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विकास योजनाओं में जनप्रतिनिधियों के सुझाव की अनदेखी क्यों







विकास योजनाओं में राज्य के हर स्तर के जनप्रतिनिधियों के सुझाव पर पूरा ध्यान दिया जाना चाहिए,

यही सरकारी काम-काज का तौर तरीका है। इस व्यवस्था को यूं ही लागू नहीं किया गया था।

बल्कि इसके पीछे एक बड़ी सोच थी। आजाद भारत में आम जनता से सबसे अधिक नियमित संपर्क में रहने वाले

जनप्रतिनिधि ही हैं।

इसी वजह से जनता की जरूरतों और प्राथमिकताओं को वे बेहतर तरीके से समझ पाते हैं, इसी सोच के तहत

जनप्रतिनिधियों के सुझाव को गंभीरता से सुनने और उनपर अमल करने की व्यवस्था लागू कर दी गयी थी।

झारखंड में जैसे जैसे विकास कार्यों में कमिशनखोरी का बोलबाला बढ़ता गया है, जनप्रतिनिधियों की बातों को

अनसुना करना और उनके सुझावों की अनदेखी करना एक प्रथा सी बन गयी है।

यह निश्चित तौर पर राज्य के लिए घातक स्थिति है।

इस बात पर बहस की कोई गुंजाइश भी नहीं है कि अगर देश में अफसर और कर्मचारी सही तरीके से काम कर रहे

होते तो देश कहीं और आगे निकल चुका होता। लेकिन किन्हीं कारणों से अगर ऐसा नहीं हो पाया है

तो यह जरूरी नहीं कि उसी भ्रष्ट व्यवस्था को आगे भी जारी रखा जाए।

विकास के लिए यह अत्यावश्यक है कि जनप्रतिनिधियों के सुझावों को माना जाए

इस गड़बड़ व्यवस्था में विकास कार्यों में प्राथमिकता जनता नहीं बल्कि निजी जेब की कमाई बन चुकी है।

अब रांची में फिर से एक महत्वाकांक्षी परियोजना में फिर से ग्रहण लगाने को आतुर अधिकारी राज्यसभा सांसद

महेश पोद्दार के सुझावों की अनदेखी कर रहे हैं। श्री पोद्दार झारखंड के अकेले ऐसे भाजपा सांसद हैं जो हर गड़बड़ी पर

मुखर रहते हैं। इस वजह से अब सरकार भी यह मानती है कि उनकी द्वारा कही गयी बातों को निराधार मानकर

टरकाया नहीं जा सकता। पूर्व में अनेक अवसरों पर उनके कथन और बाद के घटनाक्रम इसे प्रमाणित करते आये हैं।

सरकारी योजनाओं की गड़बड़ी पर तत्काल टिप्पणी करने वालों में शुमार राज्यसभा सदस्य महेश पोद्दार ने इस बार

हरमू रोड फ्लाईओवर की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है। महेश पोदार ने ट्वीट के माध्यम से कहा कि

उन्होंने मारवाड़ी भवन के पास फ्लाईओवर को सरफेस लेवल में लाने और न्यू मार्केट चौराहे पर रातू रोड फ्लाईओवर

के नीचे क्रॉस करा दिए जाने का सुझाव दिया था।

अगर ऐसा होता तो अतिरिक्त जमीन के लिए माथापच्ची नहीं करनी पड़ती। राज्यसभा सदस्य ने इसी तरह रांची

शहरी क्षेत्र के जलाशयों की दुर्दशा पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आस्था का महापर्व छठ की तैयारी शुरू हुई,

तो रांची में नदियों और तालाबों के साथ किए गए बेतुके प्रयोगों के दुष्परिणाम दिखने लगे।

वक्त है कि गलतियों से सबक लें।

महेश पोद्दार ने पहले ही कई बातों के लिए किया था आगाह

उन्होंने कहा कि अब भी चेतकर कंक्रीट से बचते हुए इन्हें जल संग्रह के लायक बनाएं।

उन्होंने इसी तरह झारखंड की जमीन की ओर भी इशारा किया है। कहा कि प्रतिबंधित भूमि को पारदर्शी तरीके

से ऑनलाइन किया जाए, ताकि रैयतों को किसी तरह की परेशानी न हो। सरकार की नीति इस मामले में स्पष्ट हो,

तो मुकदमों की संख्या भी घटेगी। हरमू फ्लाई ओवर के मामले में श्री पोद्दार ने पहले भी सवाल उठाये थे।

कई स्थानों पर बेहतर सड़क बनाने के नाम पर विशाल फुटपाथ बनाने के औचित्य पर भी उन्होंने सार्वजनिक तौर पर

सरकार से प्रश्न किया था। उनके द्वारा उठाये गये पुराने प्रश्नों को अगर देखें तो हरमू नदी, कई सड़कों पर फुटपाथ,

भेंडर मार्केट, नगर निगम की पार्किंग जैसे ऐसे मसले हैं, जो सीधे सीधे जनता से जुड़े हुए हैं।

इन मुद्दों पर अगर जनप्रतिनिधि के सुझावों की अनदेखी हुई है तो उसके परिणाम भी सबके सामने हैं।

रांची झील यानी बड़ा तालाब को भी विकास के नाम पर बिगाड़ा जा रहा है

कुछ इसी तरह बड़ा तालाब का भी मुद्दा है। वहां चल रहे काम की गुणवत्ता और तालाब को नष्ट किये जाने की कार्रवाई

के विरोध में लोगों ने कल ही धरना भी दिया था। रांची झील बचाओ अभियान समिति के द्वारा रांची झील की

साफ-सफाई एवं सौन्दर्यकरण के नाम पर झील के विनाश करने वाले ठेकेदार के विरुद्ध करवाई की मांग को लेकर

बड़ा तालाब रांची के मुख्य घाट के समक्ष एक दिवसीय उपवास का आयोजन किया गया। बड़ा तालाब सौन्दर्यकरण

के नाम पे ठेकेदार के द्वारा तालाब को बर्बाद कर दिया गया। पूरे तालाब में मिट्टी भर दी गयी।

तालाब से 4-5 फीट पानी निकाल दिया गया। पूरे तालाब जलकुंभी एवं गंदगी का अंबार लगा हुआ है इसके जिम्मेदार

ठेकेदार के ऊपर करवाई की मांग की गयी है। विकास योजनाओं में अधिकारियों को मिली हुई मनमानी करने

की छूट की वजह से ही ऐसी गलत कार्यसंस्कृति पनपती है जो बाद में जी का जंजाल बनती है।

सरकार को चाहिए कि वह जनप्रतिनिधियों के गंभीर सुझावों को न सिर्फ सुने बल्कि उनपर अमल भी करे।



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