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राजा भगीरथ के नक्शेकदम पर पलामू सांसद बीडी राम

  • पौराणिक कथा  यथार्थ में तब्दील होती नजर आयी गढ़वा और पलामू में

  • किसी नेता ने पहले नहीं किया था ऐसा निरंतर प्रयास

  • सिंचाई और पीने का पानी भी मिलेगा योजना से

  • सोन नदी से पानी लाने का सपना पूरा हो रहा

धीरेन्द्र चौबे

बंशीधरनगरः राजा भगीरथ के नाम से ही भगीरथ प्रयास कहावत का जन्म हुआ है। 

शास्त्रों के अनुसार इक्ष्वाकु वंश के राजा सगर के साठ हजार पुत्र थे। अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े

को खोजने के क्रम में राजा सगर के सभी साठ हजार पुत्र महान तपस्वी कपिल मुनि का

अपमान करने के कारण उनकी क्रोधाग्नि से भस्म हो गये थे। उसी वंश में जन्में राजा

भगीरथ ने अपने पुरखों यानी राजा सगर के साठ हजार पुत्रों के उद्धार के लिये कठोर तप

किया। वे ब्रह्मा से वरदान प्राप्त कर पतित पावनी मां गंगा को धरती पर लाने में सफल

हुये। जिससे उनके पुरखों का उद्धार हुआ। यह बात त्रेतायुग की है। अब हम बात कलियुग

की करने जा रहे हैं। इस युग में प्रकृति और वक्त की क्रोधाग्नि से पलामू और गढ़वा जिले

के असंख्य लोग भस्म हुये हैं। उन भस्म पुरखों के उद्धार के बजाय लोगों ने सिर्फ अपनी

राजनीति चमकाई। राजनेताओं ने कनहर को धरती पर लाने और पुरखों का उद्धार करने

की झूठी कसमें खाई। सत्ता के शिखर तक पहुंच गये लेकिन कोई राजनेता कनहर का एक

बूंद पानी धरती पर लाने में सफल नहीं हो सका। मतलब कोई राजनेता अपने पुरखों की

दग्ध और तप्त आत्मा को शांति नहीं दे पाया। समय बदला एक गरीब परिवार में जन्में

विष्णु दयाल राम को जब प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला तो उन्होंने लेबर डिस्ट्रिक्ट

के रूप में पहचाने जाने वाले पलामू और गढ़वा से बेरोजगारी और पलायन से मुक्ति

दिलाने की युक्ति को तलाशना शुरू किया। उन्हें लगा कि पलामू और गढ़वा सोन, कनहर,

कोयल, अमानत जैसी कई बड़ी और सदाबह समेत कई छोटी अन्य नदियां भी हैं। उन्होंने

युक्ति निकाली कि पलामू और गढ़वा दोनों जिले के खेतों में और घरों तक पानी पहुंचाकर

ही यहां समृद्धि और खुशहाली लायी जा सकती है।

राजा भगीरथ की तरह पलामू गढ़वा को शाप से मुक्ति की कोशिश

बेरोजगारी और पलायन को रोका जा सकता है। उन्होंने भारत सरकार से सोन और कनहर

नदी से पाईपलाईन के जरिये खेतों तक और घरों तक पानी पहुंचाने की दिशा में कार्य

योजना तैयार कर उसे धरातल पर उतारने की मांग की। उन्होंने जब इस दिशा में कदम

बढ़ाया था तब लोगों को इस बात कि आशंका थी कि क्या ऐसा इस क्षेत्र में भी संभव हो

सकेगा। क्योंकि लोग झूठे आश्वासन सुनकर थक चुके थे। लोग सोच रहे थे कि सांसद

विष्णु दयाल राम भी कनहर परियोजना जैसा ही सोन और कनहर नदी से पाईपलाईन के

जरिये खेतों और घरों तक पानी पहुंचाने का भोंपू बजायेंगे और अपनी राजनीति

चमकायेंगे। लेकिन अब यह मिथक लगता है कि टूटने वाला है। सांसद विष्णु दयाल राम

अपने भगीरथ प्रयास से अपने ड्रीम प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने में कामयाब होते

दिखाई दे रहे हैं। 

इस परियोजना के फर्स्ट फेज में हरिहरपुर के दारीदह में सोन नदी से पाईपलाईन का काम

शुरू होने वाला है। अनुमान है कि सब कुछ ठीकठाक रहा तो दो से तीन साल में खेतों में

सिंचाई की समस्या से निजात मिल जायेगा। सेकेंड फेज में रंका भवरी में कनहर नदी से

और थर्ड फेज में भंडरिया के उरगा में कनहर नदी से पाईपलाईन का काम शुरू होगा। तीनों

फेज का काम पूर्ण होने पर संपूर्ण गढ़वा जिला और पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड के लोगों

को सिंचाई और पीने के पानी की समस्या से मुक्ति मिल जायेगी।

सार्थक पहल होता तो यह पहले हो जाता

नदियों से पाईपलाईन के जरिये पानी को लिफ्ट किये जाने की योजना को नई तकनीक

नहीं है। यह बहुत पुरानी तकनीक है। पड़ोसी राज्य यूपी के सोनभद्र और बिहार के रोहतास

में नदी का पानी लिफ्ट कर जलाशयों तक पहुंचाया गया है। लगभग चार दशक पूर्व

सोनभद्र जिले के चोपन में सोन नदी से पानी लिफ्ट कर कई जलाशयों में ले जाया गया है।

जिससे पूरा सोनभद्र जिला आबाद है। तीन चार दशक पूर्व बिहार के रोहतास में भी नदी से

पानी लिफ्ट कर कई जलाशयों में ले जाया गया है। जिससे शाहाबाद का इलाका आबाद है।

आज पलामू और गढ़वा के सस्ते लेबर सोनभद्र और रोहतास में धान रोपनी और कटनी

करने जाते हैं। ऐसा नहीं है कि पलामू और गढ़वा के पास विकल्प नहीं था। लेकिन

राजनीतिक इच्छा शक्ति कमजोर और राजनीतिक महत्वाकांक्षा मजबूत होने के कारण

पलामू और गढ़वा पिछड़ा और लेबर डिस्टिक्ट के रूप में जाना जाता रहा। जो राजनेता

सत्ता के शिखर पर पहुंचे वे जनता और जनसमस्याओं को भूल गये। अपने बाद अपनी

दूसरी पीढ़ी को राजनीति में स्थापित करने में जुटे रहे। वक्त बदला, जनता देर सबेर

हकीकत को समझ गई। अंत में सियासत में विरासत को आगे बढ़ाने वाले सभी राजनेता

वक्त की मार से आज कराह रहे हैं। वैसे राजनेताओं को न तो खुदा मिला न बिसाले

सनम।

पलामू के नेताओं को सांसद से सीख लेनी चाहिये

सांसद विष्णु दयाल राम पुलिस अधिकारी रहे हैं। वे तीन दशक से भी अधिक समय तक

पुलिस की डयूटी और अनुशासन से बंधे रहे हैं। रिटायर होने के बाद राजनीति में हाथ

आजमा रहे हैं। लगातार दो बार निर्वाचित हुये हैं। फिर भी सहज और सरल हैं, स्व

अनुशासित भी। किसी दूसरे के किये काम को तो छोड़ दीजिये वे अपने किये काम का भी

श्रेय नहीं लेते। आलोचना और आरोप प्रत्यारोप से उन्हें परहेज है। गत बुधवार को दारीदह

में सोन नदी से पाईपलाईन योजना का निरीक्षण करने पहुंचे सांसद विष्णु दयाल राम ने

बहुत बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि मुझे राजनीति की बात नहीं करनी है। किसानों के

खेतों और सभी के घरों तक पानी पहुंचाना है। जब खेतों तक पानी पहुंचेगा तब बेरोजगारी

और पलायन जैसे गंभीर समस्या से क्षेत्र को मुक्ति मिलेगी। कृषि आधारित रोजगार की

अधिकता होगी। काश पलामू के सभी जनप्रतिनिधि इस तरह की सोच रखते।

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