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पृथ्वी के बाहर से खनिज जुटाने की होड़ में जुटे हैं सभी विकसित देश

  • लोहा और टाइटेनियम की हुई है पुष्टि

  • बाहर से खनिज लाकर व्यापार की तैयारी

  • वर्ष 2025 तक अमेरिकी अभियान होगा प्रारंभ

  • खनिजों का अथाह भंडार है चांद के भीतर भी

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः पृथ्वी के बाहर से खनिज जुटाने की योजना कोई नई योजना नहीं है। सिर्फ

तकनीक विकसित नहीं होने की वजह से पृथ्वी के बाहर से खनिज लाने का काम प्रारंभ

नहीं हो पाया है। लेकिन अंतरिक्ष अनुसंधान में अनेक ऐसे इलाकों का पता चला है तो

पृथ्वी की खनिज संबंधी जरूरतों को काफी लंबे समय तक पूरा करने में सक्षम हैं। इसकी

पुष्टि होने के बाद ही पृथ्वी के बाहर से खनिज लाकर काम करने की योजनाओं को अंतिम

रुप प्रदान किया जा रहा है। इस क्रम में पहली बार नासा ने यह कहा है कि शायद चांद पर

पूर्व के अनुमान से कहीं अधिक खनिज मौजूद है। वहां के धरातल का जैसे जैसे विश्लेषण

हो रहा है, यह तथ्य उभरकर सामने आ रहा है।

नासा की घोषणा के बाद जाहिर तौर पर बाहरी जगत के खनिज भंडार पर कब्जा करने की

होड़ और तेज होने जा रहा है। याद रहे कि इससे पहले भी एक ऐसे उल्कापिंड की भी

पहचान हुई थी, जिसका अधिकांश हिस्सा शुद्ध सोने का ही बना हुआ है। शेष पिंड को वहां

के लौह धातु ने बांध रखा है। उस पिंड से भी सोना निकालने की कोशिशों में वैज्ञानिक

अभियान की तैयारियां चल रही हैं। वर्तमान में इसके रास्ते में सबसे बड़ी बाधा अंतरिक्ष में

काफी दूर तक सफर करने के बाद खनिज लेकर उसकी सकुशल वापसी का है। लेकिन चांद

की दूरी कम होने की वजह से यहां से वर्तमान विज्ञान इसे कर सकता है। इसी वजह से यह

अनुमान भी लगाया जा रहा है कि वर्ष 2025 तक चांद से खनिज भंडार के खनन का

अभियान भी प्रारंभ हो सकता है।

पृथ्वी के बाहर सोना से भरा हुआ उल्कापिंड भी है

चांद के भीतर अनुमान से अधिक खनिज भंडार होने का पता आधुनिक तकनीक से चला

है। इसके पूर्व भी जो कुछ चंद्र अभियान हुए थे, उसमें जो कुछ मिट्टी लायी जा सकी थी, वह

ऊपरी सतह से खुरचकर लायी गयी थी। अब वहां के लिए मिनियेचर रेडियो फ्रीक्वैंसी यंत्रों

का उपयोग हो रहा है। नासा के एलआरओ यान पर ऐसे उपकरण स्थापित हैं तो रेडियो

तरंगों की बदौलत वहां की धरती के नीचे छिपे खनिजों का पता बताते हैं। इन्हीं के आंकड़ों

के विश्लेषण के आधार पर नासा ने यह माना है कि अनुमान से अधिक खनिज चांद की

सतह के नीचे हो सकते हैं। अब तक इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि चांद पर लोहा के

अलावा बेशकीमती धातु टाइटेनियम भी मौजूद है।

वैसे चांद पर से खनिज उत्खनन के अलावा वहां की सतह के नीचे की संरचना को

समझकर वैज्ञानिक चांद पर भी इंसानों की बस्ती बसाने के अपने अभियान को आगे

बढ़ाना चाहते हैं। चांद की गहरी खाइयों के भीतर जमा बर्फ भी इसमें काम आ सकता है।

चांद के उत्तरी छोर पर ऐसे खाई बने हुए हैं, जिनके अंदर बर्फ मौजूद होने क पता चला है।

समझा जाता है कि चांद पर उल्कापिंडों के गिरने से हुए विस्फोट के दौरान ही चांद की

गहराई के सतह के धूलकण भी इन खाइयों में मौजूद हैं। वहां के अध्ययन से इसका ज्यादा

पता चल सकता है। लिहाजा इन गहरी खाइयों की संरचना का भी अध्ययन किया जा रहा

है। चांद पर मौजूद ऐसे खाइयों में से कुछ तो तीन से लेकर 12 किलोमीटर तक चौड़े हैं।

अनुमान है कि उल्कापिंडों के गिरने की वजह से ही ऐसी खाई का निर्माण चांद की सतह

पर हुआ है।

डोनाल्ड ट्रंप से अमेरिका के लिए जारी कर दिये हैं आदेश

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले अप्रैल माह में ही उस आदेश

पर हस्ताक्षर कर दिये हैं, जिसमें नागरिकों को चांद की धरती पर भी खनन करने को

प्रोत्साहित करने की बात कही गयी है। इस आदेश में सिर्फ चांद ही नहीं बल्कि अन्य सौर

इलाकों से भी खनिज के व्यापारिक उत्पादन की छूट दी गयी है। अमेरिकी पक्ष से इसके

साथ ही सफाई दी गयी है कि चांद अथवा बाहरी दुनिया के किसी अन्य स्थान के लिए कोई

वैश्विक समझौता नहीं है। इसलिए अमेरिका इसमें अपनी मरजी से कोई भी फैसला ले

सकता है।

वैसे अमेरिका के साथ साथ रुस और चीन भी इस दिशा में पहले से प्रयासरत है। चीन का

एक अभियान वर्तमान में वहां चल रहा है। इसलिए यह भी माना जा रहा है कि अन्य देशों

द्वारा वहां के बारे में जानकारी एकत्रित करने के बाद ही नासा ने उस बात की जानकारी

सार्वजनिक की है, जिसके बारे में उसे पहले से ही पता था। शायद किसी अन्य देश द्वारा

इसकी घोषणा किये जाने की शर्मिंदगी से बचने के लिए नासा की तरफ से चांद की खनिज

संरचना के बारे में इतना कुछ पहली बार बताया गया है।


 

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