एक थप्पड़ में ही बल अपना मुंह खोल दिया था मसूद अजहर ने

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प्रतिनिधि
नईदिल्लीः एक थप्पड़ ही कुख्यात आतंकवादी मसूद अजहर पर भारी पड़ गया था।

यह बात इतने दिनों के बाद उससे पूछ ताछ करने वाले अधिकारियों ने बतायी है।

अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी के तौर पर अपनी पहचान बना चुके मसूद के बारे में

यह मजेदार जानकारी उन अधिकारियों ने दी है, जो उस पूछ ताछ में शामिल थे।

देश में खतरनाक आतंकी हमलों को अंजाम देने वाले जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को 1994 में भारत ने गिरफ्तार किया था।

उससे पूछताछ करने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी थी।

एक थप्पड़ में ही वो सब उगलने लगा था।

ये जानकारी पूर्व पुलिस अधिकारी अविनाश मोहनाने ने दी थी।

जिन्होंने 1994 में अजहर की गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की थी।

अजहर पुर्तगाल के पासपोर्ट पर बांग्लादेश के रास्ते भारत में घुसा था और फिर वह कश्मीर पहुंचा।

उसे दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में फरवरी 1994 में गिरफ्तार किया गया था।

अधिकारी ने बताया कि कस्टडी के दौरान खुफिया एजेंसी को अजहर से पूछताछ करने के दौरान कोई मेहनत नहीं करनी पड़ी।

उसने सेना के एक अधिकारी के एक थप्पड़ के बाद ही बोलना शुरू कर दिया

और पाकिस्तान से संचालित आतंकवादी समूहों के कामकाज के बारे में उसने विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा, “उसे संभालना ज्यादा मुश्किल नहीं था और आर्मी अफसर के एक थप्पड़ ने उसे हिलाकर रख दिया था।”

अविनाश मोहनाने सिक्किम में डायरेक्टर जनरल थे।

खुफिया एजेंसी में दो दशक के अपने कार्यकाल में उन्होंने अजहर से कई बार पूछताछ की थी।

इंडियन एयरलाइंस के आईसी-814 विमान के हाईजैक होने के बाद यात्रियों के बदले सरकार को अजहर को रिहा करना पड़ा था।

इसके बाद उसने साल 2000 में पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद का गठन किया।

इसके बाद उसने भारत में कई बड़े हमलों को अंजाम दिया था।

जिसमें भारतीय संसद पर हमला, पठानकोट हमला, उरी में आर्मी कैंप पर हमला

और हाल ही में पुलवामा में सीआरपीएफ पर हुआ हमला भी शामिल है।

मोहनाने ने बताया कि हिरासत में अजहर ने पाकिस्तान में आतंकवादियों की भर्ती प्रक्रिया और आतंकवादी समूहों के कामकाज के बारे में जानकारी दी।

यह वह समय था जब खुफिया एजेंसियां, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की तरफ से छेड़े गए छद्म युद्ध को समझने का प्रयास कर रही थीं।

मोहनाने 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं जिन्होंने उस वक्त एजेंसी में कश्मीर डेस्क का नेतृत्व किया था।

उन्होंने बताया, “कई मौके आए जब मैंने उससे कोट बलवाल जेल में मुलाकात की और कई घंटे तक उससे पूछताछ की।

हमें उस पर बल प्रयोग नहीं करना पड़ा क्योंकि वह खुद ही सारी सूचनाएं बताता चला गया।”

उन्होंने कहा कि उसने अफगानी आतंकवादियों के कश्मीर घाटी में भेजे जाने की जानकारी दी।

साथ ही हरकत उल मुजाहिद्दीन (एचयूएम) और हरकत उल जेहाद ए इस्लामी (हूजी) के

हरकत उल अंसार में विलय की भी जानकारी दी।

वह हरकत उल अंसार का सरगना था।

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