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पैंगोलिन जीव से चीन के वुहान में फैला कोरोना वायरस

  • इस जीव में वायरस के लक्षण पाये गये हैं

  • एक हजार जंगली जानवरों का परीक्षण हुआ

  • पांच लाख लोग आ चुके हैं इसकी चपेट में

  • चीन के वैज्ञानिकों ने शोध कर जारी की रिपोर्ट

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः पैंगोलिन जीव की वजह से ही चीन के वूहान शहर में घातक

रोग फैला है। अब तक करीब एक हजार लोग इसकी चपेट में आकर

मारे जा चुके हैं। चीन के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के प्रसार के मुद्दे

पर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट में इस महामारी

के फैलने के लिए पैंगोलिन नामक एक जीव को जिम्मेदार ठहराया

गया है। रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि इस जानवर के संपर्क में

आने वाले लोगों के माध्यम से ही यह घातक रोग पूरे इलाके में फैला

इसके बाद एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक इसका संक्रमण और

प्रसारित हुआ।

वूहान के समुद्री जीव बाजार से इस बीमारी के फैलने की चर्चा पहले से

ही हो रही थी। लोग पहले से ही इस बात के लिए इस बाजार में बिकने

वाले जंगली जानवरों के मांस को जिम्मेदार ठहरा चुके थे। इन तमाम

शिकायतों के बीच चीन के वैज्ञानिकों ने क्रमवार तरीके से उन सभी

प्राणियों की जांच की। दक्षिण चीन के कृषि विश्वविद्यालय के

वैज्ञानिकों ने इस पर काम किया है। इन वैज्ञानिकों ने वहां के बाजार में

बिकने वाले एक हजार किस्म के जंगली जानवरों के नमूने एकत्रित

किये। इन तमाम नमूनों की एक एक कर जांच कर दी गयी है। चीन के

वैज्ञानिकों ने इनका गहन विश्लेषण करने के बाद पैंगोलिन को ही इस

बीमारी के फैलने का कारण माना है। शोध के दायरे में आये तमाम

जानवरों के जिनोम की जांच से ही इस बात की पुष्टि हुई है। इसी

जिनोम जांच से इस बात की पुष्टि हुई है कि पैंगोलिन में इस कोरोना

वायरस के वे लक्षण पाये गये हैं, जो इस बीमारी से पीड़ित  मरीजों में

मौजूद हैं।

पैंगोलिन जीव की जांच में पाये गये हैं वायरस के अंश

चीन के बाजार में ऐसे बिकता था पैंगोलिन का मांस

इसी वजह से यह माना जा रहा है कि शायद इसी पैंगोलिन का मांस

आने की वजह से ही वूहान के समुद्री जीव बाजार से यह संक्रमण

भयानक तरीके से फैल गया है। वायरस के सारे लक्षणों की पुष्टि होने

के बाद ही यह माना जा रहा है कि इसी जानवर की वजह से यह बीमारी

पूरे शहर में फैली है। संदेह है कि इसका मांस खाने वाले इसकी चपेट में

सबसे पहले आये थे। बाद में अन्य लोगों तक यह संक्रमण तेजी से

फैलता चला गया है। मैकमास्टर विश्वविद्यालय के कोरोना वायरस

विशेषज्ञ अरिंजय बनर्जी ने कहा कि पैंगोलिन में वायरस के अंश पाये

जाने के बाद यह जांचना और भी जरूरी हो गया है कि इस जानवर से

यह वायरस किस तरीके से फैल रहा है। इसके लिए जानवर के खून के

अंश और मल की जांच जरूरी है। ताकि पता चल सके कि यह वायरस

दूसरे माध्यमों तक किस रास्ते से हमला कर रही है। इसका पता चल

जाने के बाद बीमारी की रोकथाम का बेहतर उपाय किया जा सकेगा।

अभी तो यह चुनौती है कि इस बीमारी को और अधिक फैलने से कैसे

रोका जाए क्योंकि संपर्क में आने के माध्यम से इस कोरोना वायरस से

पीड़ित रोग अब पूरी दुनिया में फैल चुके हैं। इन वायरस प्रभावित लोगों

ने कितने और लोगों को संक्रमित किया है, इसका पता तो बाद में ही

चल पायेगा।

शायद पांच लाख लोग इसकी चपेट में आये हैं

ऐसा मांसाहारी भोजन खाकर संक्रमित हुए हैं लोग

दूसरी तरफ यह संदेह व्यक्ति किया जा रहा है कि वूहान शहर में इस

बीमारी से करीब पांच लाख लोग पीड़ित हैं। अनेक लोगों में बीमारी के

लक्षण अभी सामने नहीं आये हैं। लेकिन जिस तेजी से यह संक्रमण

फैला है, उससे रोग पीड़ितों के आगे आने का सिलसिला आगे भी जारी

रहने की आशंका है। अब तक वहां मरने वालों की संख्या एक हजार के

करीब पहुंच रही है, जो सार्स से मरने वालों के आंकड़ों से अधिक है।

आरोप है कि इस  बीमारी का पिछले साल ही पता चलने के तुरंत बाद

इसकी रोकथाम के पर्याप्त प्रयास चीन की सरकार द्वारा नहीं किये

गये थे। इस बीमारी के प्रसार और संक्रमण के तौर तरीकों के आधार

पर दुनिया के कई वैज्ञानिक प्रतिष्ठान काम कर रहे हैं। सभी का

मानना है कि बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या में अभी और ईजाफा

होगा। यह मध्य फरवरी के बाद विस्फोट की स्थिति में आयेगा और

उसके बाद इस कोरोना वायरस के भयावह असर का असली परिणाम

सामने आयेगा

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