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पार्कर सोलर प्रोव ने सूर्य का सबसे करीब का अपना चक्कर पूरा किया




यान एक घंटे में धरती से चांद तक पहुंचने की गति पर है

सबसे तेज गति का अपना रिकार्ड तोड़ा इसने

सूर्य के सबसे करीब जाने वाला यान भी बना

उसका हीट शील्ड अब तक सही काम कर रहा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः पार्कर सोलर प्रोव ने सूर्य का अपना दसवां चक्कर पूरा कर लिया है। लेकिन इस बार यह सूर्य से उसकी सबसे करीब का चक्कर रहा है। पूर्व निर्धारित दिशा के आधार पर यह अंतरिक्ष यान ईंधन बचाते हुए सौरमंडल के अलग अलग धुरियों पर चक्कर काटता हुआ आगे बढ़ रहा है।




इस यात्रा के तहत अब यह यान इतनी अधिक तेज गति प्राप्त कर चुका है कि वह धरती से चांद तक की दूरी को मात्र एक घंटे में पूरा कर चुका है। वर्तमान में नासा का यह यान 364660 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहा है।

इसी वजह से वह धरती से चांद की दूरी मात्र एक घंटे में तय कर सकता है। पार्कर सोलर प्रोव के नियंत्रण कक्ष के मुताबिक यान अब तक पूरी तरह ठीक हालत में है। इस दौरान उसके ताप सहन करने की क्षमता की भी असली परख हो रही है क्योंकि अब यह सूर्य से जितना करीब हैं वहां का तापमान बहुत अधिक है।

इस यान ने सूर्य के करीबी चक्कर काटने का काम गत 16 नवंबर को प्रारंभ किया था और उसका यह काम 26 नवंबर को पूरा हो गया है। इस दौरान वह सूर्य से सबसे करीब 21 नवंबर को रहा। इस दौरान वह सूर्य से करीब 15 मिलियन मील की दूरी पर था,

जहां का तापमान कई हजार गुणा अधिक है। दरअसल वैज्ञानिकों ने इस इलाका तक पहुंचने के बाद तापमान की समस्या पर पहले ही विचार किया था।

इसी वजह से यान में ताप रोधक शील्ड लगाये गये हैं। यान से मिल रहे संकेतों के मुताबिक यह हिट शील्ड अब तक सही काम कर रहे हैं, जिसकी वजह से यान के अंदर के उपकरण ताप से नष्ट होने से बचे हुए है।

पार्कर सोलर प्रोव में खास हीट शील्ड लगाये गये हैं

नासा के वैज्ञानिक थॉमस जुरबुचेन ने कहा कि इस यान के सूर्य के इतने करीब पहुंचने से हैलियोस का पूर्व रिकार्ड टूट गया है। वर्ष 1976 में हैलियोस बी सूर्य के सबसे करीब पहुंचने वाला यान बना था।

इस यान की दूसरी विशेषता यह है कि जब कभी इसका सीधा संपर्क नियंत्रण कक्ष से टूट जाता है तो यह सारे आंकड़ों को अपने पास सुरक्षित रख लेता है।




दोबारा नियंत्रण कक्ष से संपर्क होने पर वह सारे आंकड़े भेजकर फिर से अपने आंकड़ों का भार कम कर फिर से नये आंकड़े संग्रहित करने का स्थान बना लेता है। इसलिए कई बार बीच बीच में यान से आंकड़ा मिलने में देर भी होती है। ऐसा तब होता है जब यह यान पृथ्वी के सीधे संपर्क के दायरे से बाहर चला जाता है।

इस बार पार्कर सोलर प्रोव ने सूर्य के अपने निर्धारित शोध के अलावा वहां के तापमान और सौर आंधी की स्थितियों के बारे में भी सूचनाएं भेजी हैं, जिनका फिलहाल विश्लेषण किया जा रहा है। इस यान पर नजर रखने वाले नियंत्रण कक्ष को हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के एप्लाइड फिजिक्स लैब में रखा गया है।

जहां से यह बताया गया है कि यान ने अपने संकेत में अंग्रेजी का ए शब्द भेजा है। इसका वैज्ञानिक अर्थ यान के सभी चार संकेत सही काम कर रहे हैं और यान सही सलामत स्थिति में है। इस बीच गत 5 नवंबर को यान की सर्वोच्च गति 213200 मील प्रति घंटे की दर्ज की गयी थी।

सौर आंधी के भी आंकड़े दर्ज कर रहा है यान

यान को तैयार करते वक्त ही उसपर लगाये गये हीट शील्ड को वैज्ञानिकों ने इस तरीके से डिजाइन किया था कि वह सूर्य के करीब का यह ताप सहन कर सके। इस हीट शील्ड के बिना यान के अंदर रखे यंत्र बेकार हो जाएंगे।

अब तक के आंकड़ों के मुताबिक पार्कर सोलर प्रोव का सारे उपकरण सही काम कर रहे हैं। इससे इस ताप रोधी व्यवस्था के कारगर होने का भी पता चलता है। यान का जो हिस्सा सूर्य की तरफ होता है वहां का तापमान अत्यंत तेज होता है।

माना गया है कि यान के सूर्य के और करीब जाने की स्थिति में वह ढाई हजार फारेनहाइट की गर्मी भी झेलेगा।

यान से मिल रहे संकेत के मुताबिक यान के अंदर का तापमान 80 डिग्री ही बना हुआ है। इससे ताप रोधी व्यवस्था के अब तक सक्रिय और कारगर होने की पुष्टि होती है।



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