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पाकिस्तान की विशेष अदालत ने मुशर्रफ को दी सजा ए मौत

  • फैसले का विस्तृत विवरण अगले 48 घंटे में जारी होगा
  • देशद्रोह का मामला दिसंबर 2013 में दर्ज किया गया था
  • अस्वस्थ मुशर्रफ संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर में हैं

पेशावर : पाकिस्तान की विशेष अदालत ने पूर्व सैन्य तानाशाह एवं पूर्व राष्ट्रपति परवेज

मुशर्रफ को देशद्रोह के मामले में मंगलवार को फांसी की सजा सुनायी। पेशावर उच्च

न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वकार अहमद सेट की अगुवायी वाली विशेष अदालत की

तीन सदस्यीय पीठ ने पूर्व सैन्य तानाशाह को 2-1 के मत से सजा-ए-मौत की सजा

सुनायी। इस मामले में फैसले का विस्तृत विवरण 48 घंटे में जारी किया जाएगा।

अस्वस्थ चल रहे पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर में

हैं। मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह का मामला दिसंबर 2013 से ही लंबित था। पूर्व सैन्य

तानाशाह पर देश में तीन नवंबर 2007 से आपातकाल लागू करने का आरोप था। मुशर्रफ

के खिलाफ देशद्रोह का मामला दिसंबर 2013 में दर्ज किया गया था जबकि 31 मार्च 2014

को उन्हें दोषी ठहराया गया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष सारे सबूत उसी वर्ष

सितंबर में रख दिए थे ।

मुशर्रफ के मामले की सुनवाई काफी धीमी गति से होती रही और इसी बीच मार्च 2016 में

वह पाकिस्तान छोड़ विदेश में जा बसे। मामले की सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने 19

नवंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। उस समय अदालत ने तमाम सबूतों के

आधार पर अपना फैसला सुनाने के लिए 28 नवंबर की तारिख मुकर्रर की थी । पीठ में

न्यायाधीश सेट के अलावा सिंध उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नजर अकबर और लाहौर

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शाहिद करीम शामिल थे। फैसले वाले दिन से एक-दो दिन

पहले इमरान खान नीत पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सरकार ने इस्लामाबाद उच्च

न्यायालय में याचिका दायर कर मुशर्रफ मामले में विशेष अदालत के अंतिम फैसले को

रोकने का अनुरोध किया। इसके बाद 27 नवंबर को न्यायालय ने विशेष अदालत के फैसले

पर रोक लगा दी थी।

पाकिस्तान की विशेष अदालत के फैसले पर रोक लगी थी

मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह का मामला दिसंबर 2013 से ही लंबित था। पूर्व सैन्य तानाशाह

पर देश में तीन नवंबर 2007 से आपातकाल लागू करने का आरोप था। मुशर्रफ के खिलाफ

देशद्रोह का मामला दिसंबर 2013 में दर्ज किया गया था जबकि 31 मार्च 2014 को उन्हें

दोषी ठहराया गया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष सारे सबूत उसी वर्ष सितंबर

में रख दिए थे । मुशर्रफ के मामले की सुनवाई काफी धीमी गति से होती रही और इसी

बीच मार्च 2016 में वह पाकिस्तान छोड़ विदेश में जा बसे।

मामले की सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने 19 नवंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख

लिया था। उस समय अदालत ने तमाम सबूतों के आधार पर अपना फैसला सुनाने के लिए

28 नवंबर की तारिख मुकर्रर की थी । पीठ में न्यायाधीश सेट के अलावा सिंध उच्च

न्यायालय के न्यायाधीश नजर अकबर और लाहौर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शाहिद

करीम शामिल थे। फैसले वाले दिन से एक-दो दिन पहले इमरान खान नीत पाकिस्तान

तहरीक-ए-इंसाफ सरकार ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मुशर्रफ

मामले में विशेष अदालत के अंतिम फैसले को रोकने का अनुरोध किया। इसके बाद 27

नवंबर को न्यायालय ने विशेष अदालत के फैसले पर रोक लगा दी थी।

न्यायालय ने इसके अलावा सरकार को पांच दिसंबर तक अभियोजकों की एक टीम

नियुक्त करने का भी निर्देश दिया था। पांच दिसंबर को नयी अभियोजक टीम सरकार की

ओर से विशेष अदालत के समक्ष पेश हुई जिसके बाद विशेष अदालत ने मामले की

सुनवाई 17 दिसंबर को स्थगित कर दी। अदालत ने कहा था कि वह मामले की सुनवाई के

बाद फैसला भी उसी दिन कर देगी। मंगलवार को सुनवाई के बाद सरकारी वकील अली

जिया बाजवा ने कहा कि उन्होंने आज अदालत में तीन याचिकायें दाखिल की थीं।

देशद्रोह के मामले में एक साथ कई याचिकाएं दायर थी

इनमें से एक याचिका में पूर्व प्रधानमंत्री शौकत अजीज, उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य

न्यायाधीश अब्दुल हमीद डोगर और पूर्व कानून मंत्री जाहिद हामिद को इस मामले में

आरोपी बनाने की मांग की गयी। विशेष अदालत के जज एवं लाहौर उच्च न्यायालय के

न्यायमूर्ति शहिद करीम ने कहा कि साढ़े तीन साल के बाद इस प्रकार के अनुरोध का

मतलब है कि सरकार की नीयत सही नहीं है। मामले पर अंतिम बहस की जा रही है ऐसे में

अब नयी याचिकायें दाखिल की जा रही हैं। इस पर सरकारी वकील ने कहा कि वर्ष 2014

की याचिका के मुताबिक शौकत अजीज ने मुशर्रफ को आपातकाल लागू करने को कहा

था। इस बीच मुशर्रफ के वकील रजा बशीर ने कहा कि उन्होंने अपने मुवक्किल मुशर्रफ का

बयान दर्ज करने को अदालत से अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को

भी निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिलना चाहिए। विशेष अदालत के न्यायमूर्ति नजर

अकबर ने कहा,शीर्ष अदालत ने आपराधिक दंड संहिता की धारा 342 के तहत मुशर्रफ के

बयान दर्ज करने का अधिकार खत्म कर दिया है। पूर्व राष्ट्रपति ने अपने बयान दर्ज कराने

के छह मौके गंवा दिये। न्यायमूर्ति सेठ ने कहा कि वह मुशर्रफ के बयान दर्ज करने को

लेकर आयोग के गठन संबंधी याचिका पर विचार करेंगे। इसके बाद सभी जज न्यायालय

कक्ष से बाहर निकल गये।

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