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राज्य में शराब की दैनिक सेल 9 करोड़ से सीधा चार करोड़ रुपए के भीतर सिमटी

रांची : राज्य सरकार ने वैश्विक महामारी कोरोना के मद्देनजर लगे लॉकडाउन-4 में शराब

की दुकानें खोलकर एक्साइज डिपार्टमेंट के मार्फत से रेवेन्यू कलेक्शन वसूली की कवायद

शुरू कर दी है। हैरत की बात यह है कि 10 दिनों में राज्यभर में शराब की बिक्री 30 से 40%

तक की हो रही है। आंकड़ों के अनुसार देखें तो कोरोना महामारी के पहले राज्य भर में 1

दिन में लगभग 9 करोड़ रुपए तक की सेल होती थी, लेकिन अब यह तीन से चार करोड़ के

भीतर ही सिमट कर रह गई है। एक्साइज डिपार्टमेंट को राज्य सरकार के एक मजबूत

सोर्स के रूप में जाना जाता है। शराब व्यापारियों से सरकार लगभग 1600 करोड़ रुपए

सालाना वसूलती है। लेकिन मौजूदा वित्त वर्ष में 2 महीने में दुकानें बंद रहने की वजह से

व्यापारियों को भी भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारियों का साफ कहना

है कि इस बढ़े टैक्स से उन्हें कोई लाभ नहीं मिलनेवाला है। उन्होंने कहा कि बढ़े टैक्स का

पैसा सीधे सरकारी खजाने में जाएगा और माध्यम वह बनेंगे। इस बाबत झारखंड खुदरा

शराब विक्रेता संघ के सचिव अरुण जायसवाल का मानना है कि राज्य सरकार को उस

टैक्स में व्यापारियों को भी हिस्सेदारी देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर स्पेशल टैक्स

का 3 परसेंट भी व्यापारियों को मिले तो उससे उनके घाटे की भरपाई हो सकेगी। उन्होंने

कहा कि बीते 2 महीने सभी शराब की दुकानें बंद रही इस वजह से उनका रेकरिंग

एक्सपेंडिचर हुआ है। ऐसे में राज्य सरकार को अपनी तरफ से कुछ रियायत देनी चाहिए।

टाइमिंग में मिले थोड़ी रियायत

उन्होंने कहा कि दूसरी सबसे बड़ी समस्या दुकानों के खोलने को लेकर है। सुबह 7 बजे से

शाम के 7 बजे तक का समय व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि अभी

मार्केट में 30 से 40% ही बिक्री हो पा रही है। उन्होंने कहा कि इस बाबत राज्य सरकार ने

आश्वासन दिया है कि 1 जून के बाद थोड़ी रियायत मिल सकती है। किशोरगंज चौक पर

दुकान चलाने वाले मंटू सिंह ने कहा कि सुबह 7 बजे से लेकर 11 बजे तक महज तीन से

चार लोग आए हैं खरीदारी करने। ऐसे में दुकान का खर्चा चलाना भी मुश्किल हो जाता है।

राज्य में उतरता है दूसरे स्टेट का भी स्टॉक

इतना ही नहीं दूसरे राज्यों के लिए जानेवाली शराब की गाड़ियों की झारखंड में गलत

तरीके से अनलोडिंग को लेकर संघ ने आपत्ति जताई है। संघ के सचिव ने कहा कि इसके

पीछे एक बड़ा रैकेट है। जो अरुणाचल प्रदेश और अन्य प्रदेशों में जाने वाले शराब की

पेटियों की अनलोडिंग झारखंड में ही कर लेता है। ऐसा ही एक मामला पिछले दिनों

लोहरदगा में भी आया था। उन्होंने कहा कि इसमें कहीं ना कहीं जिला स्तर पर तैनात

उत्पाद विभाग के कर्मियों की भी मिलीभगत होती है। हालांकि उन्होंने कहा कि इसकी

जांच चल रही है। अगर इस तरीके से इस लीकेज पर प्रतिबंध लगे तो व्यापारियों के हितों

की रक्षा हो सकेगी और राज्य सरकार को होनेवाले टैक्स नुकसान को भी रोका जा सकेगा।

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