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आनलाइन गेम्­स को रेगुलेट करें आनलाइन गेमिंग का पाँचवा सबसे बड़ा बाजार







नयी दिल्ली, : भारत अभी दुनिया में आनलाइन गेमिंग का पाँचवा सबसे बड़ा बाजार है, जिसका कारण यहाँ की युवा और टेक्­नोलॉजी की जानकार आबादी, इंटरनेट की बढ़ी हुई पहुँच और किफायती स्­मार्टफोन्­स हैं। बीसीजी-सिकोइया इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में गेमिंग का पैमाना काफी बड़ा, यानि 1.5 बिलियन डॉलर का है, जिसकी वैश्विक हिस्­सेदारी लगभग 1% है। और ‘‘मोबाइल-फस्र्­ट’’ की क्रांति के चलते इसके साल 2025 तक तिगुना होकर 5 बिलियन डॉलर से ज्­यादा का बाजार बनने की अपेक्षा है। भारी वृद्धि के बावजूद आनलाइनगेमिंग के सेक्­टर में धारणा को लेकर काफी अस्­पष्­टता है। जानकारी के अभाव के कारण आॅनलाइन स्किल गेमिंग और गेमिंग के बीच भ्रम भी है। कुछ राज्­यों ने आनलाइन गेमिंग को प्रतिबंधित करने के लिये कदम उठाये हैं, जिसके पीछे यह विचार है कि आनलाइन गेमिंग जुआ है। इसका एक मामला हाल ही में बने कर्नाटक पुलिस (संशोधन) बिल 2021 का है, जो पैसों की हिस्­सेदारी वाले सभी प्रकारों के आनलाइन गेम्­स को निषेध करता है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और असम जैसे कई राज्­य विगत समय

आनलाइन गेमिंग को प्रतिबंधित कर चुके

आनलाइन गेमिंग को प्रतिबंधित कर चुके हैं। दूसरी ओर, आनलाइन रमी, फैंटेसी स्­पोर्ट्स और ई-स्­पोर्ट्स जैसे गेम्­स को भारत में विभिन्­न उच्­च न्­यायालयों और सर्वोच्­च न्­यायालय ने कुशलता के खेल माना है। उनके फैसलों ने रमी, शतरंज, फैंटसी और दूसरे स्किल गेम्­स को स्­पष्­ट रूप से कुशलता के खेलों के रूप में स्­थापित किया है। सबसे हाल ही में, केरला हाई कोर्ट और मद्रास हाई कोर्ट ने क्रमश 27 सितंबर, 2021 और 3 अगस्­त, 2021 के अपने फैसलों में आॅनलाइन स्किल गेम्­स की वैधता को दोहराया है। प्रतिबंध के सभी मामलों में वैधता के अलावा विवाद इस बात पर रहा है कि उपभोक्­ताओं की सुरक्षा को देखते हुए ऐसे प्रतिबंधों का प्रभाव कितना है। ई-गेमिंग फेडरेशंस के सीईओ समीर बरडे का मानना है कि राज्­य सरकारों को व्­यापक प्रतिबंधों की बहाली के बजाए आॅनलाइन गेमिंग को रेगुलेट करने वाली नीतियाँ लानी चाहिये, क्­योंकि ऐसे कठोर उपायों से केवल अविश्­वसनीय आॅपरेटर्स को फायदा होगा और गेमिंग की गैर-कानूनी गतिविधियाँ बढ़ेंगी तथा सरकार जिन प्­लेयर्स को बचाना चाहती है, उन पर बुरे प्रभाव होंगे। बरडे ने आगे कहा, ‘‘हमने पिछले साल ऐसे मामले के बारे में पढ़ा है, जिसमें एक राज्­य की सरकार ने साल 2017 से आॅनलाइन गेमिंग को प्रतिबंधित किया था और फिर आनलाइन का एक घोटाला सामने आया, जिसके तार चीन से जुड़े थे। वह घोटाला 1200 करोड़ रूपये का था।



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