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असम के मामले में अपना वादा पूरा नहीं कर पाये हैं प्रधानमंत्री मोदी (भाग एक)

  • बाइस हजार परिवारों ने अपना घर गंवाया

  • दुनिया का सबसे बड़े नदी द्वीप माजुली का हाल

  • मुख्यमंत्री सोनोवाल का निर्वाचन क्षेत्र में है इलाका

  • पर्यावरण के लिहाज से बेहद नाजुक इलाका है यह

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : असम के मामले में बार बार नरेंद्र मोदी द्वारा अपना वादा पूरा नहीं करने की

बात चुनाव करीब आने के साथ साथ जोर पकड़ती जा रही है। उत्तर-पूर्व की खूबसूरती

लोक कला और संस्कृति का बेहतरीन संगम है दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली

यह देश का पहला ऐसा द्वीप है जिसे एक जिला घोषित किया गया है। माजुली ब्रह्मपुत्र

नदी के बीच में 875 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला एक गुमनाम-सा द्वीप है।

हालांकि, असम का यह खूबसूरत द्वीप पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में हैं। एक

सितंबर 2016 को माजुली ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह बनाई। उसे दुनिया

का सबसे बड़ा नदी द्वीप घोषित किया गया। माजुली द्वीप की पहचान सिर्फ एक पर्यटन

आकर्षण के तौर पर नहीं है। इससे भी बढ़कर है। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल

का निर्वाचन क्षेत्र होना भी माजुली की एक पहचान है। यहीं से जनता ने उन्हें चुनकर

विधानसभा भेजा है। इससे समझ जाता है कि मुख्यमंत्री इस द्वीप पर नियमित आते हैं

और इससे जुड़े विकास कार्यों के लिए कितने सजग और प्रयत्नशील हैं। माजुली को एक

अलग जिला घोषित करते वक्त उन्होंने कहा था- “माजुली एक संभावनाओं और

क्षमताओं का खजाना है। इसे जिला बनाने से कई तरह के विकास कार्यों को गति मिलेगी।

माजुली द्वीप की खूबसूरती और प्राकृतिक सुंदरता बेजोड़ है। सांस्कृतिक खजाना अद्भुत

है। इसी वजह से यह जगह अब यूनेस्को की संभावित वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की सूची में है।

सभी उपलब्धियों के बाद भी यह द्वीप एक भयंकर संकट का सामना कर रहा है। ब्रह्मपुत्र

नदी की बाढ़ और उसकी वजह से किनारों को होने वाले कटाव से असम ही नहीं बल्कि केंद्र

सरकार को भी सजग होने की जरूरत है। लेकिन यह तथ्य खबरों से दूर ही है।

असम के मामले में इस पर मीडिया का ध्यान भी नहीं गया

मीडिया का ध्यान इस गंभीर कटाव की ओर गया ही नहीं है। हर साल बाढ़ की वजह से कई

लोगों की जान जाती है। डूबने की वजह से हजारों करोड़ रुपए की संपत्ति बर्बाद हो जाती

है। इसके बाद भी कटाव के तौर पर सबसे बड़ी चुनौती सामने हैं। 1990 के दशक में यह

द्वीप 1256 वर्ग किलोमीटर था। 2014 तक इसका एक-तिहाई हिस्सा ब्रह्मपुत्र के साथ

बह गया। अभी भी इसका कटाव तेजी से हो रहा है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग

ने माजुली ब्रह्मपुत्र नदी में गायब होने का भयानक संकेत दिया है। भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण

की रिपोर्ट के अनुसार , अगर केंद्र सरकार उचित समय पर कोई कार्रवाई नहीं करती है, तो

अगले 10 वर्षों के भीतर, माजुली ब्रह्मपुत्र नदी में गायब हो जाएगी। भारतीय भूवैज्ञानिक

सर्वेक्षण विभाग के रिपोर्ट के मुताबिक इस द्वीप के करीब 22,000 परिवार अपना घर गंवा

चुके हैं। पुनर्वास के लिए उन्हें वहां से हटाना ही पड़ा।


 

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