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अभिभावकों की शिकायत है कि स्कूल प्रबंधन की तरफ से दबाव

  • निजी स्कूलों पर फीस का मामला उच्च न्यायालय में
  •  पहले से चला आ रहा है इसपर विवाद
  •  मंत्री का एलान और आदेश में अंतर था
  •  महाधिवक्ता ने जबाव के लिए समय मांगा
राष्ट्रीय खबर

रांची: अभिभावकों की जिस बात को लेकर शिकायत थी, वही निजी स्कूलों की फीस का

मामला अब फिर से झारखंड उच्च न्यायालय के चौखट तक जा पहुंचा है। इस मुद्दे पर

राज्य के मानव संसाधन विकास मंत्री के सार्वजनिक एलान और बाद के सरकारी आदेश

को लेकर भी काफी विवाद हुआ था। भाजपा सहित कई विरोधी दलों एवं अन्य संगठनों ने

इस मुद्दे पर सरकारी रवैये की काफी आलोचना भी की थी। इसी मुद्दे पर रांची सहित कई

अन्य शहरों में अभिभावकों के संगठनों की तरफ से विरोध प्रदर्शन भी किया गया था। अब

अदालत की तरफ से यह सूचना आयी है कि झारखंड हाई कोर्ट में मंगलवार को राज्य

सरकार का आदेश निजी स्कूल सिर्फ ट्यूशन फीस ही लेंगे के खिलाफ दाखिल याचिका पर

सुनवाई हुई थी। इस सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन ने जवाब दाखिल करने

के लिए अदालत से समय मांगा है। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले में सरकार को जवाब

दाखिल करने का आदेश देते हुए अगली सुनवाई 8 दिसंबर को निर्धारित की है।

अभिभावकों की संगठनों की तरफ से विरोध प्रदर्शन भी किया गया

यह मामला जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थी। इस संबंध

में झारखंड अन एडेड स्कूल एसोसिएशन की ओर से याचिका दाखिल की गई है। स्कूल

एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार के आदेश के बाद

कई अभिभावक स्कूल फीस जमा नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण स्कूलों की आर्थिक स्थिति

बदतर हो गई है। फीस नहीं मिलने की वजह से शिक्षक व स्टाफ को वेतन नहीं दे पा रहे हैं।

दूसरी तरफ यह सामाजिक बहस का मुद्दा बना हुआ है कि कोरोना का आर्थिक संकट लोगों

की अपनी जिंदगी पर भी पड़ा है। इस दौरान आर्थिक तंगी झेल रहे हर परिवार पर नये सिरे

से स्कूल फीस के लिए दबाव बनाना नये किस्म का मानसिक तनाव देने जैसी स्थिति है।

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