अध्यक्ष दीपिका

नाथ सहित संगठन के नेताओं ने बाद में पुलिस के साथ गर्म बहस की। श्री नाथ ने कहा,

“सरकार ने पुलिस को हमारी शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक, मशाल-प्रकाश रैली को रोकने का

निर्देश दिया है। यह भाजपा सरकार बल प्रयोग करके हमारे लोकतांत्रिक अधिकार को

छीनने की कोशिश कर रही है,” श्री नाथ ने कहा।

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