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पटना के शवगृह और घाटों पर दाह संस्कार के नाम पर वसूली

पटना : पटना के शवगृहों और घाटों पर भी वही धंधा चालू हो गया है, जिसकी शिकायत

दूसरे इलाकों से मिल रही है। कोरोना से बिहार में त्राहिमाम मचा है। हर दिन सैंकड़ों

परिवार बिखर रहे हैं। लेकिन आपदा की इस घड़ी में जिंदगी से लेकर मौत तक का सौदा

किया जा रहा है। कोविड मरीज को इलाज के लिए ऑक्सीजन, बेड और दवाइयों के लिए

लूटा जा रहा है। वहीं, मौत के बाद भी गिद्धों को संतुष्टि नहीं मिल रही। मौत के बाद

श्मशान घाट तक का सफर तो और भी डरावना है। यहां मृतक के परिजनों को लंबी लाइनों

में सिर्फ इंतजार नहीं करना पड़ रहा है बल्कि मोटी रकम भी चुकानी पड़ रही है। मृतकों के

परिजनों की आम शिकायत है कि श्मशान घाट में हर चीज का रेट फिक्स कर दिया गया

है। पटना के बांस घाट पर शवों के अंतिम संस्कार के लिए रेट फिक्स हैं। यहां दलालों

द्वारा पैकेज बनाया गया है। दलालों के समूह में एंबुलेंस चालक से लेकर अंदर और बाहर

के कई दुकानदार भी शामिल हैं।

पटना के शवगृहों और घाटों पर हर चीज का रेट तय

कोरोना से जंग लड़ने के दौरान ऑक्सीजन और बेड के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी, दवाइयों

के लिए लाइन में खड़ा रहना पड़ा। मरने के बाद भी हालात ज्यादा नहीं बदले। शवों को अब

भी कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। पैसे तो यहां भी चुकाने पड़

रहे हैं। जब बांस घाट की स्थिति का जायजा लिया तो पाया कि जो लोग यहां शवों के

अंत्येष्टि के लिए पहुंचे थे, उन्हें एंबुलेंस से शव निकालने से लेकर जलाने तक के लिए

हजारों रुपए चुकाने पड़ रहे हैं।

श्मशान का रेट रुपये

लकड़ी          10,000

शव और लकड़ी ढ़ोने का 2000

सजाने का 1500

जलाने वाला लेगा 2100

भईया यहां नगर निगम सबको लकड़ी नहीं देता। कहने की बातें हैं। इधर-उधर का चक्कर

लगाते रह जाइयेगा भईया। मैं लकड़ी दिलवा दूंगा। दस हजार रुपये तक लकड़ी लगेगा।

शव और लकड़ी ढ़ोने का 2000, सजाने का 1500 और जलाने वाला लेगा 2100। मुखाग्नि

देगा न कोई। वही तो लाश नहीं जलायेगा। उसको जलाने वाला भी चाहिए न। इसलिए वह

2100 रुपये लेगा।

गुलबी घाट तक सेटिंग है’- दुकानदार दलालों की मिलीभगत

अगर आपको जानकारी नहीं है और गलती से बांस घाट पहुंच गये तो कोई बात नहीं। यहां

के दलाल आपको गुलबी घाट के दलालों का नंबर भी दे देंगे। बांस घाट पर दुकानदार के

रूप में बैठे दलालों का नेटवर्क बहुत तगड़ा है। यहां इतने दलाल मौजूद हैं कि लोग बहुत

परेशान हैं। यहां पर दलाल समूह के दर्जनों लोग मौजूद हैं। जिन्हें पैसे देकर लाइन में लगा

दिया जाता है। जब बांस घाट पर अंतिम संस्कार कराने आये परिजनों से बात की तो पता

चला कि शवदाह गृह में भी जो कर्मी जला रहे हैं, वह भी तीन सौ रुपये ले रहे हैं। अगर

जल्दी जलाना है तो उसके लिए पैरवी चाहिए। कोविड-19 दौर में अस्पताल डॉक्टर से

लेकर श्मशान घाट तक मानव सारे जगह राक्षस बैठे हैं। लाशों की भी बोली लग रही है तब

उनका दाह संस्कार हो रहा है।

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