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संसद का शीतकालीन सत्र खत्म दोनों पक्षों के बीच बना रहा गतिरोध




12 सदस्यों के निलंबन का मुद्दा पूरे सत्र के दौरान मुख्य रूप से छाया रहा
शीतकालीन सत्र 23 दिसम्बर तक निर्धारित था कुल 19 बैठकें होनी थी
दोनों सदनों में 11 विधेयक पारित किये गये और 13 पेश किये गये

नयी दिल्ली : संसद के दोनों सदनों यानी लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किये जाने के साथ ही संसद का शीतकालीन सत्र सत्ता पक्ष और विपक्ष के गतिरोध के बीच ही निर्धारित समय से एक दिन पहले बुधवार को समाप्त हो गया।




पिछले महीने की 29 तारीख को शुरू हुआ शीतकालीन सत्र 23 दिसम्बर तक निर्धारित था और इस दौरान कुल 19 बैठकें होनी थी लेकिन लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा में सभापति एम वेंकैया नायडू ने आज कार्यवाही शुरू होते ही अपने-अपने संक्षिप्त वक्तव्यों के बाद बिना किसी विधायी कामकाज के सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।

केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा के लखीमपुर खीरी प्रकरण में इस्तीफे की मांग तथा राज्यसभा के 12 सदस्यों के निलंबन को वापस लेने का मुद्दा पूरे सत्र के दौरान मुख्य रूप से छाया रहा। इन दोनों मुद्दों के साथ साथ विपक्ष ने कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसे कुछ अन्य मुद्दों को लेकर भी दोनों सदनों में जोरदार हंगामा किया।

सत्र के दौरान दोनों सदनों में 11 विधेयक पारित किये गये और 13 (लोकसभा में 12 तथा राज्यसभा में एक) पेश किये गये। अध्यादेश के स्थान पर लाये गये तीन महत्वपूर्ण विधेयक भी पारित किये गये। साथ ही विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस भी लिया गया।

सरकार ने सत्र के पहले दिन ही तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेने के साथ ही जहां लोकसभा में सकारात्मक शुरूआत की वहीं उसने राज्यसभा में पहले ही दिन विपक्ष के 12 सदस्यों को मानसून सत्र में किये गये उनके आचरण के लिए शीतकालीन सत्र के लिए सदन से निलंबित कर विपक्ष के साथ टकराव मोल ले लिया।

संसद सत्र के समापन के पहले ही डेरेक ओब्रायन का निलंबन

इसके बाद पूरे सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अहम की लड़ाई और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। जहां सत्ता पक्ष निलंबित सदस्यों द्वारा माफी मांगे जाने के अपने रूख पर अड़ा रहा वहीं विपक्ष का कहना था कि सदस्यों ने कोई गैर कानूनी काम नहीं किया है और इसलिए वे माफी नहीं मांगेंगे।

साथ ही उन्होंने श्री मिश्रा के इस्तीफे की मांग जोर शोर से उठाकर सत्ता पक्ष को घेरने की पुरजोर कोशिश की। सत्र के समापन से दो दिन पहले तृणमूल कांग्रेस के सदन में नेता डेरेक ओ ब्रायन को भी निलंबित किये जाने से रही सही कसर भी पूरी हो गयी। इससे दोनों पक्षों के बीच गतिरोध दूर होने की सभी संभावनाएं समाप्त हो गयी।

श्री बिरला और श्री नायडू दोनों ने ही सत्र के दौरान व्यवधान और हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित होने पर निराशा जाहिर की। श्री बिरला ने कहा कि सत्र के दौरान 82 घंटे 48 मिनट का समय व्यर्थ हुआ और कामकाज आशा के अनुरूप नहीं रह पाया।

श्री नायडू ने कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले सदन में कार्यवाही बाधित होने पर चिंता और अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सदस्यों को सामूहिक और व्यक्तिगत रुप से आत्मंिचतन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि 18 बैठकों में कुल उत्पादकता 47.90 प्रतिशत रही है जो क्षमता से बहुत ही कम और पिछले चार वर्षों के दौरान 12 सत्रों में पांचवीं सबसे कम है।

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी विपक्ष के रवैये पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह भाजपा को मिले जनादेश को पचा नहीं पा रहा है।




सत्तापक्ष ने कहा जनादेश को विरोधी पचा नहीं पा रहे

श्री जोशी ने कहा कि विपक्ष की ओर से दोनों सदनों में लगातार हंगामे और शोरगुल से कार्यवाही बाधित हुई । इस दौरान कुल 18 बैठकें हुई और लोकसभा की उत्पादकता 82 फीसदी जबकि राज्यसभा की उत्पादकता लगभग 48 प्रतिशत रही। राज्यसभा में कुल 45 घंटे 34 मिनट कार्यवाही चली जबकि निर्धारित समय 95 घंटे छह मिनट था।

लगातार व्यवधानों और स्थगन के कारण 49 घंटे और 32 मिनट का समय बर्बाद हो गया। इस तरह कुल उपलब्ध समय का 52.05 प्रतिशत समय हंगामें में नष्ट हो गया। प्रश्नकाल का कुल 60.60 प्रतिशत समय बरबाद हुआ। सात बैठकों में प्रश्नकाल नहीं हो सका।

सदन में विधेयकों पर कुल 21 घंटे सात मिनट चर्चा की गयी। शून्यकाल में केवल 30 प्रतिशत समय का सदुपयोग हुआ और इस दौरान केवल 82 मुद्दें उठाये जा सके। इस दौरान सदस्यों ने 64 मुद्दों को विशेष उल्लेख के जरिए सदन में रखा।

शीतकालीन सत्र के दौरान पारित किये गये महत्वपूर्ण विधेयकों में कृषि विधि निरसन विधेयक 2021, राष्ट्रीय औषध शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2021, केन्द्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) विधेयक 2021, दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन विधेयक (संशोधन) 2021 और निर्वाचन विधि (संशोधन) विधेयक, 2021 शामिल हैं। चालू वित्त वर्ष के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों को भी लोकसभा में पारित किया गया।

लोकसभा में देश में ‘कोविड-19 वैश्विक महामारी’ और ‘जलवायु परिवर्तन’ के संबंध में दो तथा राज्यसभा में ओमिक्रोन से उत्पन्न स्थिति पर अल्पकालिक चर्चा की गईं। लोकसभा में महंगाई के मुद्दे पर चर्चा होनी थी लेकिन यह नहीं हो सकी।

राज्यसभा में कांग्रेस सदस्यों का शोरगुल

नयी दिल्ली : कांग्रेस के सदस्यों ने बुधवार को राज्यसभा में एक अखबार में छपी खबर को लेकर शोरगुल किया। बाद में सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी। सुबह आवश्यक दस्तावेज सदन पटल पर रखे जाने के बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि एक अखबार में छपी खबर को लेकर उन्होंने नोटिस दिया है।

यह बहुत महत्वपूर्ण अखबार है। इस दौरान कांग्रेस के सदस्य अपनी सीट के निकट खड़े थे। सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि अखबार में छपी खबर को सदन में पढ़ा नहीं जा सकता है। श्री खड़गे ने कहा कि वह अपना नोट पढ़ना चाहते हैं। सभापति ने कहा कि आज शीतकालीन सत्र समाप्त हो रहा है। यह सुखद नहीं रहा ।

सदन के कामकाज को लेकर निराशाजनक खबरें छपी है। सदन में जो कुछ भी हुआ है वह ठीक नहीं है। उन्होंने सदस्यों को क्रिसमस, नये वर्ष और पोंगल की शुभकामनाएं दी और इसके बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की।

राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

नयी दिल्ली : राज्यसभा की कार्यवाही को बुधवार को निर्धारित समय से एक दिन पहले अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। शीतकालीन सत्र 23 दिसंबर तक निर्धारित था लेकिन इस पूरे सत्र में एक भी दिन सुचारू तरीके से कामकाज नहीं हो सका।

विपक्ष के 12 सदस्यों को निलम्बित किए जाने का विपक्ष विरोध करता रहा। इस दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को मंत्रिमंडल से हटाए जाने की मांग को लेकर भी विपक्ष हंगामा करता रहा जिसके कारण पूरा सत्र बाधित रहा। तृणमूल कांग्रेस के सदन में नेता डेरेक ओ ब्रायन को कल सभापति के आसान की ओर रूल बुक फेकने पर सत्र की शेष अवधि के लिए निलम्बित कर दिया गया था।



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