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अपनी जिद पर अब भी अड़ी है शिवसेना बदल रहे हैं राजनीतिक समीकरण




  • संजय राउत ने वसीम बरेलवी का शेर लिखा
  • कांग्रेस और एनसीपी कर चुके हैं किनारा
  • कई नेताओँ से सोनिया गांधी से आग्रह किया
  • शिवसेना अब सिर्फ सीएम के मुद्दे पर ही बात करेगी
रासबिहारी

नईदिल्लीः अपनी जिद छोड़ने को फिलहाल शिवसेना तैयार नजर नहीं

आ रही है। कांग्रेस और एनपीसी द्वारा उससे किनारा कर लिये जाने के

बाद भी वह 50-50 के फार्मूले पर अड़ी नजर आ रही है। इस क्रम में

शिवसेना नेता संजय राउत ने फिर से प्रमुख शायर वसीम बरेलवी का

एक शेर उद्धृत कर नये सिरे से गर्मी फैला दी है। श्री राउत ने अपने

ट्विटर एकाउंट पर लिखा है कि

” वसूलों पर जहां आंच आये, टकराना जरूरी है,

जो जिंदा हो तो फिर जिंदा नजर आना जरूरी है।”

इस शेर की वजह से जो कुछ स्थिति संभलती नजर आ रही थी, वह

फिर से बिगड़ती दिखने लगी है। दूसरी तरफ भाजपा और शिवसेना

के बीच अब भी तनाव की स्थिति के बीच मुंबई कांग्रेस के कई नेताओं

ने श्रीमती सोनिया गांधी से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का

आग्रह किया है। इन नेताओं की दलील है कि कई अवसरों पर शिवसेना

ने इससे पहले भी कांग्रेस का नीतिगत तौर पर समर्थन किया है। इसलिए

अब महाराष्ट्र में दोबारा चुनाव कराने की आशंका को रोकने के लिए कांग्रेस

को पहल करनी चाहिए। इससे एनसीपी नेता शरद पवार को मनाना भी

संभव होगा। वैसे एनसीपी के अंदर भी अब इस परिस्थिति की वजह से

दूसरी सोच तेजी से पनपने लगी है।

अपनी जिद पर अड़ी तो नहीं बढ़ी सरकार की गाड़ी

50-50 के फार्मूले की मांग पर अड़ी शिवसेना की वजह से 24 अक्टूबर के

चुनाव के बाद भी सरकार गठन की गाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रही है।

शिवसेना का दावा है कि चुनाव के पहले ही यह शर्त भाजपा ने मंजूर की थी।

इसलिए उसे अब विवाद के बाद इस पर लिखित सहमति देनी होगी।

दूसरी तरफ भाजपा नेता और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ कर

दिया है कि दोनों दलों के बीच ऐसी कोई सहमति नहीं बनी थी।

संजय राउत के इस शेर से यह स्पष्ट संकेत आ रहे हैं कि इतनी आसानी

से शिवसेना अब भाजपा के सामने हथियार डालने नहीं जा रही है। श्री राउत

ने साफ कर दिया है कि अब तो भाजपा से सिर्फ मुख्यमंत्री की सीट

शेयरिंग फार्मूले पर ही बात होगी। शेष मुद्दे कभी भी विवाद में नहीं रहे हैं।



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