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बिना विदेश गये भी एक अमेरिकी घातक वायरस की चपेट में

  • चीन के कोरोना वायरस के नया पेंच सामने आया

  • जिसे संक्रमित समझा गया वह विदेश भी नहीं गया

  • उसके संपर्क स्कूल को भी फिलहाल बंद किया गया

  • चीनी वैज्ञानिक चमगादड़ की भी जांच कर रहे हैं

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः बिना विदेश गये भी वह शख्स कोरोना वायरस से संक्रमित

हो गया है। अमेरिका में कोरोना वायरस का यह तीसरा मामला है, जो

देश के अंदर पाया गया है। अजीब स्थिति यह है कि जिस व्यक्ति में

इस विषाणु के लक्षण पाये गये हैं, वह न तो विदेश गया था और न ही

किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आया, जो हाल के दिनों में विदेश गया

हो। इस एक घटना ने दुनिया भर के विषाणु वैज्ञानिकों को नये सिरे से

सतर्क कर दिया है। कोरोना वायरस से पीड़ित व्यक्ति अथवा संक्रमण

वाले इलाके में गये बिना भी इस व्यक्ति तक यह वायरस कैसे पहुंचा,

इस गुत्थी को जेनेटिक वैज्ञानिक जल्दी से सुलझा लेना चाहते हैं।

इसका असली मकसद अदृश्य तरीके से पूरी दुनिया में पैर पसारते इस

वायरस के असर को रोकना है। जिस शख्त को कोरोना वायरस पीड़ित

समझा गया है वह पश्चिमी अमेरिका के ओरेगन इलाका का निवासी

है। इस व्यक्ति को अस्पताल में दाखिल करने के बाद अलग थलग

रखा जा रहा है। उसके बारे में सिर्फ यह जानकारी मिली है कि वह सिर्फ

एक स्कूल में लोगों के संपर्क में आया था। इस क्षेत्र के स्वास्थ्य

निदेशक पैट्रिक एलन ने बताया कि अभी तक तो इस बीमारी के बारे में

अनुमान भर लगाया गया है।

बिना विदेश गये संक्रमण ज्यादा खतरनाक

सिर्फ एहतियात के तौर पर उस व्यक्ति को दूसरों के संपर्क से दूर रखा

गया है ताकि अगर वाकई उसे कोरोना वायरस का संक्रमण हो तो यह

दूसरों तक नहीं फैले। जांच की रिपोर्ट आने के बाद इस बात की पुष्टि

हो पायेगी कि क्या वाकई उस व्यक्ति को बिना विदेश गये अथवा

बिना संक्रमण वाले इलाकों से लौटे किसी व्यक्ति के संपर्क में आये

बिना यह वायरस कैसे लगा। वैसे अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों का

मानना है कि चीन सहित इस संक्रमण वाले इलाकों का दौरा करने वाले

अनेक अमेरिकी इस बीच देश लौटे हैं। इसलिए अगर यह संक्रमण

उनके साथ अमेरिका आया है तो उसके परिणाम भी आगे देखने को

मिलेंगे। इस बीच एहतियात के तौर पर उस स्कूल को बंद कर दिया

गया है, जहां से उस व्यक्ति का संबंध रहा है। उस स्कूल की भी गहन

जांच की जा रही है ताकि यह पता लग सके कि स्कूल में वायरस फैला

भी है अथवा नहीं। अमेरिका में इसके अलावा कैलिफोर्निया में भी दो

ऐसे मामले प्रकाश में आये हैं। इन दोनों में अधिक उम्र के लोगों के इस

वायरस की चपेट में आने का संदेह है।

पैंगोलिन के अलावा चमगादड़ पर भी है  शक

दूसरी तरफ चीन के वैज्ञानिक पैंगोलिन के अलावा चमगादड़ को भी

इस वायरस के फैलने का कारण मानकर जांच करने में जुट गये हैं।

इससे पहले जेनेटिक विश्लेषण से यह पता चला था कि इंसानी शरीर

में जैसे वायरस पाये गये हैं, ठीक वैसे ही वायरस पैंगोलिन के शरीर में

पाये गये हैं। इसी वजह से यह प्रारंभिक अनुमान लगाया गया था कि

पैंगोंलिन खाने की वजह से ही शायद यह वायरस इंसानों तक पहुंचा

और इंसानी जेनेटिक संरचना की वजह से तेजी से इसका संक्रमण

फैलता चला गया। कुछ मामलों में सांपों में भी ऐसा वायरस पाये जाने

की चर्चा हुई है। लेकिन चीनी सरकार इस बारे में खुलकर कोई

जानकारी नहीं दे रही है। सिर्फ इतना पता है कि वायरस प्रभावित

वुहान शहर को पूरी तरह सीलबंद रखा गया है। चीन के विभिन्न प्रांतों

को मिलाकर वहां इस वायरस के हमले से मरने वालों की संख्या

बढ़कर 3143 हो चुकी है। वैसे इस दौरान बीमार लोगों के ठीक होने का

आंकड़ा भी बेहतर होता जा रहा है।

इंसानी जंगली जानवरों से दूर रहे तो बेहतर होगा

चीन के जेनेटिक विशेषज्ञ चमगादड़ की बेहतर जांच की वकालत कर

रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है क रात के अंधेरे में उड़ने वाला यह जीव भी

वायरस का वाहक साबित हो सकता है। वुहान के पूरे समुद्री जीव

बाजार में यह बाजार फैला हुआ पाया गया है। लेकिन वैज्ञानिक यह भी

मानते हैं कि चमगादड़ से इंसान के सीधे प्रभावित होने की आशंका

बहुत कम है। इस मौसम में चमगादड़ वैसे भी कम उड़ते हैं और

शीतनिद्रा की अवस्था में होते हैं। लेकिन अगर चमगादड़ में यह

वायरस मौजूद है तो यह इंसानों तक कैसे पहुंच रहा है, यह जानना इसे

रोकने के लिए जरूरी हो गया है। इस शोध से जुड़े चीन के विशेषज्ञ

प्रोफसर शेन योंगी कहते हैं कि जब तक कोई ठोस नतीजा नहीं

निकले, यह बेहतर होगा कि इंसान जंगली जानवरों से हर तरीके से दूर

ही रहे। खान पान में भी ऐसी सावधानी इस बीमारी की रोकथाम के

लिए जरूरी हो गया है।

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