fbpx Press "Enter" to skip to content

जनता को भी स्थिति की गंभीरता को समझ लेना चाहिए

जनता को भी अपनी आवश्यकताओं में कटौती करने के तैयार नहीं है। मैं जिस जनता

की बात कर रहा हूं वह भले ही संख्याबल में कम हो लेकिन उनकी हरकतों पर ध्यान

चला ही जाता है। सब्जी बाजार में ऐसे चेहरे कुछ ऐसा आचरण करते हैं मानों हर चीज

(सब्जी) की सिर्फ उन्हें ही जरूरत हो। बात यही समाप्त नहीं होती बल्कि वहां उपलब्ध

श्रेष्ठ सब्जी उन्हें मिले, इसके लिए वे पूरे बाजार की खाक छानते नजर आते हैं। कुछ

लोगों को ऐसा करते देख यह लगता है कि सुबह की सैर बंद होने के बाद वे इसी सब्जी

बाजार में इसी जरूरत को पूरी करने के लिए आये हैं। इस किस्म की जनता को आप

पास के ठेलों पर फलों की खरीद करते भी देख सकते हैं। उन्हें भी बाजार में उपलब्ध

फलों का सबसे अच्छा ही चाहिए। लेकिन ऐसी जनता को अगर आप बता दें कि वह

जरूरत से ज्यादा समय बाहर और बाजार में नष्ट कर रहे हैं तो उन्हें बुरा लग जाता है।

दरअसल इस प्रजाति की जनता को यह गलतफहमी रहती है कि वह दुनिया के सबसे

बुद्धिमान जीव है। इसलिए डाक्टरों और विशेषज्ञों के समझाने के बाद भी उन्हें हर बार

ऐसा लगता है कि वह लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं। वे सरकारी निर्देशों का

पूरी तरह पालन कर रहे हैं। लेकिन सब्जी बाजार मे हर रोज दो घंटे समय काटने का

औचित्य पूछने पर ऐसी जनता को गुस्सा भी आ जाता है। कोरोना संकट की हालत

भारत में अन्य देशों के मुकाबले बेहतर होने बाद भी जो गलतियां हम पहले कर आये हैं,

उसकी कीमत हम चुकाने लगे हैं। अभी देश में कोरोना से अब तक बीस लोग मारे गये हैं

जबकि अभी कोरोना पीड़ितों की संख्या सरकार के मुताबिक 745 है।

जनता को भी अगले चरण के लिए तैयार होना होगा

यह समझ लेना चाहिए कि जो लोग विदेश से कोरोना का संक्रमण लेकर भारत आये थे,

उनके संक्रमण का दौर लगभग समाप्त हो चुका है। इनमें से अधिकांश के कोरोना

पीड़ित होन की पहचान भी हो चुकी है। लेकिन जो जनता को संक्रमित किया गया है,

उनके बीमार पड़ने का सिलसिला अभी जारी रहने वाला है। लॉक डाउन के बाद जो जहां

से वहीं रहे का एक लाभ यह है कि जिन स्थानों पर संक्रमण है, वह दूसरे इलाकों तक

नहीं पहुंचेगा। वरना कौन सा संक्रमित व्यक्ति कहां और कितने लोगों के बीच यह

महामारी फैला चुका है, इसे समझने के लिए अभी वक्त लगेगा। जैसे जैसे देश में

कोरोना पीड़ितों की संख्या बढ़ रही है, वैसे वैसे इससे बचाव और ईलाज का इंतजाम भी

बेहतर होता जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों को अन्य देशों में ली गयी व्यवस्थाओं

का अध्ययन कर उनमें से भारत के लिए उपयुक्त तथ्यों को अमल में लाना चाहिए।

जनता को इस बात को समझ लेना चाहिए कि आज की तारीख में जो 745 लोग कोरोना

से संक्रमित पाये गये हैं, उनलोगों ने भी अपने स्तर पर संक्रमण फैलाया है। उनके

द्वारा फैलाये गये संक्रमण से पीड़ित होने वालों का आंकड़ा अभी आना शेष है। आम

तौर पर इसे शरीर पर पूरी तरह फैलने और अपना प्रभाव दिखाने में 14 दिन का समय

लगता है। तो लॉक डाउन के दिनों में जनता को इस रोगियों की संख्या के बढ़ने पर

लगातार ध्यान बनाये रखना चाहिए। संक्रमण की सूनामी का असर जहां तक पहुंचना

था पहुंच चुका है। जाहिर है कि पूरे देश में हर इलाके में निश्चित तौर पर संक्रमित लोग

नहीं पहुंचे होंगे। जो इलाके संक्रमण से बचे हुए हैं, उन्हें नये सिरे से बीमार करने का

फैसला गलत होगा।

संक्रमण को और आगे फैलने से हर हाल में रोकना होगा

दूसरी तरफ जहां संक्रमण का पता चलता जाता है, वहां ईलाज के साथ साथ आस पास

के लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण से समय रहते जनता को इसके प्रकोप से बचाना ज्यादा

आसान होगा। वैसे यह जनता को तय करना चाहिए कि अपने विदेश दौरे की गलत

जानकारी देने वाले लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई हो। कोरोना संक्रमण का प्रसार होने

के बाद देश में अनेक लोग ऐसे आये हैं, जिन्होंन खुद को अलग थलग रखने के नियम

का पालन नहीं किया है। राजस्थान के अलवर के एक राहुल जी चिकित्सकों की चिंता

को ही गलत ठहराते हुए बाजार का चक्कर काट रहे थे। अब उनके जेल में दिन काटने

की भी नौबत आ रही है। अनेक अभिभावकों ने भी अपने संतान के मोह में निश्चित

नियमों का पालन नहीं कर पूरे समाज को बीमार करने की साजिश में अपनी भागीदारी

निभायी है। एक बार यह संकट निपट जाए तो जनता को अपने अंदर बैठे इस किस्म के

स्वार्थी और गलत तत्वों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई तय करने की पहल करनी

चाहिए  ताकि कोरोना का खतरा नियंत्रित किया जा सके।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

One Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!
Open chat