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तीसरी लहर में भारत के आम लोगों को उतनी परेशानी नहीं होगी




तीसरी लहर यानी कोरोना की तीसरी लहर आ चुकी है। इस बात पर भी बहस की कोई गुंजाइश नहीं है कि यह आयी नहीं है बल्कि हमने खुद अपनी गैरजिम्मेदाराना आचरण से इसे आमंत्रित किया है। जिन आपातकालीन व्यवस्थाओं को दूसरी लहर के बीत जाने के बाद खत्म कर दिया गया था, उन्हें फिर से स्थापित किया जा रहा है।




फिर भी इस बार की अच्छी बात यह है कि बीमारी के फैलने के पहले से ही आधारभूत संरचना का जबर्दस्त तरीके से विकास हो चुका है। साथ ही भारतवर्ष में कोरोना वैक्सिन का टीकाकरण का दायरा भी बहुत बड़ा हो चुका है। इसलिए विशेषज्ञों के मुताबिक इस लहर के प्रति अगर लोगों ने सावधानी बरती तो यह दूसरी लहर के जितना खतरनाक नहीं होगा।

तीसरी लहर में अधिक खतरा ओमीक्रॉन को लेकर है, जो बच्चों में बहुत अधिक तेजी से फैलता है। वैसे तीसरी लहर के बीच ही दक्षिण अफ्रीका से यह सूचना आ रही है कि वहां इस ओमीक्रॉन की सर्वाधिक खतरा अब बीत चुका है। इस बार लोगों को परेशानी नहीं होने की वजह एफएमसीजी का कारोबार करने वाली कंपनियों की पूर्व तैयारियां हैं।

दूसरी लहर के दौरान लोगों को आम जरूरत की चीजों के लिए जितना परेशान होना पड़ा था, उस बार वैसी बुरी स्थिति तो कतई नहीं होगी। पहली दो लहरों से मिले सबक के साथ-साथ सरकार राज्य की सीमाओं के पार निर्बाध परिवहन की अनुमति दे रही है जिससे खाद्य तेलों से लेकर किराने के सामान और स्नैक्स के लिए माल की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

तीसरी लहर में बाधित नहीं होगी इस बार आपूर्ति चेन

निर्बाध आपूर्ति को लेकर कंपनियों के बढ़ते भरोसे का कारण टीकाकरण की उच्च दर और ओमीक्रोन संक्रमित लोगों में हल्के लक्षण देखा जाना है। कंपनियां भी कोविड मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए खुद को बेहतर तरीके से तैयार कर रही हैं।

खाद्य तेलों सहित डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ बेचने वाली कंपनी अदाणी विल्मर ने अपने गोदामों में स्टॉक भर लिया है और अगर इसके मौजूदा कामगार संक्रमित हो जाते हैं तब कंपनी अधिक ठेका श्रमिकों को तैनात करने के लिए तैयार है।




हालांकि उन्हें इस बात की आशंका है कि अगर वायरस का प्रसार तेजी से होता है तब लॉजिस्टिक्स को लेकर कुछ दिक्कत हो सकती है। उन्होंने कहा, हम निवारक उपाय किए हैं लेकिन ओमीक्रोन डेल्टा स्वरूप की तरह घातक नहीं दिख रहा है।

अदाणी विल्मर के कर्मचारियों और फैक्टरी श्रमिक, सभी को टीका लगाया जा चुका है इसी वजह से स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के गंभीर होने की संभावना कम है। खुदरा क्षेत्र में स्पेंसर्स रिटेल और नेचर्स बास्केट के सीईओ देवेंद्र चावला ने कहा, महामारी की पहली दो लहरों के बाद हमारे पास अब हालात और जमीनी स्तर की चुनौतियों को संभालने का पूरा अनुभव है।

अगर कोई प्रतिबंध लगाया जाता है तो हम इसके लिए अच्छी तरह से तैयार हैं। अगर स्टोर के समय पर प्रतिबंध लगता है तब हम अपने स्टोर से बाहर के कारोबार का दायरा बढ़ाने के लिए तैयार हैं जो पहली दो लहरों के दौरान तेजी से बढ़ी। हम अपने ऐप पर ग्राहकों को बेहतर अनुभव दिया है और हम यह सुनिश्चित करते हैं कि व्हाट्सऐप चैटबॉट ऐप और फोन कॉल के माध्यम से ग्राहकों को उनके घर पर ही किराने का सामान पहुंचाया जा सके।

सभी बड़ी कंपनियों ने दूसरी लहर से सीखा है

भारत के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक अमूल के प्रबंध निदेशक आर एस सोढ़ी को भी कोविड के बढ़ते संक्रमणों के कारण लॉजिस्टिक्स या कारोबार पर असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। इसके अलावा परिवहन चालकों की शीर्ष संस्था भी चिंतित नहीं है।

एआईटीडब्ल्यूए के अध्यक्ष प्रदीप सिंघल कहते हैं, पहली लहर के दौरान हमने कुछ समस्या का सामना किया क्योंकि राज्य की सीमा सील कर दी गई थी। वहीं दूसरी लहर के दौरान सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि आपूर्ति प्रभावित न हो और हमने निर्बाध परिवहन की अनुमति दे दी। ऐसी सभी कंपनियों ने पूर्व के अनुभवों के आधार पर खुद को तीसरी लहर के लिए पहले से ही तैयार कर रखा है।

आशीर्वाद आटा के निर्माता का कहना है, हमारे सभी कर्मचारियों और सेवा प्रदाताओं को पूरी तरह से टीका लगाया जा चुका है। पार्ले ने अपने वितरकों और अपने गोदामों के साथ अपने स्टॉक को दोगुना कर दिया है। हालांकि, अगर कोई प्रतिबंध लगता है या फिर लॉकडाउन की स्थिति बनती है तब भी बिस्कुट कंपनी को किसी भी व्यवधान की आशा नहीं है। डाबर इंडिया स्थिति पर नजर रखे हुए है। ऐसी इकाइयों में तीसरी लहर का खतरा भांपते हुए पहले ही ऑक्सीजन का इंतजाम किया जा चुका है तथा अपने यहां के तमाम लोगों के टीकाकरण पर पहले से ध्यान दिया गया है।



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