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पवार परिवार ने रास्ता दिखाया तो ठाकरे परिवार भी आगे बढ़ा

  • उद्धव के शपथ ग्रहण में मौजूद रहे राज ठाकरे
  • महिलाओं ने शरद और अजीत की दूरी पाटी
  • राज ठाकरे पहले भी उद्धव से लगातार मिलते रहे
  • बीमार होने के बाद भागे भागे अस्पताल पहुंचे थे
वी शिवकुमार

मुंबईः पवार परिवार ने राजनीतिक विवाद के बाद भी परिवार को आपस में समेटने का जो रास्ता दिखाया है
उस रास्ते पर अब ठाकरे परिवार भी बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। राजनीतिक तौर पर उद्धव ठाकरे के राजनीतिक
विरोधी समझे जाने वाले राज ठाकरे में शिवाजी पार्क के मैदान में उपस्थित रहकर इसे साबित कर चुके हैं।
वैसे भी पारिवारिक संकट की स्थिति में उद्धव और राज का परिवार तुरंत ही एक जुट नजर आता रहा है।

शरद पवार के परिवार में हाल के दिनों में सबसे बड़ी परेशानी अजीत पवार के खेमा बदल की वजह से आयी थी।

यह तय है कि शरद पवार की तरफ पार्टी का पूर्ण बहुमत होने की वजह से अजीत पवार बिल्कुल अकेले पड़ गये थे।

ऐसे में अगर वह अड़े भी रहते तो शरद पवार की सेहत पर इसका कोई असर नहीं पड़ने वाला था।

लेकिन परिवार के लोगों ने परिवार को एकजुट रखने का बीड़ा उठाया।

अंदरखाने से मिली सूचनाओं के मुताबिक इस काम में परिवार की महिलाओं ने सबसे प्रमुख जिम्मेदारी निभायी।

इसी माध्यम से दोनों परिवार लगातार संपर्क में बने रहे।

यद्यपि इस प्रकरण में सांसद और शरद पवार की पुत्री सुप्रिया सूले का नाम राजनीतिक तौर पर आया।

लेकिन अब सब कुछ ठीक हो जाने के बाद यह पता चल रहा है कि परिवार की अन्य महिलाएं भी इस दूरी को
पाटने के लिए पूरी ताकत से जुटी हुई थी।

इसी वजह से शरद पवार और अजीत पवार की मुलाकात हो पायी और अंततः परिवार के इस राजनीतिक विवाद
का पटाक्षेप हुआ।

पवार परिवार ने पहले खुद को एकजुट किया तो बात आगे बढ़ीउद्धव ठाकरे की ताजपोशी की औपचारिकता शिवाजी पार्क में

दूसरी तरफ बाला साहेब ठाकरे के परिवार में राजनीतिक विवाद होने के बाद भी पारिवारिक रिश्ते कभी भी दूरी
बनाने वाले नहीं रहे। यहां तक कि जब एक बार उद्धव ठाकरे बीमार पड़े थे तो अपना दौरा खत्म कर राज ठाकरे
तुरंत ही मुंबई लौट आये थे। अस्पताल से रिहा होने के बाद राज ठाकरे ही गाड़ी चलाकर उन्हें घर ले गये थे।

इस बार भी लोगों की नजर इस बात पर बनी हुई थी कि आम तौर पर शिवसेना के हर फैसले की आलोचना करने
वाले राज ठाकरे में हाल के दिनों में पूरी तरह चुप्पी साध ली थी। आदित्य ठाकरे के खिलाफ महाराष्ट्र नवनिर्माण
सेना की तरफ से प्रत्याशी खड़ा करने के बाद भी राजनीतिक उठापटक के दौर में राज ठाकरे मौन धारण किये रहे।

अब शपथ ग्रहण समारोह में उनकी मौजूदगी के बाद ऐसा माना जा रहा है कि राजनीतिक विवाद को पारिवारिक
रिश्ते पर हावी नहीं होने देने की प्रथा ठाकरे परिवार के अंदर भी तेज होती जा रही है।

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