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महाराष्ट्र में सरकार गठन पर पेंच दर पेंच




  • भाजपा और शिवसेना में किसी के तेवर ढीले नहीं
  • शरद पवार ने कहा विपक्ष में रहेंगे
  • भागवत से मिले पर देवेंद्र फडणवीस
  • गडकरी और अहमद पटेल की चर्चा
रासबिहारी

नईदिल्लीः महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर स्थिति अब तक अस्पष्ट

ही बनी हुई है। पहले ऐसा माना गया था कि दिल्ली दरबार तक मामला

पहुंचने के बाद कुछ हल निकल आयेगा। लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ हुआ

नहीं है। इस बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने आज फिर मराठा नेता

शरद पवार से भेंट कर राजनीति को गरमा दिया है।

इस मुलाकात के तुरंत बाद शरद पवार ने सफाई दी है कि शिवसेना की

तरफ कोई वैसा प्रस्ताव नहीं दिया गया है। श्री पवार ने कहा कि संजय

राउत से उनकी पुरानी मित्रता है। इसलिए अक्सर ही मिलने आते हैं।

इसमें कोई राजनीतिक बात नहीं है। शिवसेना-बीजेपी की 25 साल की दोस्ती

है। शिवसेना ने 170 का आंकड़ा एक बार बोला था, हम भी पता कर रहे हैं

कि वो आंकड़ा कहां से आया? महाराष्ट्र की जनता ने सरकार बनाने के लिए

हमें कोई भूमिका नहीं दी। हमारे पास पर्याप्त संख्या नहीं है, वरना हम

सरकार बना लेते। एनसीपी और कांग्रेस जो करेंगे वो एक मत से करेंगे।

हमने और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा इसलिए जो भी होगा साथ में

रहकर करेंगे। ऐसे में विकल्प एक ही है कि भाजपा-शिवसेना मिलकर

सरकार बनाएं।

लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति के धाकड़ खिलाड़ी शरद पवार के इस बयान

के बाद भी ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि वह शिवसेना के निर्णायक फैसले की

प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिसके तहत शिवसेना को राजग गठबंधन से बाहर

आना होगा।

महाराष्ट्र में इनके बीच मुलाकातों की चर्चा अधिक

शरद पवार से मुलाकात से पहले संजय राउत ने मुख्यमंत्री पद के लिए

अपनी पार्टी की मांग को दोहराया और कहा कि भाजपा के साथ अब किसी

नए विकल्प पर चर्चा नहीं होगी। मुलाकात के बाद संजय राउत ने कहा,

‘पवार साहब से मेरी आज मुलाकात हुई। पवार साहब देश के महाराष्ट्र के

बड़े नेता हैं, मार्गदर्शक हैं सबके। उन्हें भी चिंता है कि राज्य में सरकार

क्यूं नहीं बन रही। अभी राज्य में अस्थिरता है, उन्होंने भी बातचीत में

चिंता जताई। हमने थोड़ी बहुत बातचीत की। आगे की बात आगे सोचेंगे।’

इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार रात नागपुर जा कर

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की। फडणवीस रात करीब

साढ़े नौ बजे नागपुर स्थित संघ मुख्यालय पहुंचे और डेढ़ घंटे बाद वह वहां

से रवाना हो गए। बैठक में क्या कुछ हुआ, उस बारे में संघ के पदाधिकारियों

ने चुप्पी साध रखी है। लेकिन ये कयास लगाए जा रहे हैं कि यह मुलाकात

21 अक्टूबर के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में पैदा हुए राजनीतिक

गतिरोध पर विचार विमर्श करने के लिये थी।

लेकिन इन दोनों मुलाकातों से अलग नीतीन गडकरी और कांग्रेस नेता अहमद

पटेल की मुलाकात पर चर्चा अधिक हो रही है। यूं तो इस मुलाकात के बाद

अहमद पटेल भी साफ कर चुके हैं कि यह मुलाकात किसानों के मुद्दों को

लेकर थी। कांग्रेस नेता ने नितिन गडकरी से मुलाकात के बाद कहा कि

मैं उनसे किसान मुद्दों पर मिला था। यह एक राजनीतिक बैठक नहीं थी

या महाराष्ट्र की राजनीति पर नहीं थी। गौरतलब है कि 21 अक्टूबर को

288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के लिए हुए चुनावों में भाजपा ने 105

सीटों, शिवसेना ने 56, राकांपा ने 54 और कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत दर्ज

की। अब सरकार गठन के लिए मात्र दो दिन का समय बचा है।



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