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महामारी की चुनौती ने स्वास्थ्य सेवा में सुधार किया




महामारी की चुनौती से भारतवर्ष दो वर्ष से अधिक समय से मुकाबला करता आ रहा है। पहली बार इसका पता चलने के बाद देश में मास्क और सैनिटाईजर तक ही हमारी तैयारी थी। लेकिन कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने भारतवर्ष को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि दरअसल हमारी स्वास्थ्य सेवाओं की क्या कमजोरी है।




अब कमसे कम यह बात कहा जा सकता है कि देश के हर जिला में ऑक्सीजन की उपलब्धता पर्याप्त है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में ओमीक्रॉन संक्रमण की तैयारियों के संबंध में कहा है कि इस बार दिल्ली में कमसे कम ऑक्सीजन की वैसी किल्लत नहीं होगी, जैसी की महामारी की दूसरी लहर के दौरान महसूस की गयी थी।

दूसरे शब्दों में कहें तो बीते साल में भारत के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की परीक्षा हुई है। इसमें न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की कमी बल्कि उन्हें पहुंचाने की प्रणाली की कमजोरी भी उजागर हुई है। मई और जून 2021 में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर से उजागर हुआ कि अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की बढ़ती तादाद और यहां तक कि गंभीर स्थिति वाले मरीजों को बुनियादी ऑक्सीजन मुहैया कराने में भी देश की तैयारी कितनी कमजोर थी।

अब भारत की तैयारी काफी बेहतर है। पब्ल्कि हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के श्रीनाथ रेड्डी ने कहा, हमें तेज प्रसार से बचने के लिए हर संभव कदम उठाने होंगे। अब लोग मानते हैं कि स्वास्थ्य में निवेश महत्त्वपूर्ण है लेकिन इस दिशा में और प्रयास किए जाने चाहिए। इस महामारी का दुनिया भर में कहर जारी है। ओमीक्रोन स्वरूप का तेजी से प्रसार नई चिंता है। ऐसे में अब टीका विनिर्माता कोविड-19 के उपचारों के अलावा इन स्वरूपों पर कारगर टीके विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं।

महामारी ने प्राथमिक स्वास्थ्य में सुधार तो किया

महामारी को लेकर अनिश्चितता के बावजूद स्वास्थ्य को लेकर चर्चा बदल रही है। महामारी ने दुनिया भर में आपूर्ति श्रृंखला की अहम कमजोरियां उजागर की हैं और दवा एवं स्वास्थ्य क्षेत्रों को अपनी रणनीति बदलने को मजबूर किया है। अब भारत में 2022 और उससे आगे स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के नए मॉडल उभरेंगे, जो डिजिटलीकरण के लाभ लेकर एक लचीली मूल्य श्रृंखला पर बनेंगे।

उद्योग के बहुत से लोगों का अनुमान है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में अहम निवेश आएगा क्योंकि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उपभोक्ता मांग बढ़ी है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात से चिंतित हैं कि स्वास्थ्य, खास तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य पर निवेश आर्थिक वृद्धि और अगले साल अहम राज्यों में चुनावों के मद्देनजर सरकारों संसाधनों के खर्च पर निर्भर करती है।




इसलिए सरकार जिला अस्पताल, प्रयोगशाला बनाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) से 1.5 अरब डॉलर का ऋण लेकर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है।
हाल के राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमानों के मुताबिक भारत में स्वास्थ्य पर जेब से खर्च 2013-14 में 2,336 रुपये से घटकर 2017-18 में 2,097 रुपये पर आ गया। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह आंकड़ा महामारी के वर्ष में काफी बढ़ा होगा और महामारी खत्म होने के फिलहाल कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं, इसलिए आगे भी बढ़ोतरी जारी रह सकती है।

सरकार ने विनाशकारी दूसरी लहर के बाद देश में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और आईसीयू बेड की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया है। लेकिन 2022 में गृह उपचार और प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली पर और ध्यान देने की जरूरत हो सकती है, खास तौर पर अर्ध शहरी और ग्रामीण इलाकों में।

अब कमसे कम ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी

रेड्डी ने कहा, निगरानी प्रणाली और आपात परिवहन प्रणाली को मजबूत करना होगा। जिला अस्पतालों को इन चीजों पर कदम उठाने चाहिए और तेजी से काम करना चाहिए। अगर टीकाकरण के लक्ष्य हासिल हो जाते हैं और ओमीक्रोन का खतरा टल जाता है तो स्वास्थ्य क्षेत्र अन्य स्वास्थ्य समस्याओं पर ध्यान देने की उम्मीद कर रहा है।

बीमारियों की रोकथाम और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने को लेकर बढ़ी जागरूकता, स्वच्छता एवं शारीरिक दूरी और स्वास्थ्य सेवाएं हासिल करने या पहुंचाने में डिजिटल तकनीक को अपनाने में दिलचस्पी आगामी वर्षों में भी बनी रहेगी।

भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र पर पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी से स्वास्थ्य खंड में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है क्योंकि कंपनियां चिकित्सा सेवा देने के वैकल्पिक तरीके और बीमारी प्रबंधन का बेहतर ज्ञान खोज रही हैं। इसलिए महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि डिजिटल स्वास्थ्य का भारत में उज्ज्वल भविष्य है और हमारा अनुमान है कि आगामी तीन से पांच साल में डिजिटल तकनीक आधारित सेवाओं में आशातीत बढ़ोतरी होगी। हमें एआई आधरित ज्यादा स्टार्टअप नजर आएंगी, जिनसे स्वास्थ्य सेवाएं हासिल करना ज्यादा आसान हो जाएगा।



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3 Comments

  1. […] केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से आज जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में एक लाख 94 हजार 720 नये मामले सामने आने से संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर तीन करोड़ 60 लाख 70 हजार 510 हो गयी है। नये मामलों में बढ़ोतरी के साथ सक्रिय मामले बढ़कर नौ लाख 55 हजार 319 हो गये हैं। […]

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