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महामारी के खिलाफ मोदी की बैठक में तैयारियों की चर्चा




महामारी के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की है। उन्होंने इसमें स्पष्ट किया कि किसी नये स्वरुप के अचानक सामने आने क पहले ही भारत को तैयार रहना चाहिए। ताकि ओमीक्रॉन के बाद कोरोना का अगर कोई नया स्वरुप पाया जाता है तो उसे भी फैलने से रोका जा सके।




उन्होंने कहा कि सैंकड़ों साल में आने वाले सबसे बड़ी महामारी से लड़ते हुए हम तीसरे साल में प्रवेश कर गए हैं। कठिन परिश्रम एकमात्र रास्ता है और जीत ही इसका विकल्प है।

देश में कोविड महामारी की स्थिति पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा के दौरान मोदी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों ने पहले जिस तरह से सक्रियता और सामूहिक दृष्टिकोण अपनाया था, इस बार भी जीत का यही मंत्र है।

उन्होंने कहा हमारा सहयोग कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई को मजबूती देगा। और हम उस पर जीत हासिल करेंगे। मोदी ने यह भी कहा कि महामारी को नियंत्रित करने की रणनीति बनाते समय अर्थव्यवस्था और लोगों की आजीविका की रक्षा करना भी महत्त्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की गति बरकरार रहनी चाहिए और राज्यों को स्थानीय स्तर पर संक्रमण रोकने पर ध्यान देना चाहिए। वैसे महामारी के खिलाफ इस बैठक के बीच ही स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में देश भर में कोरोना संक्रमण के 2.50 लाख नए मामले सामने आए, जो महामारी की मौजूदा लहर में एक दिन में आए सबसे अधिक मामले हैं।

दैनिक संक्रमण दर भी बढ़कर 13 फीसदी हो गई है और साप्ताहिक संक्रमण दर 11 फीसदी के करीब पहुंच गई है। मोदी ने कहा कि ओमीक्रोन नई चुनौती है जिसकी वजह से संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं।

महामारी के खिलाफ मोदी ने अपनी बात रखी है

उन्होंने कहा कि चिकित्सा सुविधाओं और स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या में सुधार हुआ है, कोविड महामारी के खिलाफ टीकाकरण सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने राज्यों से ‘हर घर दस्तक’ यानी घर-घर जाकर टीकाकरण अभियान को तेज करने की अपील की

और कहा कि अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों और वरिष्ठ नागरिकों को जितना जल्दी एहतियाती खुराक दी जाएगी, भारत का स्वास्थ्य देखभाल तंत्र उतना ही बेहतर तरीके से तैयार होगा। मोदी ने कहा कि करीब 92 फीसदी वयस्कों को कोविड-रोधी टीके की पहली खुराक लग चुकी है और करीब 70 फीसदी को दोनों खुराक दी जा चुकी है।




देश कोरोना के नए प्रकार ओमीक्रोन की गिरफ्त में है और चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि पिछली लहरों के उलट इस बार बड़ी तादाद में बच्चों में लक्षण वाला संक्रमण देखने को मिल रहा है। ज्यादातर मामलों में संक्रमण बहुत हल्का है लेकिन दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों में बीमारी के गहरे लक्षण दिख रहे हैं।

इस समय चिकित्सकों के सामने दो चिंताएं हैं: पहली बच्चों में मल्टीसिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआईएससी) के बढ़ते मामले। यह समस्या कोविड संक्रमण होने के चार से छह सप्ताह बाद नजर आ सकती है।

दूसरा, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बच्चों के लिए आईसीयू और गहन चिकित्सा बुनियादी ढांचे पर कोई दबाव नहीं है लेकिन मामलों में बढ़ोतरी होने पर व्यवस्था पर दबाव बन सकता है।

खासतौर पर बच्चों की देखभाल के लिए उच्च प्रशिक्षण प्राप्त कर्मचारियों के अभाव में ऐसा हो सकता है। दिल्ली के एक डॉक्टर के मुताबिक पिछली लहरों में जहां रोज 10 से कम संक्रमित बच्चे उनके पास आ रहे थे वहीं इस बार एक दिन उनके पास 40 संक्रमित बच्चों के मामले आए।

अब बच्चों में संक्रमण अधिक चिंता की बात है

यानी संक्रमित बच्चों की तादाद बहुत अधिक है। बुखार, पेट की समस्या जैसे हल्के लक्षणों के साथ कई बच्चे आ रहे हैं। लक्षणों की तीव्रता दो-तीन दिन रहती है लेकिन शायद ही किसी को दाखिल करने की आवश्यकता पड़ रही है।’

बीते कुछ महीनों में सरकार ने राज्यों को दी गई सलाहों में इस बात पर जोर दिया है कि शिशु चिकित्सा के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाया जाए। चिकित्सकों का दावा है कि भारत में सितंबर से ही अस्पतालों में बच्चों के बेड की तादाद सुधारने का सिलसिला जारी है।

उनका यह भी कहना है कि बच्चों में कोविड 19 प्रबंधन का क्लिनिकल प्रोटोकॉल तय करने को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कई चर्चाएं हुई हैं। इसी वजह से महामारी के खिलाफ भारतीय तैयारी पहले के मुकाबले बहुत बेहतर स्थिति में है।

वैसे भी वर्तमान परिस्थितियों में शहरी बच्चों के इलाज में बुनियादी ढांचे की कोई समस्या आएगी। बच्चों के इलाज के लिए बड़ों के बिस्तरों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। नवजातों और शिशुओं के लिए उपकरण अलग होते हैं जबकि बड़े बच्चों का इलाज बड़ों के बिस्तर पर हो सकता है।



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