fbpx Press "Enter" to skip to content

सिर्फ ऑक्सीजन की मदद से उम्र को पलट देंगे इजरायली वैज्ञानिक




  • तेल अबीब विश्वविद्यालय में हुआ है प्रयोग

  • इंसान को 25 साल पीछे ले जाने में कामयाबी

  • प्रयोग में कोई और जीवनचर्या का बदलाव नहीं किया

  • उम्र का चक्का उल्टा घूमाने मे कामयाबी का वैज्ञानिक दावा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः सिर्फ ऑक्सीजन की बात हो तो हम पहले से ही इस बात को जानते हैं कि यह जीवन

के लिए एक अनिवार्य अंग है। हम इसके बिना न तो सांस ले पायेंगे और न ही इसके बिना

हमारे शरीर के अंदर दिल धड़क पायेगा। लेकिन अब पहली बार इजरायली वैज्ञानिकों ने

इसकी मदद से उम्र को उल्टा घूमाने का दावा किया है। इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक प्रोफसर

शाई इफराती ने कहा कि सिर्फ ऑक्सीजन की मदद से अब हम उम्र के समय को उल्टा

चला सकते हैं। उनके मुताबिक उनका प्रयोग सफलता रहा है यानी वे उम्र को पीछे ले जाने

में कामयाब रहे हैं। तेल अबीव विश्वविद्यालय के इस शोध का नेतृत्व भी प्रोफसर

इफराती ने किया था। शमीर मेडिकल सेंटर के एक दल ने इस काम के लिए 64 वर्ष के

अधिक आयु के स्वस्थ लोगों की एक टीम को चुना था। इन लोगों को एक दबाव वाले चैंबर

में रखा गया था। इनलोगों को प्रतिदिन डेढ़ घंटा यह दबावयुक्त ऑक्सीजन दिया गया।

यह क्रम सप्ताह में पांच दिनों तक लगातार तीन महीने तक चला। तीन महीने के बाद के

निष्कर्ष देखकर वे इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि शोध के दायरे में लाये गये तमाम लोगों को

इससे फायदा हुआ है। इस दौरान उम्र बढ़ने की प्रक्रिया पूरी तरह रूक गयी जबकि असली

लाभ यह देखा गया कि अनेक लोगों की आंतरिक संरचना वर्तमान समय से पीछे चली

गयी है यानी उनकी उम्र वाकई कम हो गयी है। माना जा रहा है कि यदि वाकई यह

अनुसंधान सफल रहा है तो आने वाले दिनों में चिकित्सा जगत भी इसकी मदद से अनेक

किस्म की उम्र जनित बीमारियों के ईलाज में इसका बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर

पायेगा।

सिर्फ ऑक्सीजन आधारित इस शोध में दो विषयों पर ध्यान रहा

सिर्फ ऑक्सीजन पर आधारित इस शोध के तहत सिर्फ दो विषयों पर वैज्ञानिकों ने अपना

ध्यान केंद्रित रखा था। वे इसके जरिए डीएनए टेलोमेरे और उम्र से जुड़े शरीर के कोषों का

निरंतर अध्ययन कर रहे थे। बता दें कि टेलीमेरे दरअसल इंसानी क्रोमोजम का अंतिम

सिरा है। वे दरअसल क्रोमोजम की पुनरावृत्ति रोकने और उन्हें किसी हमले से बचाने का

काम करते हैं। एक खास उम्र तक यह टेलोमेरे लगातार ऐसे हमलों को विफल करता जाता

है और हर बार वह छोटा होता जाता है। लेकिन एक खास उम्र के बाद ऐसे कोष यह काम

नहीं कर पाते हैं। इसके बाद ही इंसानों पर उम्र का असर दिखने लगता है क्योंकि सेलों की

प्रतिरक्षा प्रणाली ध्वस्त हो चुकी होती है। वे खुद को जवान नहीं बनाये रख पाते हैं। उनकी

कमी की वजह से कई किस्म की उम्र जनित बीमारियां भी होती हैं। समझा जाता है कि

कैंसर जैसी बीमारी की एक खास वजह भी यही दोष है जो बेहिसाब ढंग से विकसित होने

वाले कोशों को नियंत्रित नहीं कर पाते हैं, जो कैंसर के कोष होते हैं।

इजरायल के वैज्ञानिकों के इस प्रयोग में 64 साल की उम्र से अधिक के 35 लोगों को

शामिल किया गया था। इनलोगों को खास किस्म से बने दबावयुक्त चैंबर में हाईपरबारिक

ऑक्सीजन थैरापी (एचबीओटी) के तहत रखा गया। यहां ऑक्सीजन का दबाव इतना

अधिक था कि सांस में इस्तेमाल नहीं होने वाले ऑक्सीजन भी शरीर के छिद्र लोमकूपों के

जरिए शरीर के अंदर प्रवेश करते रहे। दूसरे रास्ते से शरीर में प्रवेश करने वाला यह

ऑक्सीजन भी अंततः शरीर के कोषों तक पहुंचने लगा।

शरीर के लोमकूपों से पहुंचे प्राणवायु ने स्थिति ही बदलकर रख दी

इस प्रयोग के तहत हर बीस मिनट के बाद वहां मौजूद लोगों को अपना मास्क हटाने का

कहा जाता था ताकि उनका ऑक्सीजन का स्तर फिर से सामान्य स्तर पर लाया जा सके।

जब जब लोग मास्क हटाते चैंबर के अपने सिर्फ ऑक्सीजन का स्तर बदलते देखा गया।

ऑक्सीजन के स्तर में इस बदलाव को भी शोधदल ने महत्वपूर्ण माना था क्योंकि जब जब

लोग मास्क हटाते यह बदलाव होता हुआ नजर आता था। यह बात समझ में आयी कि

दबाव के ऑक्सीजन की वजह से शरीर के अनेक कोष इस ऑक्सीजन की बदौलत फिर से

न सिर्फ सक्रिय होने लगे बल्कि अपनी पूर्वावस्था में लौटते पाये गये। जब जब चैंबर में

ऑक्सीजन का मात्रा कम होती पायी गयी, यह समझा गया कि शरीर के अंदर कोषों का

नवनिर्माण हो रहा है क्योंकि इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन की खपत बढ़ जाती है।

जिनपर प्रयोग किया गया उनकी हालत 25 साल कम जैसी हुई

अनुसंधान के दौरान वहां लाये गये लोगों ने भी खुद में बदलाव महसूस किया जबकि उनके

ध्यान देने की क्षमता, किसी सूचना को दिमाग में समझकर उसके अनुरुप आचरण करने

की क्षमता और अन्य शारीरिक कार्यों में भी गति और दक्षता को देखा गया है। आम तौर

पर साठ वर्ष से अधिक आयु के पचास फीसदी लोगों में यह क्षमता कम हो जाती है। शोध

के बारे में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि इसमें शामिल लोगों को किसी किस्म का

भोजन अथवा अन्य दवा के प्रावधानों से अलग नहीं किया गया था। यानी चैंबर में लाये

जाने के पहले वे लोग जिस दिनचर्या का पालन करते थे, वह सामान्य तौर पर चलता रहा।

सिर्फ ऑक्सीजन पर आधारित इस प्रयोग समाप्त होने के बाद उम्र संबंधी मानकों के

आधार पर यह माना गया कि सभी का आयु क्षमता करीब 25 वर्ष पीछे लौट चुकी है।

लेकिन उम्र को पीछे धकेलने से क्या इंसान की आयु भी बढ़ जाएगी, इसकी जांच नहीं हो

पायी है। सिर्फ यह माना गया है कि इस विधि से इंसान की सक्रियता को बढ़ाया जा सकता

है। लेकिन टेलोमोरे के काफी छोटा होने से मृत्यु का रिश्ता है, यह पता है। इसलिए हो

सकता है कि इस विधि से इंसान की उम्र भी बढ़ जाए।


 



Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from अजब गजबMore posts in अजब गजब »
More from जेनेटिक्सMore posts in जेनेटिक्स »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from प्रोद्योगिकीMore posts in प्रोद्योगिकी »
More from विश्वMore posts in विश्व »

One Comment

Leave a Reply

... ... ...
%d bloggers like this: