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केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा पेट्रोल के दाम घटेंगे

  • पांच राज्यों में चुनाव है तो ईंधन के दाम घटाये जाएंगेः कांग्रेस

  • वाराणसी में मीडिया को बयान दिया केंद्रीय मंत्री ने

  • राज्य के मंत्री ने रांची में अपनी बात स्पष्ट कर दी

  • अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कम ही है कच्चे तेल की कीमत

राष्ट्रीय खबर

रांचीः केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वाराणसी में बयान क्या दिया, कांग्रेस ने इस

पर फिर से जनता की जेब पर चुनावी हित साधने का आरोप मढ़ दिया। श्री प्रधान आज

वाराणसी में थे। वैसे उनके साथ भाजपा के कई अन्य नेता भी थे। यह सभी नेता उत्तर

प्रदेश में करीब आ रहे पंचायत चुनाव के साथ साथ आगामी विधानसभा चुनाव के लिए

कार्यकर्ताओं को उत्साह बढ़ाने गये थे। वहीं श्री प्रधान ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादक देशों

से तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा गया है। ऐसा होने पर भारतीय उपभोक्ताओं को

ईंधन की बढ़ती हुई कीमतों से राहत मिल सकेगी। दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में

कच्चे तेल की कीमत पहले के मुकाबले बहुत कम होने के बाद भी पेट्रोल एक सौ रुपये

लीटर क्यों हैं, इस पर कांग्रेस ने उल्टा हमला रांची से कर दिया है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस

कमेटी के अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव का बयान इस मामले में गौर करने लायक है। इससे

पहले भी कोरोना काल में डॉ ऊरांव ने पहली बार यह आरोप लगाया था कि रघुवर दास की

सरकार के शासनकाल में दिल्ली से जीएसटी का हिस्सा झारखंड को नहीं दिया गया था।

अब डॉ ऊरांव ने कहा कि चूंकि पांच राज्यो में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसलिए भी

जनता को बहलाने के लिए भाजपा पेट्रोल और डीजल के दाम कम करेगी। वैसे यह सिर्फ

चुनाव तक की बात होगी और चुनाव निपट जाने के बाद केंद्र सरकार फिर से अपनी

मनमानी पर उतर आयेगी। पूर्व में लगातार कांग्रेस पर इसी मुद्दे पर आरोपों की झड़ी

लगाने वाले सभी भाजपा नेता इस बार उठ रहे सवालों का उत्तर देने से कतरा रहे हैं।

उनकी तरफ से भी वही सब कुछ कहा जा रहा है, जिनका उनलोगों ने विपक्ष में रहते हुए

जबर्दस्त विरोध किया था।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री सहित अन्य भाजपा नेता वाराणसी आये थे

वाराणसी में मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि पिछले साल

अप्रैल में, प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन में कटौती करने का फैसला किया, क्योंकि

कोरोना वायरस महामारी के चलते मांग में भारी गिरावट आई थी। ये देश ज्यादा कमाई

करने के चक्कर में कम ईंधन का उत्पादन कर रहे हैं। जबकि अभी भी ईंधन का उत्पादन

कम किया जा रहा है। ईंधन की मांग इस समय बढ़ गई है। इसका कारण यह है कि अब

कोरोना वायरस की जो स्थिति पहले थी, वैसी नहीं है। मांग ज्यादा बढ़ने के कारण देश में

पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए हैं।

दूसरी तरफ डॉ रामेश्वर उरांव ने भविष्यवाणी की है कि अगले दो-तीन महीनों तक पेट्रो

उत्पादों की कीमतें घटती रहेंगी। पश्चिम बंगाल, असम और केरल समेत पांच राज्यों के

लिए विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत में

दो-तीन महीने के लिए कमी आएगी।

डॉ उरांव ने कहा कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री के इस बयान में कोई सच्चाई नहीं है कि

सर्दियों में पेट्रोल-डीजल की खपत बढ़ जाने के कारण कीमत में बढ़ोत्तरी होती है। उनका

यह बयान आगामी दिनों में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ही

आया है।

मंत्री का बयान सिर्फ चुनावी फायदे के लिए

जिस तरह से पूरे देश में बढ़ती महंगाई के खिलाफ जनाक्रोश का माहौल है और

विधानसभा चुनाव में भाजपा को नुकसान नहीं उठाना पड़े, इसलिए केंद्रीय मंत्री ने सिर्फ

राजनीतिक फायदे के लिए यह बयान दिया है। चुनाव के बाद फिर से कीमत में बढ़ोत्तरी

होगी। जनविरोधी सरकार अभी अपने पूंजीपति मित्रों को सहायता पहुंचाने के लिए आंखें

बंद कर बैठी है, जबकि हकीकत यह है कि गरीब से गरीब लोग पेट्रोल-डीजल और रसोई

गैस का उपयोग करते हैं। वित्तमंत्री ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमत से पूरे देश की

अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। इसकी कीमत बढ़ने से अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमत

में भी इजाफा होता है। वहीं डीजल का उपयोग किसान भी करते है, यदि इसी तरह से

लगातार कीमत बढ़ती जाए, तो कृषि उत्पादन का लागत बढ़ जाएगी और अनाज की

कीमत भी बढ़ जाएगी।

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