fbpx

पृथ्वी पर लगातार एक नहीं बल्कि दो उल्कापिंड आ गिरे थे, देखें वीडियो

पृथ्वी पर लगातार एक नहीं बल्कि दो उल्कापिंड आ गिरे थे, देखें वीडियो
  • डायनासोरों के विलुप्त होने का दूसरा कारण भी सामने आया

  • दोनों ही आकार में तबाही लाने वाले ही थे

  • पहले झटके में बचा जीवन दूसरे में खत्म

  • जीवन के नये क्रम की शुरुआत उसके बाद

राष्ट्रीय खबर

रांचीः पृथ्वी पर लगातार दो बड़े उल्कापिंडों की वजह से ही डायनासोर पूरी तरह विलुप्त हो

गये थे। नये शोध में इस बात का पता चला है। शोधदल ने इस दूसरे उल्कापिंड के गिरने के

प्रमाण भी एकत्रित किये हैं। जिसके आधार पर यह माना जा रहा है कि पहले उल्कापिंड से

पृथ्वी के उस दौर के जीवन को काफी नुकसान पहुंचा था। लेकिन संभव है कि उस भीषण

आग से किसी तरह बचे डायनारोस दूसरे उल्कापिंड के प्रलय से नहीं बच पाये। इसी वजह

से पृथ्वी के सबसे आक्रामक और बड़े आकार का यह जीव पूरी तरह विलुप्त ही हो गया।

वीडियो में देखें कैसे गिरा था उल्कापिंड और विलुप्त हुए डायनासोर

वैज्ञानिक अनुसंधान के मुताबिक पृथ्वी पर बड़े आकार का उल्कापिंड 66 मिलियन वर्ष

पूर्व गिरा था। इस उल्कापिंड के गिरने से पृथ्वी पर हर किस्म की प्राकृतिक आपदा आयी

थी। खास कर उल्कापिंड से फैली आग की वजह से डायनासोर जैसे प्राणी जलकर राख हो

गये थे। इस उल्कापिंड का कुप्रभाव जल में रहने वाले जीवों पर भी पड़ा था। दरअसल बता

दें कि बड़े आकार के उल्कापिंड जब आसमान से धरती पर आते हैं तो एक स्वाभाविक

रासायनिक प्रतिक्रिया की वजह से उल्कापिंड के टूटते टुकड़ों से शीशा बनता जाता है, जो

उल्कापिंड के साथ ही धरती पर गिरता है। इसी शीशे की वजह से पानी का जीवन नष्ट

हुआ था। मछली प्रजाति के जीवों के गलफड़े में शीशे के छोटे टुकड़े फंसने की वजह से

उनका दम घुट गया था। अब पता चला है कि इस उल्कापिंड के गिरने से जो कुछ बचा था,

वह दूसरे उल्कापिंड के गिरने से पूरी तरह तबाह हुआ था। पहला उल्कापिंड आज के

मैक्सिको के इलाके में गिरा था जबकि दूसरा उल्कापिंड उस घटना के साढ़े छह लाख वर्ष

बाद उक्रेन के इलाके आ गिरा था।

पृथ्वी पर लगातार दो उल्कापिंडों के गिरने के साक्ष्य खोजे गये

अनुमान है कि इसी दूसरे उल्कापिंड के गिरने की वजह से ही मौसम का बदलाव और

जीवन चक्र का परिवर्तन प्रारंभ हुआ था। पहले झटके में डायनासोर जैसे जो बड़े प्राणी

किसी तरह बच गये थे, वे इस दूसरे झटके में पूरी तरह समाप्त हो गये। इन दोनों ही

उल्कापिंडों का असर पूरी पृथ्वी पर ही पड़ा था। बहुत बड़े आकार के होने की वजह से वह

दोनों जब धरती पर गिरे तो बड़ा भूकंप आया। इससे पानी वाले इलाकों में सूनामी की

स्थिति बनी। दूसरी तरफ भीषण आग की वजह से बहुत बड़े इलाकों में आग लगी तो तेजी

से पूरे इलाके में फैलती चली गयी। डायनासोर के फॉसिलों से पहले ही यह अनुमान लगाया

गया है कि वे सभी अचानक आयी आपदा की वजह से एक ही झटके में समाप्त हो गये थे।

कुछ के शरीर पर जलने का निशान मिलने की वजह से ही यह माना जा रहा है कि भीषण

आग की चपेट में आने की वजह से यह प्रजाति विलुप्त हो गयी। दरअसल उस दौर का

सबसे ताकतवर प्राणी लगातार दो ऐसे झटकों को झेल ही नहीं पाया। हर तरीके से मजबूत

होन के बाद भी आग से बचने का कोई तरीका उस डायनासोर प्रजाति के पास मौजूद नहीं

था। वैज्ञानिक अनुसंधान के मुताबिक मैक्सिको में जो उल्कापिंड गिरा था, वह आकार में

छह मील चौड़ा था। इससे उस दौर के जीवन का करीब सत्तर प्रतिशत समाप्त हो गया

था। उसके बाद जो बड़ा उल्कापिंड दोबारा पृथ्वी पर गिरा, वह भी कमसे कम एक मील

चौड़ा था। इसके गिरने से उक्रेन के इलाके में पंद्रह मील चौड़ी खाई बन गयी थी। यह

इलाका मध्य उक्रेन में अब भी मौजूद है।

पहला मैक्सिको में और दूसरा उक्रेन में आ गिरा था

यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो के शोधकर्ता एन्निमेरी पिकर्सगील कहती हैं कि जीवन के

नुकसान के लिहाज से दूसरे उल्कापिंड का प्रभाव अधिक रहा था। दरअसल पहले झटके से

पृथ्वी को हुए नुकसान की भरपाई होने के पहले ही यह दूसरा झटका लगा था। इसकी

वजह से पृथ्वी पर जो बड़े प्राणी किसी तरह बचे हुए थे, वे भी इस बार की आग में स्वाहा हो

गये। शोध दल ने दोनों ही उल्कापिंडों के स्थान से नमूने एकत्रित कर उनका विश्लेषण कर

उनके समय का अंदाजा लगाया है। पृथ्वी के अंदर करीब एक तिहाई मील की गहराई में

यह उल्कापिंड धंस गये थे। दोनों के प्रभाव के निशान भी आस पास के इलाकों पर मौजूद

हैं। जहां के पत्थर पिघल गये थे। पृथ्वी पर लगातार दो उल्कापिंडों के गिरने की वजह से

उस दौर में मौजूद जीवन का लगभग पूरा ही नष्ट हो गया था। मौसम के बदलाव के बाद

पृथ्वी में जीवन चक्र का दूसरा दौर प्रारंभ हुआ, जिसके अपेक्षाकृत छोटे आकार के प्राणी

एमिबा से बनते चले गये। इस प्रक्रिया को पूरा होने में भी करीब 9 मिलियन वर्ष लगा

होगा, ऐसा वैज्ञानिक मानते हैं।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
Rkhabar

Rkhabar

... ... ...
error: Content is protected !!
%d bloggers like this: