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मुनाफाखोरों की वजह से बांग्लादेश में प्याज की कीमतें बढ़ी

  • बोरो में बंद रखा था अंकुरित हो गये

  • सरकार ने वैकल्पिक बिक्री प्रारंभ की है

  • चट्टग्राम में जमाखोरों का माल सड़ने लगा

  • अब तो आढ़तियों से माल लेने के क्रेता नहीं

अमीनूल हक

ढाकाः मुनाफाखोरों ने बांग्लादेश की आम जनता को परेशान कर रखा है। इसका जीता

जागता नमूना चट्टग्राम के खातूनगंज में देखने को मिला। वहां जमाखोरों ने आयातित

प्याज को अपने गोदामों में इतने दिनों तक छिपाकर रखा कि प्याज में अब अंकुर निकल

आये हैं। दरअसल जमाखोरी की वजह से गोदामों में यह प्याज अब सड़ना प्रारंभ हो का है।

अंकुर निकलने की वजह से अब उनके क्रेता भी नहीं हैं। लेकिन जमाखोरी और

मुनाफाखोरी का धंधा यहां बदस्तूर जारी है।

दरअसल कोरोना संकट के बीच अचानक ही प्याज की आमद बंद होने की वजह से

मुनाफाखोरों ने इसे अपने गोदामों में बंद कर रखा था। इनलोगों ने पहले ही भारत से

प्याज का आयात किया था। अचानक भारत में कोरोना की वजह से प्याज का निर्यात रोक

दिया गया था। इससे स्थानीय बाजारों में प्याज की कीमत चालीस रुपये से उछलकर

अस्सी रुपये तक जा पहुंची थी। मौके का नाजायज फायदा उठाने वालों ने आयातित

प्याज को बाजार में छोड़ने के बदले मुनाफाखोरी का धंधा चालू कर दिया था। अब वही

प्याज सड़ने लगा है। आनन फानन में बाजार में उसे लाने के बाद भी उसके खरीद्दार नहीं

मिल रहे हैं।

इस साल बांग्लादेश में प्याज के मुद्दे पर दो बार हंगामा हुआ है। स्थानीय जरूरतों की पूर्ति

भारत से आयातित प्याज से होती थी। कोरोना संकट की वजह से भारत द्वारा आवागमन

पर रोक लगाने की वजह से प्याज की कमी का फायदा मुनाफाखोर उठाने लगे थे।

मुनाफाखोरों की वजह से कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई थी

इसी वजह से प्याज की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई थी। अभी भारत में जिस प्याज

की औसत कीमत पचास रुपये है, वही माल बांग्लादेश में अभी 120 रुपये प्रति किलो की

दर से बिक रहा है। हालाकि प्याज में सड़न लगने के बाद तेजी से कीमतें गिरी हैं और

अभी यह 70 रुपये प्रति किलो की दर पर उपलब्ध है। सरकार का ध्यान भी प्याज की

मुनाफाखोरी की तरफ जाने के बाद ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ बांग्लादेश (टीसीबी) के

माध्यम से बाजार में 35 रुपये की दर से प्याज की आपूर्ति की जा रही है। सरकार के इसी

कार्रवाई से प्याज के मुनाफाखोर अब परेशानी में हैं क्योंकि उनके गोदामों में भरा प्याज

सड़ने लगा है। यहां तक कि सब्जी कारोबारी भी प्याज के मुनाफाखोरों का साथ देने के

लिए तैयार नहीं है। इसलिए गोदाम में जमा प्याज की मुनाफाखोरी ही कुछ व्यापारियो के

लिए अब भारी पड़ रही है।

इस विषय पर लेखक और गवेषक सोहेली मल्लिक ने अच्छी बात कही कि प्याज सिर्फ

बांग्लादेश ही नहीं पूरी दुनिया में अपरिहार्य भोजन का हिस्सा है। सरकार को चाहिए कि

प्याज के इन मुनाफाखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।


 

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