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मरीज खुद ही अपनी गड़बड़ियों को काबू में रख सकता है







  • सामान्य दिनचर्या से कम हो जाती है मधुमेह के खतरे
  • सरल जीवन मरीज को अनेक खतरों से बचाता है
  • अनियंत्रित सुगर सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है
  • भोजन पद्धति में भी सुधार की जरूरत है रोगियों को
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः मरीज खुद ही अपना ख्याल रख सकें तो उसे बीमारी के अलावा भी कई किस्म की परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है।

मरीज का  तो उसका डाक्टर पर आश्रित होना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है।

खास कर मधुमेह के रोगियों को इसके बारे में काफी सतर्कता बरतनी पड़ती है।

जिन मरीजों का ब्लड सुगर नियंत्रण में नहीं रहता है, उन्हें हर चीज का बार बार ख्याल रखना पड़ता है।

अब वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि डाक्टरों के नियंत्रण में रहने के बदले सामान्य और सरल दिनचर्या में रहकर इस किस्म की परेशानियों से छुटकारा पाया जा सकता है।

यह सर्वविदित है कि सुगर नियंत्रण नहीं रहने की वजह से मधुमेह की परेशानियों को विस्तार मिलता चला जाता है।

इस एक बीमारी की वजह से इंसान को कई अन्य किस्म की परेशानियां होने लगती है।

डाक्टरों की परिभाषा में इस बीमारी को एक साइलेंट किलर माना गया है।

दरअसल इसका असली खतरा इसके नजदीक आते खतरे का कोई पूर्व संकेत नहीं मिलना ही है।

इससे बचाव का एक ही तरीका है कि इंसान अपने खून के अंदर सुगर की मात्रा को नियमित तौर पर नियंत्रित रखे।

अब यह पता चला है कि यह सामान्य और सरल दिनचर्या के किया जाना संभव है।

चिकित्सीय परिभाषा में यह पहले से ही पता है कि इस बीमारी के नियंत्रित नहीं रहने की वजह से कई किस्म की परेशानियां बढ़ती है।

मधुमेह की बीमारी नियंत्रण में नहीं होने की स्थिति में दिल की बीमारी, आंख की परेशानी,

किडनी की गड़बड़ी के अलावा स्नायु तंत्र की कमजोरी के साथ साथ दिमाग पर

प्रतिकूल असर पड़ता है।

कई बार प्रारंभिक गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद जब ईलाज होने लगता है

तभी इसकी परेशानियां अचानक तेजी से उभर जाती है, जिन्हें सही ईलाज के

बगैर नियंत्रण कर पाना कठिन हो जाता है।

मरीज खुद की उपेक्षा कर आमंत्रित करता है बड़ा संकट

दूसरी तरफ जब मधुमेह का मरीज अपनी दिनचर्या को नियंत्रित रखता है तो इस किस्म के खतरे काफी कम हो जाते हैं।

आम लोग भी इस बात से अवगत हैं कि सुगर नियंत्रण में नहीं होने की वजह से आंख की

रेटिनोपैथी, मंसूडों की बीमारी, दिल की धड़कन का बदलना, स्नायु तंत्र को नुकसान

पहुंचा, किडनी की बीमारी, रक्त चाप का बढ़ना और पैरों में दिक्कत  होने लगती है।

इसके अलावा मस्तिष्क की अलजाइमर की बीमारी भी होती है।

जितने अधिक दिनों तक यह बीमारी बनी रहती है, खतरा उतना ही अधिक बढ़ता चला जाता है।

इसलिए अब वैज्ञानिक शोध के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि मरीज खुद को जितना नियंत्रण में रखता है, वह खुद को उतना ही इस किस्म के खतरों से बचाये रखता है।

शोध करने वाले इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि सुगर नियंत्रित नहीं होने की स्थिति में इंसान के पैरों पर इसका असर सबसे पहले दिखने लगता है।

शरीर में रक्त संचालन का सही नहीं होने का पहला प्रमाण पैरों और खासकर इंसान के पैर की अंगुलियों में दिखने लगता है।

नियंत्रण में नहीं होने की स्थिति में अक्सर ही पूरी दुनिया में पैर के इस संक्रमण को रोकने के लिए पैर काटना पड़ता है।

अक्सर ही पैर का एक छोटा सा घाव बढ़ता हुआ विशाल घाव और बाद में गैंगरीन की शक्ल ले लेता है।

जिसके जहर को फैलने से रोकने के लिए पैर काटना पड़ता है।

इसपर पहले से ही नजर रखी जाए तो इस स्थिति को आसानी से टाला जा सकता है।

इसके लिए भी सामान्य और सरल दिनचर्या सबसे अधिक कारगर है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि धुम्रपान और अतिरिक्त शराब का सेवन से यह स्थिति बिगड़ती है

जबकि सामान्य दिनचर्या और नियमित व्यायाम से इसे आसानी से नियंत्रित

किया जा सकता है।

सामान्य जीवन इस परेशानियों को खुद ही दूर करता है

जब मरीज इस दिनचर्या में खुद को ढाल लेता है तो अपने आप ही अनेक खतरे कम होते चले जाते हैं।

इन दोनों से इंसान के शरीर में सुगर की मात्रा अपने आप ही नियंत्रित होने लगती है।

इससे खतरा टल जाता है। विशेषज्ञ यह भी रेखांकित कर चुके हैं कि खाने के तेल,

तेल में तले गये भोजन के बदले सेंका हुआ भोजन, आइसक्रीम के बदले फल

और कम कम समय के अंतराल में कुछ न कुछ भोजन करना इसी सरल दिनचर्या के हिस्से हैं।



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