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अफीम के झारखंडी कारोबार के तार म्यांमार से जोधपुर तक

  • म्यांमार के रास्ते तस्करी देखकर पुलिस भी हैरान

  • मणिपुर से असम होते हुए आगे जाती है अफीम

  • चाय की पत्तियों के बीच इसकी गंध नहीं आती

  • इस गिरोह के एक सरगना का पता चला पुलिस को

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: अफीम के झारखंडी कारोबार के असली अपराधियों का झारखंड में तो पता नहीं

चल पाया। इसके बीच ही असम पुलिस ने वहां मादक पदार्थों के कारोबार में लिप्त कुछ

लोगों को गिरफ्तार किया तो एक के बाद एक राज खुलते चले गये। पता चला है कि यह

नेटवर्क म्यांमार से जोधपुर तक फैला हुआ है। 

गुवाहाटी के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि राजस्थान के जोधपुर में इसकी

तस्करी के अंतराष्ट्रीय खेल का खुलासा हुआ है । पुलिस ने बताया कि भारत के उत्तरी

पूर्वी राज्यों में म्यांमार की सीमा लगती है, जिसके चलते सीमावर्ती राज्य मणिपुर के

आसपास तस्कर सक्रिय हैं, जो म्यांमार से इसकी खेप मंगवाते हैं। यहां से देश के अलग-

अलग हिस्सों में उसकी सप्लाई की जाती है। तीन हजार किलोमीटर दूर म्यांमार देश से

यहां अफीम चायपत्ती के साथ छुपाकर लाई जा रही थी। आरोपियों से की गई पूछताछ में

अफीम तस्करी के अंतराष्ट्रीय खेल का खुलासा हुआ है। पुलिस ने बताया कि राजस्थान में

झारखंड और मध्य प्रदेश से ही इसकी खेती के तार जुड़े हुए हैं। लेकिन पहली बार म्यांमार

से भी इस मादक के आने की बात का पता चला है। जोधपुर पुलिस ने इसकी जानकारी

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को भी दे दी है। म्यांमार से हर रोज मणिपुर – गुवाहाटी रास्ते

से बिहार ,पश्चिम बंगाल ,झारखंड, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में अंतराष्ट्रीय स्तर की

तस्करी हो रहा है । यह सूचना मिलते हुए पुलिस अधिकारी ने तलाशी लेने के बाद वह

आरोप में पकड़े गए तस्करों ने जब ये राज खोला, तो पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए।

इतना ही नहीं आरोपियों ने इसकी तस्करी का पूरा रूट भी पुलिस को बताया है।

अफीम के कारोबारी एक दूसरे के संपर्क में होते हैं

जोधपुर पुलिस उपायुक्त आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि म्यांमार से मणिपुर और

मणिपुर से गुवाहाटी अफीम की खेप लाई जाती है। उसके बाद इसे चाय की पत्तियों के ट्रक

में डालकर आगे लाया जाता है, जिससे कि अफीम की गंध नहीं आए। उन्होंने बताया कि

म्यांमार से लाई गई अफीम की एक खेप को लेकर उठे विवाद के चलते कुछ दिनों पहले दो

युवकों की हत्या हो गई थी। इस हत्या के मामले ने तूल पकड़ा, तो पुलिस ने अपनी जांच में

और तेजी दिखाई। पुलिस ने तीन आरोपियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया, इनकी

निशानदेही पर दो आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। आरोपियों से की गई

पूछताछ में अफीम तस्करी के अंतराष्ट्रीय खेल का खुलासा हुआ है। पुलिस ने बताया कि

राजस्थान में झारखंड और मध्य प्रदेश से ही अफीम आने के खुलासे हुए थे, लेकिन पहली

बार म्यांमार से भी अफीम आने की बात का पता चला है। जोधपुर पुलिस ने इसकी

जानकारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को भी दे दी है। पुलिस ने बताया कि भारत के उत्तरी

पूर्वी राज्यों में म्यांमार की सीमा लगती है, जिसके चलते सीमावर्ती राज्य मणिपुर के

आसपास तस्कर सक्रिय हैं, जो म्यांमार से अफीम मंगवाते हैं। यहां से देश के अलग-अलग

हिस्सों में अफीम की सप्लाई की जाती है।

तीन हजार किलोमीटर की दूरी अलग अलग रास्तों से तय होती है

पुलिस उपायुक्त ने बताया कि म्यांमार की जोधपुर से 3 हजार किलोमीटर से ज्यादा की

दूरी है। 8 से 10 दिनों में अलग-अलग रास्तों से पश्चिम राजस्थान में अफीम पहुंचती थी।

इस तस्करी के खेल का मास्टरमाइंड जोधपुर जेल में बंद मांगीलाल नोखड़ा है, जिसे अब

पुलिस ने रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक जेल में बंद मांगीलाल नोखड़ा अफीम तस्करी का मास्टरमाइंड है ।

जो जेल से ही अपना नेटवर्क चला रहा है। जोधपुर पुलिस ने हाल ही में इसके भाई सुरेश

नोखड़ा को दिल्ली से गिरफ्तार किया है।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी ने इस संवाददाता को बताया कि पहले

अफीम की तस्करी मध्य प्रदेश और राजस्थान से हो रही थी लेकिन अब झारखण्ड के

नक्सल प्रभावित इलाकों से रही है । 2019-20 में राज्य सरकार के सहयोग से एनसीबी ने

झारखण्ड में 1002 एकड़ अफीम की खेती नष्ट की है । जबकि अफीम की पैदावार करने

वाले 8 राज्यों में कुल 10401 एकड़ अफीम की अवैध खेती नष्ट की गई है ।

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